भिवानी। शहर के 56 निजी और सरकारी अस्पतालों में से सिर्फ छह निजी अस्पतालों के पास ही फायर एनओसी है। जिन अस्पतालों के पास एनओसी नहीं है, उनमें नागरिक और ईएसआई अस्पताल भी शामिल हैं। जिन्हें एनओसी दी गई है, उन्हें भी नियमों को ताक पर रखकर दी गई है। यह खुलासा आरटीआई में जिला दमकल कार्यालय से मांगी गई जानकारी के बाद हुआ है।
स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बृजपाल सिंह परमार ने जिला दमकल अधिकारी कार्यालय से जन सूचना अधिकार अधिनियम 2005 के तहत कई बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी। जिसका जवाब दमकल अधिकारी कार्यालय से भेजा गया। इस जवाब में चौ. बंसीलाल जिला नागरिक अस्पताल और हांसी रोड के ईएसआई अस्पताल ने स्थापना से लेकर आज तक दमकल विभाग से कोई एनओसी नहीं ली। शहर के 56 निजी अस्पतालों में से सिर्फ 6 निजी अस्पतालों के पास ही एनओसी दर्शाई गई, लेकिन इन अस्पतालों में भी दमकल की एनओसी के मानक पूरे नहीं हैं। बृजपाल सिंह परमार ने बताया कि अस्पतालों में आग लगने से मरीजों की मौत की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। ऐसे में भिवानी शहर के अंदर संचालित निजी व सरकारी अस्पतालों में दमकल के नियमों की अनदेखी कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
गृह मंत्रालय के आदेश पर भी नहीं की कोई कार्रवाई
बृजपाल सिंह परमार ने बताया कि गृह मंत्रालय भारत सरकार की ओर से निजी व सरकारी अस्पतालों में अत्यधिक हादसे होने के कारण सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को 28 दिसंबर 2020 में आदेश जारी किए थे, जिसमें यह स्पष्ट किया गया था कि सभी निजी व सरकारी अस्पतालों में निरीक्षण कर बिल्डिंग कोड की जांच कराई जाए। इसके अलावा नेशनल बिल्डिंग ऑफ इंडिया व हरियाणा बिल्डिंग कोड एवं केंद्रीय आपदा विभाग द्वारा जारी आदेशों में भी अस्पतालों के लिए दमकल एनओसी अत्यावश्यक है, लेकिन भिवानी में आज तक दमकल एनओसी को लेकर किसी भी अस्पताल की कोई जांच नहीं की गई। यह बात खुद दमकल अधिकारी ने आरटीआई का जवाब में कुबूली है,जबकि नियमानुसार अस्पतालों की बिल्डिंग कोड नियमों के तहत नियमित जांच के भी आदेश हैं।
टीम जांच करती है
सभी अस्पतालों और स्कूलों में फायर सेफ्टी नियम पूरे होना अत्यावश्यक है। इन नियमों की समय-समय पर जांच भी नगर परिषद अधिकारियों द्वारा की जानी चाहिए। जिला प्रशासन की तरफ से इस कार्य के लिए स्पेशल कोई टीम नहीं हैं, जबकि नगर परिषद यह कार्य रूटीन में करती है। अगर कोई शिकायत आती है या फिर विशेष मुहिम चलाई जाती है तभी एक टीम ऐसे मानकों की जांच करती है।
-संदीप अग्रवाल, एसडीएम भिवानी।