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बिना द्रोण भिवानी के खिलाड़ी कैसे बनेंगे अर्जुन

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भीम स्टेडियम के हॉकी ग्राउंड उखड़ा एस्ट्रोटर्फ का मैदान। संवाद - फोटो : Bhiwani
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नवनीत शर्मा
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भिवानी। खेलों में अपनी विशेष पहचान बनाने वाले भिवानी अब कोचों की कमी है। जिले में काफी खेल तो ऐसे है, जिनके कोच ही नहीं है। अन्य खेलों में भी खिलाड़ियों की संख्या के अनुपात में कोचों की संख्या काफी कम है। ऐसे में बिना द्रोण के अर्जुन कैसे बनेंगे। आज अंतरराष्ट्रीय खेल दिवस है। इस उपलक्ष्य में हमने जिले में मौजूद खेल सुविधाओं की पड़ताल की तो कई समस्याएं सामने आईं।
भीम खेल परिसर में महज 42 कोच है, इन कोचों के पास चार हजार से अधिक खिलाड़ी अभ्यास कर रहे हैं। इनके अलावा सैकड़ों खिलाड़ी निजी कोचों के पास प्रशिक्षण ले रहे हैं। कोचों की कमी के साथ ही भीम खेल परिसर में खिलाड़ी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। परिसर में न तो पीने के पानी की उचित व्यवस्था है और न ही खेल मैदान के पास खिलाड़ियों के बैठने की व्यवस्था।
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मंदिरों के लिए जैसे भिवानी जिला छोटी काशी के नाम से जाना जाता है। वहीं मुक्केबाजी सहित अन्य खेलों में विशेष पहचान बनाते हुए भिवानी को मिनी क्यूबा का नाम दिया गया है। अब कोचों वे अन्य संसाधनों की कमी की वजह से ओलंपिक तो दूर की बात है अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित अन्य प्रतियोगिताओं में भी जिले का नाम पिछड़ता जा रहा है। ऐसे में हजारों खिलाड़ी अव्यवस्था के शिकार हो रहे है, मगर उनकी सुनने वाला कोई नहीं है। जिले में बैडमिंटन, टेबल टेनिस और तलवारबाजी का एक भी कोच नहीं है, जिसकी वजह से खिलाड़ी चाहते हुए भी खेल नहीं पा रहे।
लीकेज के कारण पांच साल से बंद पड़ा स्वीमिंग पूल
भीम खेल परिसर में एकमात्र स्वीमिंग पूल है, जोकि वर्ष 2017 से बंद पड़ा है। स्वीमिंग पूल में लंबे समय से लीकेज है, जिसकी वजह से एक घंटे भी पानी नहीं रुक पाता। स्वीमिंग पूल में पानी नहीं रुकने से खिलाड़ी अभ्यास नहीं कर पाते। ऐसे में खिलाड़ी बाहर निजी स्वीमिंग पूल में प्रशिक्षण ले रहे है। निजी स्वीमिंग पूल में प्रशिक्षण लेने के लिए खिलाड़ियों को अपनी जेब से रुपये खर्च करने पड़ते हैं। साथ ही वे संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं।
सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक और हॉकी एस्ट्रोटर्फ खस्ता हाल
भीम खेल परिसर में अंतरराष्ट्रीय खेल मानकों के आधार पर सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक और हॉकी का एस्ट्रोटर्फ मैदान भी बना है, लेकिन उचित रखरखाव के अभाव में इनकी हालत खस्ता हो चुकी है। हॉकी के एस्ट्रोटर्फ की मैट फट चुकी है और एयर गन भी नहीं है। सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक का भी उचित रखरखाव नहीं होने से कई जगह से खस्ताहाल हो गया है, जिसमें अभ्यास के दौरान खिलाड़ी भी चोटिल हो रहे हैं।
स्टेडियम में उगीं जगह-जगह झाड़ियां
भीम खेल परिसर में बने खेल मैदान के साथ ही अधिकारियों के कार्यालयों के आसपास झाड़ियां उगी हुई हैं। इसकी वजह से परिसर का सुंदरीकरण प्रभावित हो रहा है। खेल मैदान में झाड़ियां होने की वजह से खिलाड़ी ठीक से अभ्यास नहीं कर पाते। ऐसे में सरकार और खेल विभाग की लापरवाही की वजह से खिलाड़ियों के अभ्यास में बाधाएं आ रही हैं। भीम खेल परिसर के साथ ही ग्रामीण क्षेत्र में खेल स्टेडियम भी मूलभूत सुविधाओं की कमी की वजह से खिलाड़ियों के लिए मुसीबत बने हुए हैं।
अलखपुरा की फुटबाल खिलाड़ी संसाधनों के लिए जूझ रहीं
अलखपुरा गांव की नौ खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय और 32 खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर पर फुटबाल टीम में देश का नाम रोशन किया है। 21 वर्ष आयु वर्ग वर्ल्ड कप कैंप में दो खिलाड़ी अनी बाई व संतोष और 17 वर्ष आयु वर्ग के वर्ल्ड कप के लिए कैंप में चार खिलाड़ी वर्षिका, कल्पना, सैलजा व पायल शामिल हैं। वहीं, चार खिलाड़ी रविना, ज्योति, कामना और रितु अंडर-21 के कैंप में प्रशिक्षण हासिल कर चुकी हैं। इन खिलाड़ियों की अथक मेहनत की वजह से अलखपुरा को मिनी ब्राजील का नाम दिया है। बावजूद इसके इन खिलाड़ियों को अभ्यास के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं मिल पा रहे हैं। इसकी वजह से ये काफी परेशानियों का सामना कर रही हैं। बरसाती सीजन में उनके खेल परिसर में जलभराव की समस्या भी सामने आई थी। साथ ही अब संसाधन जुटाने के लिए ग्रामीण ही खिलाड़ियों की मदद कर रहे हैं।
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टर्फ और स्वीमिंग पूल को ठीक करवाया जाएगा
भीम खेल परिसर में लीकेज की वजह से स्वीमिंग पूल लंबे समय से बंद पड़ा है, जिसके जीर्णोद्धार के लिए पीडब्ल्यूडी से बातचीत कर उसे ठीक कराया जाएगा। हॉकी मैदान में जो स्ट्रोटर्फ क्षतिग्रस्त है उसके बारे में कोच ने पहले ही संबंधित विभाग से संपर्क कर लिया था, जिसे ठीक करवाया जाएगा। खिलाड़ियों की सुविधाओं के लिए सरकार की ओर से निरंतर सकारात्मक फीडबैक मिल रहा है। खिलाड़ियों से अपील है कि नशे से दूर रहें। साथ ही अपने खेल में अनुशासन का पालन करते हुए खेलें, ताकि वे बेहतरीन प्रदर्शन कर सकें।
- जेजी बनर्जी, जिला खेल एवं युवा कार्यक्रम अधिकारी, भिवानी।
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