भिवानी। नगर परिषद में अनुसूचित जाति के पहले छह वार्ड होते थे। सरकार ने अब उनको घटाकर पांच कर दिया। इसके विरोध में अनुसूचित जाति के लोगों सड़कों पर उतरकर विरोध दर्ज करवाया और सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। इसके अलावा अनुसूचित जाति के पांच पार्षदों ने उपायुक्त को अपना इस्तीफा सौंप कर ज्ञापन सौंपा।
प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व पूर्व पार्षद शिव कुमार गोठवाल ने किया। शिवकुमार गोठवाल ने बताया कि इस्तीफा देने वालों में वार्ड- 13 के पार्षद प्रवीण, वार्ड 21 के पार्षद हरीराम, वार्ड 23 के पार्षद राजकुमार, वार्ड 14 से दलबीर छोटू और वार्ड 19 से पार्षद सुशीला देवी शामिल रहे।
पार्षदों ने कहा कि सरकार ने अनुसूचित जाति के लोगों की अनदेखी की है। इसलिए छह वार्डों को समेटकर पांच वार्ड ही बनाए हैं। जिसकी वे घोर निंदा करते हैं। क्योंकि उन्होंने 14 सितंबर 2021 को जो लिस्ट जारी की थी, उसमें अनुसूचित जाति के छह वार्डों को दर्शाया गया था और इसके बाद एसडीएम ने जो आपत्तियां सुनी थीं, उसमें भी अनुसूचित जाति के छह वार्ड दर्शाए थे। परंतु पंचकुला ड्रॉ के तहत उन्होंने अनुसूचित जाति के पांच वार्ड बना दिए, जिससे गुस्साए अनुसूचित जाति के लोगों ने सरकार का विरोध किया व उपायुक्त को इस्तीफा देकर ज्ञापन भी सौंपा। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ में बैठे आला अधिकारियों ने अनुसूचित जाति के लोगों की कम संख्या बताकर छह वार्डों को पांच वार्डों में समेटने का कार्य किया है, जबकि अनुसूचित जाति के लोगों की संख्या वर्ष 2011 से अब तक 58515 हो गई है। इसके आधार पर नप में अनुसूचित जाति के सात वार्ड बनते हैं और संविधान के अनुसार देखा जाए तो भिवानी नप में छह वार्ड ही बनते हैं। उन्होंने इसको संविधान के खिलाफ भी बताया।
इस अवसर पर कर्नल सिंह बागड़ी, नप अध्यक्ष रण सिंह, उपाध्यक्ष मामनचंद, विजय पंचगामा पूर्व अध्यक्ष, निरंजन वाल्मीकि, रविंद्र खरे, अनिल पेंटर, ज्ञान सिंह बागड़ी, अमित, प्रभाती लाल महरा, रमेश टाक, वीरभान मुआल, मदन लाल जूसवाला, अशोक जोगी, अमन तंवर राघव, शीला गोरा पार्षद, सुनील कुमार गोलपुरिया, रामेश्वर मुआल, अश्वनी क्रांति, रमेश वाल्मीकि, प्रदीप रंगा, कमल, जोगीराम महरा, रोहताश वर्मा सहित अनेक पार्षद उपस्थित थे।