पुराने जलघर के नए टैंक में डाला जा रहा मिट्टी युक्त पानी।
भिवानी। भले ही शहरी दायरे में पेयजल आपूर्ति नियमित हो चुकी है लेकिन अब नहरों के रास्ते अत्यधिक मिट्टी युक्त पानी जलघर के टैंकों तक पहुंच रहा है। इसकी वजह से पेयजल आपूर्ति में भी पानी का स्वाद बिगड़ गया है। ये पानी मिट्टी युक्त यानी गिदलाया है, जिसमें बदबू नहीं है लेकिन पानी में मिट्टी के कण हैं। इस पानी को सिंगल क्लोरिनेशन से भी साफ नहीं किया जा सकता है।
ऐसे में अब विभाग डबल क्लोरिनेशन यानी क्लोरिनेशन में दवा की मात्रा बढ़ाएगा। बता दें कि नहरों के रास्ते आने वाले पानी में इस समय अत्यधिक मिट्टी है जो टैंकों से क्लोरिनेशन के बाद बूस्टर के टैंकों में पहुंचने पर भी साफ नहीं हो पा रही है। शहर वासी भी नलों से घरों के अंदर पहुंच रहे मिट्टी युक्त पानी को पीने से गुरेज कर रहे हैं, क्योंकि ये पानी पीने से पेट में बीमारियों का संक्रमण का खतरा भी बना है। क्योंकि इस समय जल जनित बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। प्रदूषित पानी के सेवन से सेहत भी बिगड़ सकती है।
भिवानी के पुराना जलघर टैंकों के अंदर नहरों से लिफ्ट कर नए टैंकों के अंदर डाले जा रहे गंदे पानी की वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। इसमें टैंकों के अंदर डाला जा रहा पानी इतना गंदा है कि इसमें बहुत ज्यादा मिट्टी है। जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग टैंकों में पानी की आपूर्ति करने से पहले उसे बूस्टर तक आते आते क्लोरिनेशन की प्रक्रिया से गुजारा जाता है। मगर इस समय क्लोरिनेशन के बाद भी पानी को साफ नहीं किया जा सकता है। ऐसे में इसे डबल क्लोरिनेशन के बाद ही कुछ हद तक साफ किया जा सकता है।
अगर विभाग क्लोरिनेशन में दवाई की मात्रा को ज्यादा बढ़ता है तो फिर भी पानी का स्वाद फीका यानी नमकीन हो जाता है। जिससे ये पानी बिना उबालकर पीना भी सेहत के लिए हानिकारक होता है। फिटकरी से भी पानी में मिट्टी नीचे बैठ जाती है, इस समय विभाग पानी को साफ करने का हर जतन अपनाने में लगा है।
लीकेज से गंदे पानी से भी जूझ रहा है शहर
शहर में पानी की लाइनों की लीकेज की वजह से भी कई हिस्सों में गंदा पानी पहुंच रहा है। लीकेज के पानी में सीवर का गंदा पानी मिक्स होकर घरों तक पहुंच रहा है, मगर टैंकों के अंदर पहुंचा मिट्टी युक्त पानी भी घरों के अंदर बाल्टी में भरने पर भी कई घंटों बाद रेत नीचे नहीं बैठता, क्योंकि मिट्टी के ये बहुत ही महीन कण हैं जो नहरों के रास्ते जलघर टैंकों के जरिए लोगों के घरों तक पहुंच रहे हैं।
जलघर के टैंकों में इस समय नहरों में आने वाला पानी मिट्टी युक्त हैं। इससे क्लोरिनेशन के बाद ही लोगों को सप्लाई में दिया जा रहा है। पानी को शुद्ध करने के लिए क्लोरिनेशन की मात्रा बढ़ाई जाएगी और लोगों को पेयजल आपूर्ति में स्वच्छ पानी ही मिलेगा।
- ताजदीन, कनिष्ठ अभियंता, शहरी पेयजल शाखा