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दरियाई घोड़े सोनू को दूसरे चिड़ियाघर भेजने की तैयारी

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फोटो चिड़ियाघर में छोटे भाई श्याम के साथ सोनू। संवाद - फोटो : Bhiwani
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संजय वर्मा
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भिवानी। चिड़ियाघर में 28 साल के हो चुके वयस्क दरियाई घोड़ा सोनू को दूसरे चिड़ियाघर में भेजने की तैयारी हो रही है। वहीं नए वन्य प्राणी मेहमान के आगमन की आस भी प्रबल हो गई है, क्योंकि इसके बदले दूसरा वन्य जीव चिड़ियाघर में लाया जाएगा। फिलहाल यह तय नहीं हुआ है कि उसके बदले कौन सा वन्य जीव यहां आएगा। वहीं, कोरोना की वजह बंद हुए चिड़ियाघर को आम लोगों के लिए इस माह के तीसरे सप्ताह तक खोला जा सकता है।
सोनू को दूसरे चिड़ियाघरों में भेजने के लिए सेंट्रल जू अथॉरिटी की वेबसाइट पर रिक्वेस्ट डालने की भी तैयारी है। दरियाई घोड़ा सोनू का जन्म भिवानी के चिड़ियाघर में 1994 में हुआ था। आक्रामक होने की वजह से फिलहाल उसे बाड़े में परिवार से अलग रखा गया है।
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भिवानी का चिड़ियाघर करीब दस एकड़ में फैला है, जिसे सन 1982 में चालू किया था। दिल्ली के चिड़ियाघर से 1984 में मादा दरियाई घोड़ा सोनिया को भिवानी चिड़ियाघर में लाया गया था। उसी से 1994 में नर दरियाई घोड़ा सोनू पैदा हुआ था। इसके बाद 2012 में नर दरियाई घोड़ा सुंदर जन्मा था। सोनिया ने 2019 में फिर से नए दरियाई घोड़े श्याम को जन्म दिया। सोनू अब वयस्क होने के साथ साथ आक्रामक भी हो गया है, उसे इसलिए अलग रखा गया है, ताकि दूसरे दरियाई घोड़ों को कोई नुकसान न पहुंचा दे। सोनू प्रजनन के लिए भी अब पूरी तरह से तैयार है, अगर यहां कोई दूसरी मादा दरियाई घोड़ा होती तो शायद उसे दूसरे चिड़ियाघर भेजने की नौबत नहीं आती, अब उसे दूसरे चिड़ियाघर भेजा जाएगा तो नियम के अनुसार दूसरा कोई नया वन्य मेहमान भी आएगा।
घड़ियाल के बाड़े में दो वयस्क और आठ बच्चे
चिड़ियाघर में घड़ियाल के बाड़े की चहल पहल भी बढ़ गई है, क्योंकि उसमें दो वयस्क नर और मादा के अलावा आठ बच्चों का कुनबा हो गया है। घड़ियाल का वयस्क जोड़ा पीपली के चिड़ियाघर से 2009 में यहां लाया गया था। जिसके बाद इनका परिवार यहां फलफूल रहा है।
अभी गीता और सुधा के मन नहीं भाया नर शेर शिवा
चिड़ियाघर में बबर शेर के बाड़े में सन्नाटा छाया है, क्योंकि हाल ही में इंदौर के चिड़ियाघर से लाया गया नर शेर शिवा यहां की मादा शेर गीता और सुधा के मन नहीं भाया है। फिलहाल उसे अलग ही रखा गया है। हालांकि चिड़ियाघर प्रशासन उनके आपस में घुलने मिलने देने के मौके भी दे रहा है, मगर उनके पास आने पर झड़प का खतरा भी बना है, इसलिए एहतियातन उन्हें अलग रखना ही बेहतर विकल्प है।
तेंदुआ के बाड़े नहीं गूंजी नन्हें शावक की गुर्राहट
चिड़ियाघर में तेंदुआ का बाड़ा भी है। इसमें कई सालों से नन्हें शावक की गुर्राहट नहीं गूंजी है। क्योंकि नर तेंदुआ सन्नी 16 साल का हो चुका है। उसे 2012 में हिमाचल के शिमला चिड़ियाघर से यहां लाया गया था, जबकि मादा तेंदुआ सोनिया छत्तबीड़ पंजाब के चिड़ियाघर से 2019 में यहां लाई गई थी। फिलहाल इनका कुनबा अभी शुरू नहीं हुआ है।
भालू प्रीतो व डूको भी अकेले
भालू के बाड़े में मादा भालू प्रीतो और नर काला भालू डूको हैं। इन्हें हिमाचल प्रदेश के चिड़ियाघर से 2019 में यहां लाया गया था। इनके बाड़े में भी अभी कोई नया मेहमान नहीं आया है।
41 चीतल और दो सांभर
चिड़ियाघर में हिरन के बाड़े में 41 चितल और दो सांभर हैं। यहां लगातार परिवार बढ़ रहा है। इन्हें फिलहाल कोई गोद लेने नहीं आया है। क्योंकि इन्हें खुराक के लिए गोद देने के लिए चिडिय़ाघर प्रशासन ने विकल्प खोल रखे हैं।
ये है वन्य जीवों को गोद देने के लिए राशि
चिड़ियाघर में वन्य जीवों के प्रति लोगों का लगाव बढ़ाने के लिए उन्हें गोद देने की योजना भी है, मगर कई सालों से कोई इन्हें गोद लेने नहीं आया है। पहले तो कोविड वजह बनी, अब विकल्प खुले हैं तो कोई सामने नहीं आ रहा है। सबसे महंगी खुराक टाइगर और दरियाई घोड़े की है। वन्य जीवों को गोद लेने के लिए सालाना व मासिक राशि तय की गई है। (संवाद)
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वन्य प्रजाति सालाना हर माह
टाइगर 360000 30000
लोमड़ी 52000 4500
उल्लू 12000 1000
मगरमच्छ 38000 3200
घड़ियाल 38000 3200
दरियाई घोड़ा 141000 12000
चीतल हिरन 22500 2000
सांभर 22500 2000
चिंकारा हिरन 22500 2000
काला भालू 50000 4200
काला हिरन 22500 2000
सिल्वर तीतर 1000 100
जंगली मुर्गा 1000 100
कॉकटेल पक्षी 1000 100
जावा चिड़िया 600 50
लव बर्ड 600 50
गिरिगर पक्षी 600 50
बदले में दूसरा जीव लाया जाएगा
दरियाई घोड़ा सोनू वयस्क नर है। इसे दूसरे चिड़ियाघर में भेजने के लिए हायर अथॉरिटी को सूचना भेजी है, जबकि इसकी जगह कोई दूसरा वन्य जीव यहां लाया जाएगा। वन्य जीवों को गोद लेने का प्रावधान भी है, फिलहाल लोग कम ही रुचि दिखा रहे हैं। वन्य जीवों को गोद लेने का मकसद उन जीवों के प्रति लोगों के दिलों में सम्मान और स्नेह बढ़ाना है।
-निरीक्षक ज्योति कुमार, इंचार्ज, चौ. सुरेंद्र सिंह मेमोरियल चिड़ियाघर भिवानी।
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