हरियाणा के भिवानी में नगर परिषद घोटाले में जांच की जिम्मेदारी स्टेट विजिलेंस को जाते ही बड़ी कार्रवाई हुई है। स्टेट विजिलेंस टीम ने मामले में आरोपी नगर परिषद के निवर्तमान चेयरमैन रणसिंह यादव और तत्कालीन कार्यकारी अधिकारी (ईओ) संजय यादव को गिरफ्तार किया।
दोनों को मंगलवार शाम कोर्ट में पेश किया गया, जहां से दोनों को चार-चार दिन के रिमांड पर लिया गया है। दोनों के अलावा रिमांड पर चल रहे बैंक मैनेजर नितेश, आरोपी नितिन व अरुण को आमने-सामने कर पूछताछ की जाएगी।
28 फरवरी को पूर्व पार्षद सुदर्शन जिंदल की शिकायत के बाद सामने आए नगर परिषद के करोड़ों रुपये के चेक घोटाले में पिछले एक माह से जांच का जिम्मा पुलिस विभाग की इकनॉमिक सेल के जिम्मे था। इकनॉमिक सेल ने मामले में एक्सिस बैंक के आरोपी मैनेजर नितेश, पानीपत के एक आढ़ती कपिल, चरखी दादरी के आरोपी अरुण और चिड़िपाल गली निवासी नितिन को गिरफ्तार कर रिमांड पर लिया। बड़ा घोटाला सामने आने के बाद विभिन्न संगठन मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहे थे। गत दिनों मुख्यमंत्री ने जांच विजिलेंस को सौंपी।
विजिलेंस टीम ने जांच का जिम्मा मिलते ही बड़ी कार्रवाई करते हुए नगर परिषद के निवर्तमान चेयरमैन रण सिंह यादव और तत्कालीन कार्यकारी अधिकारी संजय यादव को गिरफ्तार किया। रण सिंह यादव को सोमवार शाम करीब पांच बजे भगत सिंह चौक के पास से गिरफ्तार किया।
वहीं संजय यादव को शाम साढ़े सात बजे महम गेट चौक से गिरफ्तार किया गया। दोनों को मंगलवार दोपहर बाद करीब साढ़े तीन बजे कोर्ट में पेश किया। शाम करीब पौने पांच बजे दोनों को चार-चार दिन के रिमांड पर लिया गया।
संजय बंसल के बाद व्यापारी भी फरार
नगर परिषद में सामने आए करोड़ों के घोटाले में मुख्य आरोपियों में शामिल अकाउंटेंट संजय बंसल शुरुआत में ही फरार हो गया। उसका अब तक पुलिस सुराग नहीं लगा पाई है। अब तक गिरफ्तार चार आरोपियों ने पूछताछ के दौरान संजय बंसल के द्वारा ही फर्जी फर्मों में नगर परिषद की करोड़ों की राशि ट्रांसफर किए जाने की बात कही है। संजय बंसल के बाद अब मामले में नामजद आरोपी व्यापारी विनोद गोयल भी फरार हो गया है। पुलिस दोनों का ही सुराग नहीं लगा पाई है।
जांच संभालते ही विजिलेंस की बड़ी कार्रवाई
नगर परिषद में चेक घोटाले की जांच अब स्टेट विजिलेंस को सौंप दी गई है। इससे पहले इकनॉमिक सेल जांच कर रही थी। स्टेट विजिलेंस से इंस्पेक्टर कुलवंत सिंह ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मामले में बड़ी गिरफ्तारी की है।
बैंक मैनेजर नितेश ने शुरुआत में ही उजागर किए थे कई बड़े नाम
