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पड़ताल: दमकल गाडिय़ों के टायर कटे, तेल के लिए बजट नहीं, कैसे बुझेगी आग

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दमकल की गाड़िया के फट्टे पड़े टायर। - फोटो : Bhiwani
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भिवानी। अगर आपने दमकल विभाग में फोन मिलाकर कहीं पर आग लगने की सूचना देकर मदद मांगी है तो जरा संभल जाइएगा, क्योंकि गारंटी नहीं कि दमकल गाड़ी समय पर पहुंच पाएगी। ऐसा इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि दमकल विभाग के पास गाड़ियों में तेल डलवाने तक का बजट नहीं है। वहीं गाड़ियों के टायर घिसे-पिटे हैं, जो बीच रास्ते में दम तोड़ सकते हैं। अगर दमकल गाड़ी को सिवानी या फिर लोहारू एवं बहल जैसे दूर दराज इलाके में जाना पड़े तो पहुंचने की कोई तसल्ली नहीं।
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दरअसल हरियाणा अग्निशमन एवं आपात कालीन सेवाएं विभाग ने भिवानी को 2022-23 के बजट में सिर्फ दो करोड़ की राशि मंजूर की, मगर ये बजट मुश्किल से डेढ़ महीना भी नहीं चला और खत्म हो गया। इसके बाद कर्मचारियों के वेतन के भी लाले पड़ गए और अन्य खर्चे भी अटक गए हैं। अब हालत यह है कि अगर कोई दमकल गाड़ी बाहर जाएगी तो उसके तेल का खर्च भी जेब से उठाना पड़ेगा। पांच दमकल गाड़ी तो इस स्थिति में पहुंच गई हैं जिनके टायरों में बड़े बड़े कट लगे हैं, जिन्हें इस्तेमाल किया तो खुद दमकल गाड़ी को दूसरों की मदद की जरूरत पड़ जाएगी।
करीब साल भर पहले ही शहरी निकाय निदेशालय से अलग होकर हरियाणा अग्रिशमन एवं आपातकालीन सेवाएं स्वतंत्र विभाग बनाया गया था। दमकल सेवाओं के लिए अलग से विभाग का गठन करने के साथ ही जिला मुख्यालयों को दमकल गाड़ियों के संचालन, मरम्मत, कर्मचारियों के वेतन एवं अन्य खर्चों के लिए भी बजट जारी किया गया। विभाग ने 2022-23 के लिए अकेले भिवानी जिले के लिए करीब दो करोड़ से अधिक का बजट दिया, मगर ये बजट दमकल की गाड़ी दौड़ाने में करीब डेढ़ माह में ही खर्च हो गया।
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मार्च से जून तक अलर्ट पर रहता है दमकल बेड़ा
फसल कटाई सीजन यानी मार्च की शुरुआत से लेकर जून तक हरियाणा अग्शिनमन एवं आपातकालीन सेवाओं को हाई अलर्ट पर रखा जाता है। इस दौरान कर्मचारियों की तीन शिफ्ट 24 घंटे दमकल बेड़े पर आपात कालीन सेवाओं के लिए तत्पर रहती हैं। कर्मचारियों की छुट्टी भी नहीं होती। ऐसे में बजट के अभाव में दमकल बेड़े की हालत खराब होना बड़ी आग की घटनाओं के वक्त पर संसाधनों की कमी बड़े नुकसान की वजह भी बन सकती है, क्योंकि तेल बजट और मरम्मत नहीं होने से दमकल गाड़ियां भी खड़ी खड़ी कंडम हो रही हैं। भिवानी दमकल विभाग के पास सात बड़ी गाड़ी हैं, जबकि दो हजार लीटर क्षमता की एक छोटी नई गाड़ी हाल ही में बेडे़ में शामिल हुई है। जबकि दो बुलेट बाइक भी हैं। इसके अलावा करीब 32 कर्मचारी हैं।
लोहारू व बहल तक लगानी पड़ती है दमकल गाड़ियों को दौड़
फसल कटाई के सीजन में भिवानी दमकल की गाड़ियों को लोहारू व बहल तक दौड़ लगानी पड़ती है। क्योंकि इन दोनों ही कस्बों में दमकल सुविधाएं नहीं हैं। ज्यादातर खेतों में भीषण आग किसानों के लिए बड़ी मुसीबत होती है, अगर समय पर दमकल नहीं पहुंचे तो पूरी की पूरी फसल ही नष्ट हो जाती है। मई और जून में गर्मी अधिक होने से भी कई जगह आग की घटनाएं हो जाती हैं, जिनमें समय पर पहुंचना जरूरी है। इसलिए दमकल की गाड़ी में हमेशा डीजल टैंक और पानी का टैंक हमेशा फूल रहना जरूरी है। इसी के साथ टायरों की स्थिति भी बेहतर होना जरूरी है।
अप्रैल में करीब दो करोड़ का बजट मिला था, ये बजट बहुत ही कम था, जिसकी वजह से अब काफी परेशानी हो रही है। हमने पत्र लिखकर मुख्यालय से बजट की मांग की है, ताकि दमकल की गाड़ियों में तेल और मरम्मत के कार्य कराए जा सकें। फिलहाल भिवानी में जिला दमकल अधिकारी भी नहीं है। - आजाद सिंह, कार्यवाहक जिला दमकल अधिकारी एवं लीड फायरमैन भिवानी
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