भिवानी। स्वास्थ्य मूलभूत सुविधाओं में शामिल है। इसके बावजूद राज्य के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में अब भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। वहां व्यवस्था भी ठीक नहीं है। इसी वजह से जरूरतमंदों को समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा है।
अस्पतालों में पर्याप्त चिकित्सकों के साथ दवा की व्यवस्था बहुत जरूरी है। इसी के साथ सरकारी अस्पतालों में मरीजों को जरूरी जांच सुविधा भी मिले और चिकित्सकों को भी मरीजों के प्रति पाबंद और दायित्व से बांधा जाए कि वे चाहकर भी लापरवाही न बरत सकें। स्वास्थ्य सेवाओं पर हर साल सरकार मोटा बजट भी खर्च करती है। इसके बावजूद बजट के अनुरूप स्वास्थ्य सेवाओं के नतीजे नहीं मिल पा रहे हैं।
जनता को स्वस्थ रखने का पूरा दायित्व राज्य सरकार का होता है। राज्य सरकार ने इसके लिए हर जिले के कस्बों, गांव, शहर में सरकारी अस्पताल बनाए हैं। भिवानी समेत हर जिले के सरकारी अस्पतालों में स्टाफ की कमी है, कहीं दवाइयों का अभाव है तो कहीं जांच के लिए पूरी मशीनें ही उपलब्ध नहीं हैं। बढ़ती आबादी और मरीजों की संख्या को देखते हुए सरकार पूरा स्टाफ उपलब्ध कराए और उन्हें सख्त निर्देश दें कि वह अपना कार्य पूरी ईमानदारी से निभाएं। मरीजों की उचित जांच करें और उन्हें अस्पताल की ही दवाइयां लिख कर दें। आमतौर पर देखा गया है कि वह कमीशन के चक्कर में बाहर की महंगी दवाइयां मंगाते हैं। सरकार को इस ओर विशेष ध्यान भी देना चाहिए। डॉक्टरों को समय पाबंद होना बहुत आवश्यक है। सरकार को भी चाहिए कि विशेष टीमों से सरकारी अस्पतालों का औचक निरीक्षण करवाते रहें। - संदीप वधवा सेक्टर 13, भिवानी।
सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों की हालत अच्छी नहीं है। आवश्यक और जरूरी दवाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हैं। हाड़कंपाती ठंड के मौसम में खांसी ठीक करने का सिरप तक उपलब्ध नहीं है। जिला नागरिक अस्पताल में लंबे अरसे से मनोरोग विशेषज्ञ और नाक, कान, गले का डॉक्टर नहीं है। इनके लिए हर मरीज को रोहतक भेज दिया जाता है। गांव में तो यह हालत और ज्यादा खराब हैं। इन सबके लिए पहले तो चिकित्सकों की आबादी के हिसाब से पर्याप्त नियुक्ति कराई जाए और फिर ढांचागत सुविधाओं का भी उसी हिसाब से विस्तार होना चाहिए। स्वास्थ्य सेवाओं का नियमित निरीक्षण कर अधिकारी कमियों को पूरा कराएं। -कामरेड ओमप्रकाश, जिला उपप्रधान, किसान सभा, भिवानी।
जिला नागरिक अस्पताल भिवानी में अल्ट्रासाउंड की दो मशीनें और डाॅक्टर एक हैं। लोगों को कई बार चक्कर लगाने पड़ते हैं। ओपीडी की हालत भी ठीक नहीं है। कई बार ओपीडी का डाॅक्टर कोर्ट पेशी या अन्य कार्य में बाहर जाता है तो मरीज बड़ी संख्या में ओपीडी के गेट पर लंबा इंतजार करते मिलेंगे। स्वास्थ्य सेवा राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। इसमें प्रशासन और नागरिक अस्पताल के चिकित्सकों के बीच भी बेहतर तालमेल होना जरूरी है, तभी नागरिकों तक उन स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ पहुंचेगा। निजी अस्पतालों में इलाज बहुत महंगा है लेकिन सस्ती और सरकारी अस्पताल की सेवाओं का लाभ लेने के लिए भी ऐसी व्यवस्था जरूरी है जिससे हर नागरिक को न केवल समय पर उपचार मिले, बल्कि गंभीर बीमारियों से पीड़ितों को भी बिना किसी औपचारिकता के बेहतर इलाज मिल सके। -धर्मबीर सिंह, सीआरपीएफ के सेवानिवृत्त कमांडेंट एवं समाजसेवी।
स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल है। इसके सुधार के लिए सरकार के साथ ही जिला प्रशासन को भी बेहतर कदम उठाने होंगे। नागरिक अस्पताल में हर कोई इलाज के लिए सिर्फ यह सोचकर आता है कि यहां अच्छा उपचार मिलेगा लेकिन लचर व्यवस्था में हर कोई परेशान होकर रह जाता है। नागरिक अस्पताल के साथ ग्रामीण क्षेत्र के स्वास्थ्य केंद्रों पर पर्याप्त चिकित्सक लगाए जाएं और हर मर्ज की दवा मरीज को वहां मिले। जिन मरीजों का लंबा उपचार चलना है, इसके लिए भी प्रक्रिया आसान बनाई जाए। विभाग अनुभवी चिकित्सकों को भी जोड़े, उनकी स्वैच्छिक सेवाएं भी ले ताकि लोगों को समय पर बेहतर उपचार मिल सके। -रमेश चंद्र बूरा पूर्व प्राचार्य।