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यातायात नियमों के प्रति जागरूकता की दरकार, अधिकारियों को 20 लाख के बजट का इंतजार

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न इंडीगेटर, न ही रिफ्लेक्टर....। शहर की मुख्य सड़क से दो ट्राली जोड़कर ले जाता टैक्टर चालक। संवाद - फोटो : Bhiwani
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संजय वर्मा
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भिवानी। धुंध में यातायात नियम जागरूकता की तस्वीर भी धुंधली हो गई है। यातायात नियमों के प्रति जागरूकता की दरकार है तो अधिकारियों को 20 लाख रुपये के बजट के आने का इंतजार। क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय के पास बजट नहीं आने से जागरूकता की कमान भी अटक गई है। वहीं धुंध गहराने के साथ ही सड़क पर हादसों की संख्या भी लगातार बढ़ गई है।
जिले में आठ से 10 डेथ प्वाइंट ऐसे हैं, जहां हर साल अत्यधिक सड़क हादसे होते हैं, मगर इन बिंदुओं पर सड़क सुरक्षा के प्रबंध भी अधूरे हैं। जिले के अधिकतर मुख्य मार्ग नेशनल हाइवे अथॉरिटी के दायरे में आ गए हैं। इसी के साथ मार्गों की चौड़ाई भी बढ़ गई और इन पर दौड़ने वालों की रफ्तार भी दोगुनी हो गई, लेकिन हादसों में कोई कमी नहीं आई।
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यातायात पुलिस और क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी कार्यालय द्वारा धुंध के मौसम में सड़क सुरक्षा सप्ताह, सड़क सुरक्षा माह और सड़क सुरक्षा पखवाड़ा जैसे जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाते हैं। दोनों ही विभाग सड़क पर दौड़ने वाले भारी व माल ढुलाई वाहनों के साथ-साथ छोटे वाहनों के चालकों को भी यातायात नियमों का पाठ पढ़ाते हैं। इसी के साथ स्कूलों में भी यातायात नियमों का सबक बच्चों को कक्षा में बैठकर ही इन अधिकारियों द्वारा सिखाया जाता है, लेकिन इस बार ये सबक खुद अधिकारी भी नहीं सीख पा रहे हैं। क्योंकि उनके हाथ अभी बजट नहीं लगा है। क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी कार्यालय के पास हर साल केंद्र व राज्य सरकार की तरफ 20 लाख रुपये का बजट आता है। इस बजट में भारी व माल ढुलाई वाहनों पर रिफ्लेक्टर टेप लगाने, स्कूलों में बच्चों को जागरूकता का पाठ पढ़ाने, पंपलेट और फ्लैक्स बोर्ड लगाने सहित रिफ्लेक्टर जैकेट बांटने के लिए सामान खरीदा जाता है। इसके अलावा अन्य जागरूकता कार्यों में इस बजट से ही काम लिया जाता है, लेकिन अब तक ये बजट नहीं आया है, इस वजह से जागरूकता की मुहिम भी ठंडी पड़ी है।
आरटीए कार्यालय से पांच हजार से अधिक कॉमर्शियल वाहन रजिस्टर्ड
भिवानी आरटीए कार्यालय से करीब पांच हजार से अधिक कॉमर्शियल वाहन रजिस्टर्ड हैं। इसे अलावा दस साल पुराने कॉमर्शियल वाहनों की एनओसी जारी की जा चुकी है, जिसके बाद भिवानी में कोई भी वाहन दस साल से पुराना नहीं है। एनओसी लेने के दायरे में भी करीब साढ़े सात सौ वाहन आते हैं। कॉमर्शियल वाहनों को चलाने वालों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करना व नियम तोड़ने पर उन पर कार्रवाई करना भी आरटीए के दायरे में आता है।
ये मोड़ जानलेवा
शहर में कई ऐसे बिंदु हैं, जो डेथ प्वाइंट के नाम से बदनाम हैं। इनमें भिवानी-महम रोड पर चांग मोड़, गुजरानी मोड़ शामिल हैं। इसी तरह भिवानी-हांसी मार्ग पर तिगड़ाना मोड़, भिवानी-जींद मुख्य मार्ग पर घुसकानी मोड़, तालू मोड़, मुंढ़ाल चौक आता है। इसी तरह दिल्ली-पिलानी नेशनल हाईव पर खरक में कलिंगा मोड़, भिवानी-लोहारू मार्ग पर गांव देवसर मोड़, लोहानी मोड़ शामिल हैं। (संवाद)
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नहीं आया बजट
सड़क सुरक्षा कार्यक्रमों के लिए सरकार की तरफ से बजट आता है, लेकिन अब तक बजट नहीं आया है। धुंध के मौसम में सड़क पर यातायात नियमों के प्रति वाहन चालकों को जागरूक करना बहुत जरूरी है, क्योंकि इसी दरमियान अत्यधिक सड़क हादसे होते हैं। हमारा प्रयास है कि बजट आने के बाद जल्द से जल्द सड़क हादसों की रोकथाम के लिए योजनाबद्ध तरीके से जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे।
- अंग्रेज सिंह, सचिव क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी कार्यालय भिवानी।
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