भिवानी। लॉक डाउन की शर्तों में कुछ ढील मिली तो नागरिक अस्पताल में ऑपरेशन ने भी रफ्तार पकड़ ली। इतना ही नहीं चिकित्सकों की ओपीडी में भी मरीजों का इजाफा हो गया। जिनके आगे नागरिक अस्पताल में प्रबंध भी नाकाफी साबित हो रहे हैं। सुबह शाम की ठंड और दिन में मौसम गर्म होने से सेहत पर इसका बुरा असर पड़ रहा है वहीं ओपीडी में पहुंच रहे लोगों के लिए न बैठने की ठीक से जगह है न पीने के पानी का कोई इंतजाम।
अस्पताल परिसर में मरीज जहां उपचार करवाने के लिए आ रहे है, वहीं अस्पताल में व्यवस्था बदहाल होने के कारण वे अधिक परेशान हो जाते है। ओपीडी, लैब, आपातकालीन विभाग में बैठने तक की व्यवस्था न होने के कारण मरीज व उनके तीमारदारों को नीचे फर्श पर भी बैठना पड़ रहा है।
नागरिक अस्पताल में रोजाना हो रहे 35 से 40 ऑपरेशन
कोरोना संक्रमण के दौरान सिर्फ आपातकालीन ऑपरेशन ही किए जाते थे, जोकि मुश्किल से 15 से 20 ही हो पाते थे। इन दिनों कोरोना का प्रकोप कम होने पर ऑपरेशन की गाड़ी फिर से पटरी पर आई है। इन दिनों रोजाना 35 से 40 ऑपरेशन हो रहे है। नागरिक अस्पताल में कार्यरत सीनियर सर्जन डॉ. कृष्ण कुमार ने बताया कि छोटे-मोटी सर्जरी मिलाकर 15 से 20 ऑपरेेशन हो जाते है, इनके अलावा पांच से छह हड्डी रोग, पांच से छह नेत्र रोग, चार से पांच गायनी और चार-पांच नसबंदी ऑपरेशन हो जाते है। ऑपरेशन से पहले कोरोना जांच टेस्ट अनिवार्य है।
मौसम में बदलाव की वजह से ओपीडी में बढ़े मरीज
इन दिनों मौसम में काफी परिवर्तन हो रहा है, जिसमें सुबह-शाम के समय ठंड और दोपहर में तेज धूप की वजह से गर्मी हो जाती है। इसकी वजह से लोग खांसी, जुकाम और बुखार की चपेट में आ रहे है। नागरिक अस्पताल की ओपीडी में फिजिशियन कक्ष के बाहर मरीजों की भीड़ लगी रहती है। शुक्रवार को फिजिशियन से उपचार करवाने के लिए 200 से अधिक पहुंचे। अस्पताल की ओपीडी में काफी लोग बगैर मास्क और बगैर उचित सामुदायिक दूरी के मिले, जोकि कोरोना संक्रमण को संजीवनी देने का काम कर रहे है।
न बैठने जगह, पीने को पानी
नागरिक अस्पताल परिसर के पार्क में बड़ी-बड़ी घास व अन्य झाड़ियों उगी हुई है, जिनकी वजह से पार्क बैठने लायक नहीं है। पार्क में आमतौर पर मरीज, उनके तीमारदार और स्टाफ के सदस्य बैठते थे, मगर अब पार्क बदहाल होने की वजह से पार्क में खड़ा रहना भी मुश्किल हो रहा है। अस्पताल परिसर में टीबी वार्ड के पास, ब्लड बैंक के नजदीक, ओपीडी और कई वार्डों में वाटर कूलर रखे हुए है, मगर से पिछले काफी समय से बंद पड़े है। इसकी वजह से मरीज व उनके तीमारदारों को पानी पीने के लिए चक्कर काटने पड़ रहे है। साथ ही कई जगह के वाटर कूलर के तो टोंटियां भी टूटी पड़ी है। वहीं अधिकारियों के कार्यालयों में तो पानी के कैंपर आ रहे है।
फिर शुरू हुई परिसर में अवैध पार्किंग
अस्पताल परिसर में लगातार अवैध पार्किंग का जमावड़ा रहता था, जिसको लेकर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने निरीक्षण पर अवैध पार्किंग पर सख्ती बरती है। कुछ दिनों तक तो व्यवस्था ठीक रही, मगर इन दिनों अस्पताल के गेट नंबर एक और दो के सामने फिर से वाहनों की भीड़ लगने लगी है। आसपास के दुुकानदार और बाजार में खरीददारी करने के लिए आने वाले लोग अस्पताल परिसर को पार्किंग प्वाइंट समझकर अपने वाहन खड़े कर चले जाते है।
वर्जन :
यह मामला मेरे संज्ञान में अब आया है तो जल्द ही संबंधित अधिकारी से बातचीत कर पानी लीकेज, वाटर कूलर सहित पार्क को दुरुस्त करवाया दिया जाएगा। अस्पताल में उचित सामुदायिक दूरी के लिए कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई हुई है। अस्पताल में मरीज व उनके तीमारदारों को बेहतरीन चिकित्सा सुविधा देने में लिए हम प्रयासरत है।
- डॉ. एडविन, प्रधान चिकित्सा अधिकारी।