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Bhiwani News: सैनिक से संत बने सदानंद को पीएचडी की उपाधि

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स्वामी सदानंद महाराज।
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भिवानी : जिले के छोटे से कस्बे जूई कलां के भानू से सेना अधिकारी और आध्यात्मिक गुरु तक का सफर तय करने वाले सदानंद महाराज को अब पीएचडी की उपाधि देने की तैयारी है। गोवंश संरक्षण, पोलियोग्रस्त लोगों की सर्जरी, गरीब की बेटियों का सामूहिक विवाह , सेना और थैलेसीमिया पीड़ितों के लिए रक्तदान और बेसहारा महिलाओं के लिए आश्रम बनाकर मानवता की सेवा कर रहे सदानंद महाराज को भिवानी का चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय मानद डिग्री से नवाजेगा। 15 जनवरी को भिवानी में होने वाले सीबीएलयू के दीक्षांत समारोह में हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दतात्रेय के हाथों वे ये सम्मान हासिल करेंगे। सीबीएलयू में ये पहले धार्मिक गुरु और संत होंगे जिन्हें ये सम्मान मिलेगा।
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स्वामी सदानंद महाराज प्रदेशभर में 71 गोशालाएं खोलकर 80 हजार गोवंश को संरक्षण देने के साथ-साथ देशभर में एक लाख 30 हजार पोलियोग्रस्त लोगों की सर्जरी ऑपरेशन करा चुके हैं। वहीं पांच हजार जरूरतमंद कन्याओं के सामूहिक विवाह कराने का गौरव भी उनको हासिल है। सैनिक से संत बने सदानंद भारतीय सेना, थैलेसीमिया और कैंसर पीड़ितों के लिए अब तक एक लाख 95 हजार यूनिट रक्त एकत्रित करा चुके हैं और बेसहारा, मंदबुद्धि व दिव्यांगजनों के अलावा महिला आश्रमों की मदद से भी मानवता की सेवा कर रहे हैं।
शिक्षक के रूप में की थी करियर की शुरुआत, सैन्य अधिकारी बन भारत-पाक युद्ध में भी लिया हिस्सा
सदानंद महाराज का बचपन का नाम भानू था। भिवानी जिले के गांव जूई कलां में खंडेलवाल ब्राह्मण परिवार में किसान पिता ब्रजलाल व माता शिवबाई की कोख से एक अगस्त 1945 को पैदा हुए भानू ने स्नातक की शिक्षा पूरी करने के बाद अध्यापक के तौर पर अपने कॅरियर की शुरुआत की थी। 1962 में उनकी पहली नियुक्ति हिसार के गांव पाबड़ा के सरकारी स्कूल में हुई। इसके बाद 1965 में उन्होंने सैनिक के रूप में देश सेवा का दात्यिव निभाया और भारत पाकिस्तान युद्ध में सियाचिन सीमा पर भारतीय सेना में मेजर के रूप में सैनिक दायित्व निभाया। इसके बाद फिर बतौर कैप्टन 1971 के युद्ध में भी भागेदारी की।
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युद्ध की समाप्ति के बाद हुआ ह्दय परिवर्तन, बन गए संन्यासी
सेना में तैनाती के दौरान ही सिलीगुड़ी के श्रीकृष्ण प्रणामी आश्रम में उनकी मुलाकात मंगलादास महाराज से हुई, जहां उनका हृदय परिवर्तन हुआ और गुरु के आदेश पर 5 फरवरी 1972 को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने के बाद संन्यास लेकर आध्यात्मिक क्षेत्र में कदम रखा। इसके बाद स्वामी राधिकादास महाराज को गुरु धारण कर उन्होंने दीक्षा ली। गुरु की समाधि के उपरांत सदानंद महाराज श्रीकृष्ण प्रणामी जनकल्याण ट्रस्ट संचालक और श्रीकृष्ण प्रणामी संप्रदाय में आध्यात्मिक गुरु के तौर पर अपना दायित्व निभाते हुए मानवता की सेवा में लग गए।

चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय का प्रेमनगर स्थित नए परिसर में 15 जनवरी को दीक्षांत समारोह होगा। इसमें हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दतात्रेय बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करेंगे। इस दौरान आध्यात्मिक गुरु स्वामी सदानंद महाराज को उनकी मानव, गो सेवा और क्षेत्र में सामाजिक सामंजस्य स्थापित किए जाने के लिए मानद उपाधि से अलंकृत कर सम्मानित किया जाएगा। किसी धर्मगुरु को पहली बार ये सम्मान दिया जाएगा।
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-प्रोफेसर राजकुमार मित्तल, वीसी, सीबीएलयू भिवानी।
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