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जहरगिरी आश्रम में आज उमड़ेगा आस्था का सैलाब, मास्क और दोनों टीके अनिवार्य

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बाबा जहरगिरी आश्रम। - फोटो : Bhiwani
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भिवानी। हालुवास गेट स्थित सिद्धपीठ बाबा जहरगिरी आश्रम में परमहंस बाबा जहरगिरी की पुण्यतिथि पर 11 जनवरी को वार्षिक भंडारे का आयोजन किया जा रहा है। इसके लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। कार्यक्रम में उन्हीं लोगों को अनुमति मिलेगी जिन्होंने कोरोना से बचाव के दोनों टीके लगवा लिए हों और मास्क पहना हो।
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उल्लेखनीय है कि बाबा के दरबार में मत्था टेकने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। भंडारे के साथ ही यहां पर संत समागम का आयोजन भी किया जाएगा। इस भंडारे की खास बात यह है कि यहां केवल शहर से ही नहीं, बल्कि देश-विदेश से भी साधु-संत व श्रद्धालुगण प्रसाद चखने यहां पहुंचते हैं। भंडारे में बनने वाले लड्डुओं का प्रसाद गंगाजल से बनाया जाता है। इसके लिए हरिद्वार से सवा लाख लीटर गंगाजल मंगवाया जाता है। कोरोना माहामारी को देखते हुए आश्रम के पीठाधीश्वर अंतरराष्ट्रीय श्रीमहंत जूना अखाड़ा डॉ. अशोक गिरी महाराज ने आग्रह किया है कि भंडारे में पहुंचने वाले सभी लोग वैक्सीन की दोनों डोज लगवाकर एवं सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए ही पहुंचे।
बाबा जहरगिरी के आने पर आसमान से बरसे थे सोने-चांदी के सिक्के
एक दंतकथा के अनुसार जब बाबा जहरगिरी महाराज भिवानी में आए थे तो उस समय सोने-चांदी के सिक्कों की बारिश हुई थी। वे भिवानी के बाराम नामक सेठ की भक्ति से प्रसन्न होकर आए थे। लगभग 137 वर्ष की आयु होने तक वे यहां रहे और उसके बाद वे ब्रह्मलीन हो गए। उसके बाद सेठ खुबाराम गिरी ने महंत के रूप में आश्रम संभाला। उनके बाद केशव गिरी, बिहारी गिरी, गुप्त गिरी, मंगल गिरी बाबा, शोला बाबा, शंकर गिरी महाराज ने आश्रम को संभाला। उनके चोला छोड़ने के बाद अब महंत अशोक गिरी आश्रम की बागडोर संभाल रहे हैं। बता दें कि महंत डॉ. अशोक गिरी ने दर्शनशास्त्र में पीएचडी की है।
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300 साल पहले छोटे से कमरे में शुरू किया था आश्रम
भिवानी को छोटी काशी कहा जाता है। धर्म के प्रति यहां के लोग पुरातन समय से ही जुड़े हुए हैं। जहरगिरी आश्रम भी लगभग 300 वर्ष पूर्व एक छोटे से कमरे में शुरू हुआ था। उसके बाद लगातार यहां विकास होता रहा और अब यहां बड़ा आश्रम बन चुका है। आश्रम का विकास होने के साथ-साथ यहां पर अलग-अलग व्यवस्थाएं भी की गई हैं। आश्रम में बच्चों को वैदिक शिक्षा पद्धति से पढ़ाया जाता है।
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