भिवानी। एक माह से पेयजल संकट झेल रहे खरक खुर्द के ग्रामीणों का धैर्य वीरवार को जवाब दे गया। ग्रामीण सड़क पर उतरे और दिल्ली-पिलानी नेशनल हाईवे जाम कर दिया। महिलाएं बीच सड़क बैठ गई। ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। जाम की सूचना पर पहुंची पुलिस ने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया मगर ग्रामीण नहीं माने। बाद में जनस्वास्थ्य विभाग के एक्सईएन मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों ने उन्हें भी खरी-खरी सुनाई और बताया कि एक माह से जेई और कर्मचारियों की लापरवाही के कारण पानी नहीं आ रहा है। ग्रामीणों ने स्टाफ बदलने की मांग की। ग्रामीणों के विरोध को देखते हुए एक्सईएन ने दोपहर बाद तक पानी देने और यहां से कर्मचारियों को बदलने का आश्वासन दिया। जिसके बाद ग्रामीण शांत हुए और जाम खोला।
मामला वीरवार सुबह करीब आठ बजे का है। एक माह से पानी सप्लाई न आने का आरोप लगाते हुए खरक खुर्द गांव के ग्रामीण कलिंगा मोड़ के पास दिल्ली-पिलानी नेशनल हाईवे पर जुटे और रोड जाम कर दी और चेतावनी दी कि जब तक नल में पानी नहीं आता, जाम नहीं हटाएंगे। नेशनल हाईवे पर जाम होने के कारण मार्ग के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गई। जाम की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया। मगर ग्रामीण नहीं माने। बाद में जनस्वास्थ्य विभाग के एक्सईएन मौके पर पहुंचे और आश्वासन दिया कि दोपहर बाद तक पेयजल सप्लाई आ जाएगी। साथ ही कर्मचारियों की मांग पर खरक खुर्द के जलघर में तैनात कर्मचारियों को भी बदलने का आश्वासन दिया। जिसके बाद ग्रामीण शांत हुए और जाम खोला। जाम मुख्य मार्ग पर होने के कारण अनेक बसें भी जाम में फंसी रही। जाम खुलने के बाद सभी ने राहत की सांस ली।
कर्मचारी कर रहे कामचोरी, एक माह से नहीं आ रहा पानी
खरक खुर्द के ग्रामीण दलेल सरपंच, संत सिंह, लाभ सिंह, वीरेंद्र सिंह, विकास सरपंच, विनोद कुमार, कैप्टन सुंदर सिंह, सुग्रीव, दीपक, सोनू पंच, ममता, कमलेश, सुनीता ने बताया कि पिछले एक माह से गर्मी चर्म पर है और पीने को पानी नहीं है। पानी के लिए वे पांच-पांच किलोमीटर खेतों में जाते हैं, जहां से जमीन का पानी लाते हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यहां जिन कर्मचारियों और जेई की नियुक्ति कर रखी है, वे जानबूझकर अव्यवस्था बनाए हुए हैं। अब पीछे नहर में पानी आया मगर यहां फिर भी न टैंक भरे और न ही पेयजल सप्लाई की गई। कुछ गांव के कर्मचारी हैं, जो काम नहीं कर रहे। उन्हें तुरंत बदला जाए ताकि गांव में पेयजल समस्या न रहे। गांव की आबादी करीब 25 हजार है, जो पानी के लिए परेशान है।