पुलिस ने इस मामले में सबसे पहले एक्सिस बैंक के ब्रांच मैनेजर नितेश अग्रवाल को गिरफ्तार किया था। उसे पहले दो और फिर पांच दिन के रिमांड पर लिया गया। अब फिर से तीन दिन के रिमांड पर लिया गया है। रिमांड की शुरुआत में ही आरोपी बैंक मैनेजर चिड़िपाल गली निवासी नितेश ने कई बड़े नाम लिए। उसने बताया था कि निवर्तमान चेयरमैन को कमीशन के अलावा 10 से 12 आई फोन देने, लाखों रुपये का कमीशन देने, तत्कालीन तीन कार्यकारी अधिकारियों, सचिव को भी आई फोन और कमीशन देने की बात कही थी। इसके बावजूद पुलिस बड़े नामों में किसी को गिरफ्तार नहीं कर पाई। हालांकि पूछताछ के लिए दो दफा रण सिंह यादव को बुलाया गया था।
कुछ पार्षद भूमिगत तो कुछ से हो रही पूछताछ
नगर परिषद पदाधिकारियों और अधिकारियों-कर्मचारियों के अलावा कुछ निवर्तमान पार्षद भी जांच के घेरे में आ सकते हैं। पुलिस जांच से बचने के लिए कुछ पार्षद भूमिगत हो गए हैं तो कुछ से पुलिस पूछताछ कर रही है। मंगलवार को भी चार पार्षदों से पूछताछ संबंधी सूचना सोशल मीडिया पर वायरल होती रही। हालांकि पुलिस अधिकारियों ने इससे इनकार किया है।
सचिव के अस्पताल में दाखिल होने की सूचना वायरल
घोटाले में आरोपी एक तत्कालीन सचिव के अस्पताल में दाखिल होने की सूचना भी सोशल मीडिया पर दिनभर वायरल होती रही। तत्कालीन सचिव राजेश महता अपने पिता के निधन के कारण अब तक मामले की जांच में शामिल नहीं हुए हैं और उन्हें जांच में शामिल होने के लिए दो बार नोटिस दिए जा चुके हैं। बैंक मैनेजर ने उन्हें भी मोटा कमीशन देने का खुलासा किया था।
मामले की जांच अभी हमें मिली है। मामले में आरोपी निवर्तमान चेयरमैन रणसिंह यादव और तत्कालीन कार्यकारी अधिकारी संजय यादव को गिरफ्तार किया गया है। दोनों को कोर्ट में पेश कर चार-चार दिन के रिमांड पर लिया गया है। अभी मेडिकल जांच करवाकर इनसे पूछताछ की जाएगी, जिसके बाद ही सारी स्थिति स्पष्ट होगी। हमारा प्रयास होगा कि जल्द से जल्द इस घोटाले का पूरा खुलासा किया जाए। - इंस्पेक्टर कुलवंत सिंह, एसवीबी यूनिट भिवानी।
अकाउंटेंट और चेयरमैन का निजी व्यक्ति करता था चेक पर फर्जी हस्ताक्षर
भिवानी। पुलिस की जांच में सामने आया है कि चेकों पर फर्जी हस्ताक्षर आरोपी अकाउंटेंट और चेयरमैन का एक निजी व्यक्ति करता था। फिलहाल विजिलेंस भी इस एंगल पर जांच कर रही है। पुलिस अकाउंटेंट संजय बंसल की तलाश में जुटी है, जिसके बाद ही स्पष्ट होगा कि चेकों पर फर्जी हस्ताक्षर किस-किस के है। चेकों पर अब तक अलग-अलग हैंडराइटिंग में हस्ताक्षर सामने आए हैं।
आरोपी रण सिंह यादव और कार्यकारी अधिकारी संजय यादव की गिरफ्तारी भिवानी के जागरूक नागरिकों की जीत है। लड़ाई अभी बाकी है। वह नाम भी सामने लाए जाएंगे, जिनकी जेब में पांच सौ करोड़ का हिस्सा डाला गया है। फर्जी रसीद और अवैध कब्जा घोटाला भी पूरी तरह उजागर होना बाकी है। पुलिस अधीक्षक और स्टेट विजिलेंस का आभार। -सुशील वर्मा, संयोजकख् भिवानी बचाओ आंदोलन।