केरल की पद्धति पर लोगों को इलाज दे रहे पंचकर्म केंद्र का बुधवार सुबह उपायुक्त सुजान सिंह निरीक्षण करने पहुंचे। उन्होंने यहां पंचकर्म चिकित्सा विधि से उपचार लिया। साथ ही बताया कि भिवानी का पंचकर्म केंद्र प्रदेशभर में अव्वल है और अब इसे हेल्थ टूरिज्म हब बनाया जाएगा। इसका प्रोजेक्ट तैयार हो गया है और यहां पार्क, पेड़-पौधे लगाने और बैठने आदि की भी व्यवस्था की जाएगी।
उपायुक्त सुजान सिंह बुधवार सुबह सामान्य अस्पताल के आयुष विभाग में पहुंचे और पंचकर्म केंद्र का निरीक्षण किया। उन्होंने खुद भी यहां पंचकर्म करवाया और कहा कि मानव शरीर में होने वाले वात, पित्त और कफ के दोष को संतुलित करने में पंचकर्म का विशेष महत्व है। आयुर्वेद की पद्धति पंच कर्म पर आधारित भिवानी पंचकर्म केंद्र जल्दी प्रदेश में हेल्थ टूरिज्म के रूप में विकसित किया जाएगा। उपायुक्त ने बताया कि भिवानी का पंचकर्म केंद्र प्रदेश में उच्च पायदान पर हैं। इस पंचकर्म केंद्र के पास पार्क, पौधे व बैठने की व्यवस्था का भी प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। आयुष विंग भवन को नया रूप प्रदान करने के लिए रेनोवेशन का कार्य चल रहा है। आम लोगों के लिए यहां पर अधिक से अधिक चिकित्सा सुविधाओं के लिए नवीनतम संसाधन मुहैया करवाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि आयुष विंग में स्टाफ की समुचित व्यवस्था है। उपायुक्त ने यहां पर योगा पंचकर्मा, आयुर्वेद व होम्योपैथिक ओपीडी का भी निरीक्षण किया।
उन्होंने कहा कि भिवानी पंचकर्म केंद्र केरल की पद्धति पर आधारित है। इसके तहत शरीर को शुद्ध करने के लिए पांच विभिन्न क्रियाओं का प्रयोग इस पद्धति में किया जाता है। इससे शरीर के विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद मिलती है। इस पद्धति का उपयोग करने से शरीर को रोगों से बचाया जा सकता है। इस पद्धति का कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होता। जिला आयुष अधिकारी डॉ. देवेन्द्र शर्मा ने यहां की सुविधाओं की जानकारी दी। इस मौके पर उप सिविल सर्जन डॅा. शिव कुमार कौशिक, आयुर्वेदिक मेडिकल अॅाफिसर, डॉ. हरविन्द्र राणा, डॉ. भारत भूषण, योग विशेषज्ञ डॉ. निशा खट्टर व होम्योपैथिक विशेषज्ञ डॉ. संदीप सहित समस्त स्टाफ सदस्य मौजूद थे।
इस प्रकार दिया जाता है पंचकर्म पद्धति से उपचार : डॉ. गौरव मुंझाल ने बताया कि पंचकर्म पद्धति में पांच प्रकार की क्रियाओं से उपचार किया जाता हैै। कफ दोष आदि दूर करने के लिए वमन क्रिया से मुख से शरीर के दोषों को बाहर निकाला जाता है। पित्त रोग के उपचार के लिए विरेचन क्रिया से गुदा मार्ग से शरीर के दोषों को दूर किया जाता है। इसी प्रकार से गले से ऊपर आंख, नाक व कान के रोगों को दूर करने के लिए नस्य क्रिया से उपचार किया जाता है। वात रोगों के लिए वस्ती क्रिया से गुदा मार्ग से औषधि युक्त द्रव्य दिया जाता है। रक्त दोष के लिए रक्त मोक्षण क्रिया की जाती है।
असाध्य बीमारियों का इलाज भी संभव : उन्होंने बताया कि पंचकर्म पद्धति शरीर का संतुलन बनाए रखने के लिए स्नेहन और संवेदन की क्रियाएं होती हैं। इसमें मालिश, सिरोधारा, स्टीम बाथ व पोटली सेक शामिल हैं। उन्होंने बताया कि पंचकर्म पद्धति से जोड़ों के दर्द, गठिया बाय, अधरंग, लकवा, मस्तिष्क शॉक, डिप्रेशन, उक्त रक्तचाप व डिस्क समस्या का उपचार संभव है। इन बीमारियों से ग्रस्त व्यक्तियों को काफी हद तक आराम मिलता है।