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प्रेमनगर के ग्रामीणों ने सीबीएलयू का रास्ता रोका, कहा - मांगें माने जाने तक नहीं खोलेंगे

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प्रेमनगर में धरने पर नारेबाजी करते ग्रामीण। संवाद - फोटो : Bhiwani
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भिवानी। मेडिकल कॉलेज और अन्य मांगों को लेकर प्रेमनगर में चल रहे धरने पर बैठे ग्रामीणों ने शुक्रवार को विश्वविद्यालय में आने-जाने का रास्ता बंद कर दिया। किसानों ने पानी की टैंकर खड़े कर सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। सूचना मिलने पर सदर थाना प्रभारी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। ड्यूटी मजिस्ट्रेट ने भी मौके पर पहुंच कर किसानों को मनाने का प्रयास किया मगर उन्होंने बिना मांग पूरी हुए रास्ता खोलने से इंकार कर दिया।
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गांव प्रेमनगर के लोग कई महीनों से वहां बन रहे विश्वविद्यालय के बाहर धरने पर बैठे हैं। उनकी मांग है कि विश्वविद्यालय में दाखिलों और नौकरियों में आरक्षण दिया जाए। इसी वजह से गांव के लोगों ने सैकड़ों एकड़ जमीन सरकार को निशुल्क दे दी थी। किसानों ने आरोप लगाया कि अब सरकार उनके साथ धोखा कर रही है। इसी से नाराज होकर शुक्रवार सुबह किसानों ने विश्वविद्यालय में आने-जाने के मुख्य रास्ते पर पानी के टैंकर खड़े कर रास्ता बंद कर दिया। सूचना मिलते ही सदर थाना प्रभारी विद्यानंद और ड्यूटी मजिस्ट्रेट अशोक कुमार मौके पर पहुंच गए। भारी संख्या में महिला और पुलिस बल भी मौके पर पहुंच गया। दोपहर दो बजे तक अधिकारी किसानों के साथ बात करते रहे, मगर बात सिरे नहीं चढ़ी।
कुलपति भी पहुंचे बात करने
जिला प्रशासन की ओर से किसानों के साथ बात करने के लिए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आरके मित्तल को भेजा गया। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि रास्ते को खोल दें। उन्होंने यह भी कहा कि वे किसानों की मांगों को सरकार तक पहुंचाएंगे। मगर किसानों ने यह कहते हुए रास्ता खोलने से मना कर दिया कि सरकार को उनकी मांग अच्छी तरह पता है। अब तो रास्ता मांग माने जाने के बाद ही खोला जाएगा।
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दाखिलों में मांगा 5 फीसदी आरक्षण
प्रेमनगर के पूर्व सरपंच बिजेंद्र सिंह ने कहा कि गांव को दाखिलों में एक फीसदी आरक्षण दिया गया है। उन्हें दाखिलों में पांच फीसदी और नौकरी में 10 फीसदी आरक्षण चाहिए। सुखबीर ढांडा और सुरेश फौजी ने कहा कि गांव के लोग केवल वही चीज मांग रहे हैं, जिसका वादा उनके साथ सरकार ने जमीन लेते समय किया था। मगर आज सरकार अपने वादों से मुकर रही है। इस दौरान कुलदीप धनाना, संदीप सिवाच और अशोक प्रधान भी मौजूद रहे।
शाम को लौटा पुलिस बल
किसानों ने बिना मांग पूरी हुए रास्ता खोलने से इनकार कर दिया तो शाम तक उनके साथ बातचीत चलती रही। मगर शाम तक जब किसान नहीं माने तो पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी जिला मुख्यालय में लौट आए। हालांकि पुलिस और प्रशासन पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है।
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