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कोविड से अधिक निमोनिया बना नन्हीं जान के लिए खतरा

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नवनीत शर्मा
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भिवानी। कोरोना की तीसरी लहर में जहां एक ओर संक्रमण का खतरा कम हुआ है, वहीं दूसरी ओर लगातार बदलता मौसम निमोनिया के लिए संजीवनी बन रहा है। इन दिनों नागरिक अस्पताल सहित निजी अस्पताल में निमोनिया के काफी मामले सामने आ रहे हैं, जिनका स्वास्थ्य सामान्य न होने के कारण उन्हें अस्पताल में दाखिल भी करना पड़ रहा है। नागरिक अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में रोजाना 100 से अधिक परिजन उनके बच्चों का उपचार करवाने के लिए पहुंच रहे है, जिनमें से निमोनिया के आठ से 10 मरीज सामने आ रहे है। इनमें से अधिकतर बच्चों को नीकू वार्ड में दाखिल कर रहे है। नागरिक अस्पताल के नीकू वार्ड में फिलहाल 20 बच्चे दाखिल है। वहीं दो बच्चों के फेफड़ों में तकलीफ होने के कारण उनमें ऑक्सीजन की कमी हो गई है, जिसकी वजह से नीकू आईसीयू में एडमिट किया हुआ है।
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डेंगू, कोरोना के बाद निमोनिया बना बड़ा खतरा
पिछले दिनों डेंगू की वजह से जिले में हालत खराब हुए थे, वही जनवरी माह में कोरोना संक्रमण की रफ्तार ने जिले के हालत चिंताजनक कर दिए थे। अब मौसम परिवर्तन की वजह से बच्चे सर्दी की चपेट में आ रहे है, जिनमें से अधिकतर निमोनिया से ग्रस्त हो रहे है। वहीं लगातार बिगड़ती जा रही शहर की हवा भी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती जा रही है, जिसका नुकसान फेफड़ों को हो रहा है। निमोनिया फेफड़ों में होने वाला संक्रमण है। यह मुख्य रूप से विषाणु या जीवाणु के संक्रमण के कारण होता है। इसके अलावा निमोनिया सूक्ष्म जीव, कुछ दवाओं और अन्य रोगों के संक्रमण से भी हो सकता है। निमोनिया की चपेट में बच्चे, युवा और बुजुर्ग यानी हर आयुवर्ग के लोग आ सकते है।
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निमोनिया के लक्षण
निमोनिया होने पर फ्लू जैसे लक्षण महसूस होते हैं। ये लक्षण धीरे-धीरे या फिर तेजी से विकसित हो सकते हैं। निमोनिया का मुख्य लक्षण खांसी है। रोगी कमजोर और थका हुआ महसूस करता है। बलगम वाली खांसी से ग्रस्त होना। रोगी को बुखार के साथ पसीना और कंपकंपी भी हो सकती है। रोगी को सांस लेने में कठिनाई होती है या फिर वह तेजी से सांस लेने लगता है। सीने में दर्द होना। बेचैनी महसूस होना और भूख कम लगना।
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छोटे बच्चों में निमोनिया के लक्षण:
- छोटे बच्चों को बुखार के साथ पसीना व कंपकंपी होने लगती है।
- जब बच्चों को बहुत ज्यादा खांसी हो रही हो।
- वह अस्वस्थ दिख रहा हो।
- उसे भूख ना लग रही हो।
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घर पर स्वच्छता का रखे विशेष ध्यान:
निमोनिया किसी भी मौसम में हो सकता है, लेकिन सर्दी के मौसम में इसकी आशंका ज्यादा बढ़ जाती है। बच्चों को उतने ही कपड़े पहनाएं, जिससे उसका शरीर गर्म रहे। अगर एंटी-बायोटिक दी जाती हैं तो पूरा कोर्स करें, नहीं तो बीमारी वापस आ सकती है। घर के अंदर या आसपास के प्रदूषण को कम करके और साफ-सफाई का पूरा खयाल रखें।
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निमोनिया के दौरान परहेज:
अगर किसी को खांसी है तो उससे थोड़ा दूर रहें। खांसते समय मुंह पर रुमाल रखें, ताकि मुंह से कीटाणु निकलकर दूसरों पर हमला ना करें। रोगी जिन आहारों के प्रति एलर्जिक है उसे रोगी को न दें। शक्कर व शक्कर के उत्पाद, और अत्यंत मीठे फलों से परहेज रखें। शीतल पेय या खाद्य पदार्थों और व्यावसायिक रूप से प्रोसेस्ड आहार का सेवन न करें।
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विशेषज्ञ की सलाह:
सुबह और शाम के समय ठंड और दोपहर के समय मौसम में गर्मी होने का असर बच्चों की सेहत पर पड़ रहा है। इन दिनों निमोनिया के मामले काफी बढ़ रहे है, ऐसे में परिजन अपने बच्चों का विशेष ध्यान रखें। बच्चों को ठंड से बचाए रखें और उन्हें सांस लेने में कोई दिक्कत या फिर अन्य कोई लक्षण मिल रहे हैं तो तुरंत प्रभाव से रोग विशेषज्ञ चिकित्सक से दिखाएं।
- डॉ. रिटा सिसोदिया, बाल रोग विशेषज्ञ, नागरिक अस्पताल।
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