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आंकड़ों में महज डेंगू के 28 केस, अस्पतालों में 100 से अधिक मरीज भर्ती

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भिवानी। जिले में डेंगू मच्छर का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। सरकारी आंकड़ों में डेंगू के महज 28 केस हैं, वहीं जिले के निजी अस्पतालों में 100 से अधिक मरीज सामने आ चुके हैं। मगर इन मरीजों की अधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हुई है। कई मरीज पड़ोसी जिले हिसार और रोहतक के निजी अस्पतालों में भी उपचाराधीन हैं।
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नागरिक अस्पताल के सीनियर फिजिशियन डॉ. यतिन गुप्ता ने बताया कि डेंगू के दौरान मरीज के प्लेटलेट्स कम होने पर उसके मसूड़ों से खून आ सकता है और शरीर पर निशान भी बन जाते हैं। ऐसे में चिकित्सक से स्वास्थ्य जांच जरूर करवाएं। सामान्य व्यक्ति की प्लेटलेट्स डेढ़ लाख से अधिक होती है। डेंगू के मरीज की प्लेटलेट्स कम होती हैं, ऐसे में 24 से 48 घंटे के अंतराल में मरीज की सीबीसी जांच जरूर करवाएं। प्लेटलेट्स कम होने पर अधिक से अधिक पानी, शिकंजी, ओआरएस, नारियल पानी, पपीते के पत्ते का रस पीते रहें।
बकरी के दूध की डिमांड बढ़ी, मिल रहा 300 रुपये किलो
डेंगू के बढ़ते कहर के साथ ही जिले में बकरी के दूध की डिमांड भी बढ़ रही है। पहले बकरी का दूध महज 50 रुपये प्रति किलो के हिसाब से मिलता था, वही दूध अब 300 से 400 रुपये प्रति किलो के हिसाब से मिला रहा है। लोगों का मानना है कि बकरी का दूूध प्लेटलेट्स बढ़ाने में फायदेमंद है, जबकि चिकित्सक इस बात को नकार रहे हैं।
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प्लेटलेट्स बढ़ाने में पपीता और कीवी का सेवन फायदेमंद
सीनियर फिजिशियन डॉ. यतिन गुप्ता ने बताया प्लेटलेट्स बढ़ाने में पपीता और कीवी का सेवन फायदेमंद है। जबकि बकरी का दूध कोई साइंटिफिक प्रमाण नहीं है। दूध कोई भी हो उसका सेवन करते रहें। साथ ही ध्यान रखें की डेंगू में एक बार बुखार कम हो जाता है तो दवा और अन्य सावधानियां बंद न करें, क्योंकि डेंगू छह से सात दिन बाद भी हो सकता है। ऐसे में सावधानी रखें दवा, पौष्टिक आहार का सेवन और अधिक से अधिक आराम करें।
डेंगू के सामान्य लक्षण
सामान्य तौर पर डेंगू के मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, शरीर पर पड़ने वाले लाल निशान, जो थोड़े समय बाद ठीक होने के बाद पुन: वापस भी आ जाते हैं। तेज बुखार, बहुत तेज सिर दर्द, आंखों के पीछे दर्द, उल्टी आना और चक्कर महसूस होना, मसूड़ों से खून आना आदि लक्षण हैं। ऐसे लक्षण होने पर तुरंत चिकित्सक से चेकअप करवाएं।
आइसोलेशन वार्ड बनाया है
नागरिक अस्पताल के वार्ड-नौ को मलेरिया, चिकनगुनिया, डेंगू, स्वाइन फ्लू के मरीजों के लिए आरक्षित कर आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है। साथ ही प्रत्येक एसडीएच और सीएचसी में पांच-पांच बेड रिजर्व रखे हैं, जहां पर मलेरिया, चिकनगुनिया आदि मरीजों को दाखिल किया जा सके। अस्पताल की लैब में भी 24 घंटे के लिए सीबीसी और डेंगू जांच के टेस्ट किए जा रहे हैं। नागरिकों से अपील है कि सप्ताह में एक दिन ड्राई-डे जरूरी बनाए।
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- डॉ. रघुबीर शांडिल्य, सिविल सर्जन
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