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दो हजार बंदर पकड़ने का ठेका, दो साल में 700 ही पकड़े

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आक्रामक हुआ बंदर। संवाद - फोटो : Bhiwani
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संजय वर्मा
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भिवानी। शहर से दो हजार बंदर पकड़ने का नगर परिषद ने करीब दो साल पहले ठेका दिया था। दो साल में सिर्फ 700 बंदरों तक ही आंकड़ा सिमटकर रह गया। पहले मेडिकल सर्टिफिकेट और फिर कोरोना संक्रमण काम में अड़चन बना, लेकिन अब नप अधिकारियों ने खुद इस अभियान को ही बंद करा दिया।
इसकी वजह भी अजीबोगरीब बताई जा रही है। हनुमान जी की सेना रूपी बंदर को पकड़ने में नप अधिकारियों को पाप लगने का डर सता रहा है। इसी डर की वजह से नप अधिकारियों ने ठेकेदार को मौखिक आदेशों पर काम बीच में ही बंद करा दिया, लेकिन नप सदन की बैठक में मुद्दा गरमाया तो नप अधिकारियों को फिर से बंदर पकड़ने की याद आई। पूरा शहर बंदरों के खौफ से सहमा हुआ है, क्योंकि पूरे शहर के अंदर इस समय बंदरों की संख्या करीब दस हजार हो चुकी है।
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भिवानी नगर परिषद ने फरवरी 2019 में शहर से बंदर पकड़ने का ठेका दिया था। ठेकेदार को शहर के अंदर बंदर पकड़ने के लिए बाकायदा इलाका भी चिह्नित किया था। प्रत्येक बंदर पकड़ने पर ठेकेदार को नप की तरफ से 750 रुपये का भुगतान सुनिश्चित किया। ठेकेदार को शहर से पहले चरण में दो हजार बंदर पकड़ने थे, जिसके बाद फिर से दो हजार बंदर पकड़ने का ठेका दिया जाना था। लेकिन पहले चरण में ही शहर से दो साल की अवधि में केवल 700 बंदर ही पकड़े गए। बंदर पकड़ने में ठेकेदार को कलेसर के जंगलों में बंदर छोड़ने से पहले उनका पशुपालन विभाग से फिटनेस सर्टिफिकेट भी तैयार कराना था, इसमें ठेकेदार और पशुपालन विभाग अधिकारियों के बीच तालमेल नहीं बैठा तो काम धीमा पड़ गया।
फिटनेस सर्टिफिकेट का मसला हल हुआ तो कोरोना संक्रमण ने अपने पैर पसार दिए और अभियान लगभग बंद ही हो गया। कोरोना संक्रमण का खतरा टला तो नप अधिकारियों ने अभियान पर कुंडली जमा दी और जबरन अभियान को बंद करा दिया। ठेकेदार को वजह बताई गई कि बंदर पकड़ने से नप अधिकारियों को पाप लगेगा। इसके बाद ठेकेदार ने भी अपना काम पूरा करने के लिए कई बार नप अधिकारियों के साथ पत्राचार किया, मगर बात नहीं बनी। मंगलवार को नगर परिषद की बैठक में बंदरों के ठंडे पड़े अभियान पर पार्षदों ने नप अधिकारियों को ही घेर लिया। जिसके बाद फिर से बंदर पकड़ने के अभियान की नप अधिकारियों को याद आई।
भोजन पाने के लिए हो रहे आक्रामक
शहर में बंदरों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बंदर भोजन पाने के लिए आक्रामक हो जाते हैं। कई बार तो लोगों को काटने से भी नहीं चूकते। शहर में हर माह 30 से 40 घटनाएं बंदर के काटने या फिर चोटिल करने की शिकायतें आ रही हैं। प्रशासन के समक्ष भी शिकायतों के अंबार लगे हैं। मगर इसके बावजूद भी इस समस्या पर कोई भी अधिकारी गंभीर नहीं है। (संवाद)
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ठेकेदार को बचा हुआ काम पूरा करने के निर्देश दिए हैं
नगर परिषद की बैठक में पार्षदों ने बंदर पकड़ने के अभियान को फिर से शुरू किए जाने पर जोर दिया है। इसके बाद उसी ठेकेदार को बचा हुआ काम पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद भी अगर पार्षद चाहेंगे तो बंदर पकड़ने का नए सिरे से टेंडर कराया जाएगा।
- रणसिंह यादव, चेयरमैन, नगर परिषद भिवानी।
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