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बच्चे को गोद देने व लेने में अपनाएं कानूनी प्रक्रिया : डीसी

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भिवानी। उपायुक्त साहिल गुप्ता ने कहा है कि दत्तक ग्रहण (एडॉप्शन) एक संवेदनशील प्रक्रिया है और इसे पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत ही किया जाना चाहिए। निसंतान दंपती यदि बच्चा गोद लेना चाहते हैं तो वे जिला बाल संरक्षण इकाई, भिवानी से संपर्क करें और किशोर न्याय अधिनियम 2015 व दत्तक ग्रहण अधिनियम 2022 के प्रावधानों की जानकारी लें।
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डीसी ने बताया कि बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी की वेबसाइट पर ऑनलाइन पंजीकरण से शुरू होती है, जहां इच्छुक दंपती आवेदन कर सकते हैं और आगे की कानूनी कार्यवाही की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। डीसी ने चेताया कि कुछ दंपती बिचौलियों के बहकावे में आकर ठगी के शिकार हो जाते हैं। बिना कानूनी प्रक्रिया के बच्चा गोद लेना या देना दंडनीय अपराध है। यदि कोई व्यक्ति बच्चे को खरीदता या बेचता पाया जाता है, तो उसे किशोर न्याय अधिनियम 2015 के तहत कम से कम 3 साल की सजा या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि सौतेले माता-पिता या रिश्तेदारों द्वारा गोद लेने के मामलों में भी कानूनी प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है। जीवित माता-पिता की सहमति, अथवा उनकी अनुपस्थिति या असमर्थता की स्थिति में बाल कल्याण समिति की अनुमति जरूरी होती है।
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जिला बाल संरक्षण अधिकारी (डीसीपीओ) किरण ने बताया कि दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और चरणबद्ध होती है। गोद लेने की प्रक्रिया में कई चरणों में होती है, जिनमें आवेदन और दस्तावेज जमा करना, मानसिक, शारीरिक और आर्थिक स्थिति की जांच, होम स्टडी रिपोर्ट तैयार करना, सक्षम प्राधिकरण की स्वीकृति प्राप्त करना शामिल है। उन्होंने बताया कि दत्तक ग्रहण के बाद भी विभाग द्वारा नियमित निगरानी की जाती है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि बच्चा सुरक्षित और खुशहाल वातावरण में पल रहा है।
यहां से लें जानकारी
बच्चा गोद लेने के इच्छुक दंपती जिला बाल संरक्षण इकाई, चिड़ियाघर रोड, जिला रेडक्रॉस सोसाइटी के पास स्थित कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं और पूरी जानकारी लेकर पंजीकरण करवा सकते हैं।
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