भिवानी। जिले की रोडवेज बसों में प्रतिदिन 7 से 8 हजार यात्रियों का आवागमन होता है। लेकिन बढ़ते यात्रियों की एवज में बेड़े में बसें लगातार कम हो रही हैं। बसों की कमी के कारण कई लंबे रूटों पर सेवाएं भी बंद कर दी गई हैं तो कई लोकल रूटों पर भी बसों की संख्या में कमी होने यात्री इंतजार ही करते रह जाते है। अब हालात ये है कि पिछले दिनों 38 बसें कंडम हो गई है और करीब 25 बसें कंडम होने की कगार पर है।
फिलहाल की व्यवस्थाओं की बात करें तो भिवानी डिपो के पास 93 बसें है, जिनमें पांच मिनी बसें, पांच सिटी और 11 किलोमीटर स्कीम की है। जबकि डिपो को जरूरत 170 बसों की है। मौजूद 93 बसों में भी अक्सर 8 से 10 खराब ही रहती हैं। इसका सीधा असर परिवहन व्यवस्थाओं पर पड़ रहा है। पहले जिन रूटों पर 10-10 मिनट में सेवाएं थी, वहां अब लोगों को आधा से एक घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है। वहीं बसों की की कमी के चलेत कई लंबे रूट की सेवाएं तो बंद ही करनी पड़ गई हैं।
इन रूटों पर बंद हुई बस सेवा
बसों की कमी के कारण अलवर, नारनौल, सिरसा, सतनाली, महेंद्रगढ़ रूट पर बसों को बंद किया गया है। इनके अलावा जींद के छह टाइम, हिसार के चार टाइम, गुरुग्राम के दो टाइम, दिल्ली के 10 टाइम, झुंझुनू के दो टाइम, गोहाना के चार, नारनौल के दो, बहल के चार, झोझू के चार, मंढाणा का एक, जूई के दो, दादरी के चार टाइम मिस हो रहे हैं।
इन लंबे रूटों पर चल रही हैं रोडवेज बसें
भिवानी डिपो से फिलहाल अजमेर, देहरादून, हरिद्वार, मथुरा, आगरा, सीकर, झुंझुनू, पिलानी, चुरु में एक-एक बस चल रही है। इनके अलावा चंडीगढ़ में छह, दिल्ली में 20 बसें दौड़ रही हैं। प्रदेशभर में जाने वाली बसों की बात करें तो हिसार, जींद, पानीपत, रोहतक, दादरी, गुरुग्राम, झज्जर, गोहाना, महेंद्रगढ़ में बसें जा रही है। जिलास्तर पर सिवानी, सोरखी, कूंगड़, घुसकानी, मित्ताथल, बलियाली, महम, मानहेरू, झोझू, सैय रिवाड़ी, खरक-कलिंगा, मंढाणा, सिरसी-चैहड़, ढिगावा बड़दू, ढिगावाकारी, तालू, धनाना, ऊण, बौंद, नरसिंहवास, देवराला, धारवानवास, बाढड़ा, अजीतपुर आदि में भिवानी डिपो की बसें दौड़ रही हैं।
कोरोना की तीसरी लहर का अंदेशा, स्वास्थ्य विभाग को दिए 19 ड्राइवर
पहले ही स्टाफ की कमी से जूझ रहे रोडवेज प्रबंधन से एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग ने चालकों की डिमांड की है। जिस पर डिपो के करीब 19 चालकों की ड्यूटी एंबुलेंस सेवा में लगाई गई है। बुधवार को इन्हें स्वास्थ्य विभाग को भेज दिया गया। पहले से ही स्टाफ की कमी से जूझ रहे विभाग के पास अब एक और समस्या खड़ी हो गई है। विभाग के पास कुल 117 ड्राइवर और135 कंडक्टर हैं। जबकि जरूरत 167 चालकों और लगभग इतने ही कंडक्टर की जरूरत है।
एक गांव की बेटियां भी नहीं आती मिनी बसें में, कैसे चले काम
बसों की कमी से जूझ रहे भिवानी डिपो में बेटियों के लिए आई मिनी बसें मिनी ही साबित हो रही है। दरअसल इनमें 30 ही सीटें हैं। इनमें खड़े होकर चलने की भी व्यवस्था नहीं है। इससे ज्यादा बेटियों की संख्या तो एक गांव में हो जाती है। जबकि एक रूट मिलने के बाद चालक को उस रूट के सभी विद्यार्थियों को लाना पड़ता है।
हम मौजूद बसों से ही व्यवस्था बना रहे हैं और जल्द ही नई बसें मिलने की उम्मीद है। मांग पर 19 ड्राइवरों को स्वास्थ्य विभाग में भेजा गया है।
भरत सिंह परमार, टीएम, भिवानी रोडवेज डिपो।
आंकड़ों में परिवहन व्यवस्था
ड्राइवर 117
कंडक्टर 135
कुल बसें 93
मिनी बसें 05
सिटी बसें 05
जिंदगी का लापरवाही भरा सफर... इसे लापरवाही कहें या घर पहुंचने की जल्दबाजी...। रोहतक रोड पर बस के ऊपर ?- फोटो : Bhiwani
बस स्टैंड पर बसों के इंतजार में बैठे यात्री।- फोटो : Bhiwani