भिवानी। एक साल से बिस्तर पर करवट लेने को भी तरस रहा 18 साल का शंकर दर्द और बेबसी में सुन्न पड़ गया है। उसके पूरे शरीर पर गहरे जख्म उसकी बेबसी और दर्द को साफ बयां कर रहे हैं। उसकी लाचारी यह है कि अब वह बिस्तर से उठना तो दूर एक करवट भी नहीं ले सकता।
बिस्तर में पड़े-पड़े उसका धड़ से नीचे का हिस्सा भी पूरी तरह से सुन्न हो गया है, जिसमें उसे दर्द तो दूर मामूली स्पर्श का भी अहसास नहीं होता। शंकर पांच बहनों में इकलौता भाई है। उसकी बदनसीबी यह है कि वह अपनी बहनों पर ही बोझ बन गया है। उसकी बहनों से भी इकलौते भाई का यह दर्द देखा नहीं जाता। उसका इलाज कराने में असमर्थ होने के बावजूद भी हर दर पर मदद की गुहार लगा चुकी हैं। जिला प्रशासन और रेडक्रॉस ने भी बेडसोर बीमारी से बेबस शंकर की मदद के लिए हाथ आगे नहीं बढ़ाए हैं।
चेजारान ढाणी निवासी 18 वर्षीय शंकर के पिता की तीन साल पहले मौत हो चुकी है, जबकि दस साल पहले उसने अपनी मां को खो दिया था। शंकर की सबसे छोटी बहन बेबी ने बताया कि वे पांच बहनें और एक भाई है। उसके पिता गंगराम राजमिस्त्री का काम करते थे। उसकी सबसे बड़ी बहन रेखा, उसके बाद पूजा, कमलेश और दर्शना के बाद शंकर है। सबसे छोटी वह खुद है। सभी पांचों बहनें शादीशुदा हैं। उसकी बहन पूजा अपने पति कृष्ण कुमार के साथ उसके भाई की देखभाल के लिए हिसार से अपना घर बार छोड़कर यहां रह रहे हैं। शंकर के जीजा कृष्ण कुमार ने बताया कि करीब एक साल से शंकर बिस्तर पर ही है। उसके पूरे शरीर पर गहरे जख्म हो गए हैं। जिसकी वजह से उसकी हालत लगातार बिगड़ रही है। कृष्ण का कहना है कि वह अपने इकलौते साले की जिंदगी बचाने और उसे पूरी तरह से स्वस्थ कराने के लिए रोहतक पीजीआई और हिसार के बड़े अस्पतालों में भी दिखा चुका है। रोहतक पीजीआई के चिकित्सकों ने भी हाथ खड़े कर जवाब दे दिया। हिसार में इसका महंगा इलाज बताया जा रहा है। उसके इलाज में हर रोज करीब 13 हजार रुपये का खर्च बताया है। चार माह तक इस इलाज को लेना होगा, जिस पर करीब 16 लाख रुपये का खर्च आएगा। मगर इतनी रकम उनके पास नहीं है।
मेरा घर बिकवा दो
बिस्तर पर बेबसी के आंसू बहा रहे शंकर का कहना है कि उसने अपने इलाज के लिए घर बेचने की भी ठान ली है, मगर उसका घर भी नहीं बिक रहा है। उसका कहना है कि ऐसी जिंदगी से मैं तंग आ चुका हूं। भाई के मुंह से बीमारी की लाचारी में ऐसी हताशा भरी बातें सुनकर बहनों के आंखों में भी आंसू झलक आते हैं।
पहले ब्रेन ट्यूमर, फिर रीढ़ की हड्डी हुई भी बेकार
शंकर को पहले ब्रेन ट्यूमर हो गया था। जिसका चेकअप रोहतक पीजीआई में कराया था। इसके बाद लगातार बिस्तर पर रहने की वजह से उसकी रीढ़ की हड्डी भी बेकार होना शुरू हो गई। जिसका भी उपचार दिलाया गया। मगर उसकी हालत में कोई सुधार नहीं आया। शंकर के पूरे शरीर पर गहरे जख्म बनना शुरू हो गए। जिससे उसकी जिंदगी और भी दर्दनाक होती चली गई। अब शंकर को बेडसोर हो गया है। जिससे धीरे-धीरे उसका शरीर भी गलने लगा है।
क्या है बेडसोर
जब व्यक्ति किसी एक करवट या अवस्था में लंबे समय तक बना रहता है तो उस तरफ की त्वचा पर दवाब पड़ने लगता है। ऐसा अक्सर उन अंगों में होता है, जहां त्वचा और हड्डी के बीच अधिक मांस नहीं होता, जैसे टखने, पीठ, कोहनी, एड़ी और कूल्हा। दबाव के कारण उस हिस्से की त्वचा को नुकसान पहुंचने लगता है और वहां घाव बनने लगते हैं। इन जख्मों को बेडसोर या दबाव अल्सर कहा जाता है। यह समस्या उन लोगों को ज्यादा हो सकती है, जो व्हीलचेयर पर हैं, बुढ़ापे या किसी शारीरिक समस्या के कारण ज्यादा समय बिस्तर पर बिताते हैं या जिन्हें अपने शरीर की स्थिति बदलने में परेशानी होती हो। कुछ मामलों में बेडसोर के कारण गंभीर किस्म के संक्रमण भी हो सकते हैं, जिनमें से कुछ जानलेवा भी हो सकते हैं। (संवाद)
अस्पताल में इलाज जरूरी
ऐसे मरीज को घर पर नहीं, बल्कि किसी अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में रखना बहुत जरूरी है। लगातार जख्म बनने से पूरे शरीर में संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है, जिससे मरीज की मौत भी हो सकती है। नागरिक अस्पताल में अगर शंकर का उपचार संभव हुआ तो उसकी मेडिकल हिस्ट्री की जांच कर पता लगाएंगे और उसे यहां सभी सुविधाएं मुहैया कराएंगे।
-डॉ. यतिन गुप्ता, सीनियर फिजिशियन, नागरिक अस्पताल भिवानी।