अयोध्या प्राण प्रतिष्ठा के दिन दुखद संयोग हुआ। भिवानी में रामलीला मंचन के दौरान रिटा. जेई हरीश की हृदयघात से मौत हो गई। वह रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के दौरान भिवानी शहर के न्यू बासकीनाथ रामलीला कमेटी में जवाहर चौक पर राम भक्त हनुमान का किरदार निभा रहे थे।
मेरे मन के मंदिर में है मेरे प्रभु का धाम...मेरे अंतर के आसन पर सदा विराजे राम....। भजन की आखिरी पंक्तियों पर सभी झूम रहे थे। रामलीला में हनुमान की भूमिका निभा रहे 62 वर्षीय हरीश भक्तिभाव से परिपूर्ण हो नाच रहे थे। स्टेज पर कभी वह राम के पास जाते कभी थोड़ी दूर। भजन खत्म होने लगा। सदा विराजे राम... सदा विराजे राम... बोल के बीच हरीश अचानक राम के चरणों पर गिर गए।
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लोग समझ रहे थे कि वह भावविभोर होकर गिरे हैं। लोग ताली बजाने लगे। राम का स्वरूप निभा रहे मुकेश वर्मा ने उन्हें कई बार हनुमान- हनुमान कह कर उठाने की कोशिश की मगर जब वह नहीं उठे तो मंच पर मौजूद लोगों ने उनकी नब्ज देखी, हाथ-पैर की मालिश की...लेकिन वे नहीं उठे। पूरा माहौल एकदम बदल गया। उन्हें अस्पताल ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने बताया कि हृदयघात से उनकी मौत हो गई है। तब लोगों को पता चला िक वे तो मंच पर राम-राम कहते ही दम तोड़ चुके थे।
सोमवार को अयोध्या में श्रीरामलला प्राण प्रतिष्ठा के उपलक्ष्य में भिवानी में आयोजित रामलीला के मंच पर जो हुआ वह दुर्लभ है। जब अयोध्या में श्रीरामलला प्राण प्रतिष्ठा के उत्सव और उमंग में हर कोई उत्साहित था, उसी समय जवाहर चौक पर चल रही रामलीला में एमसी कॉलोनी निवासी हरीश कुमार प्रभु चरणों में ऐसे लीन हुए कि फिर कभी नहीं उठे।
हरीश 25 वर्ष से न्यू बासुकीनाथ रामलीला कमेटी से जुड़े थे और हनुमान का किरदार निभाते आ रहे थे। वे बिजली विभाग में जेई के पद से सेवानिवृत्ति के बाद भी रामलीला मंचन से अनवरत जुड़े हुए थे।