भिवानी। नागरिक अस्पताल के आपातकालीन विभाग की खामियां सिविल सर्जन के औचक निरीक्षण में उजागर हुई। आपातकालीन विभाग में बने हेल्प डेस्क की कुर्सी से कर्मचारी गायब मिले, जबकि गंभीर मिली भी अपने ही हाल पर थे, जिनकी किसी भी चिकित्सक से जांच नहीं की हुई थी। ऐसे में सिविल सर्जन डॉ. रघुवीर शांडिल्य ने खुद मरीजों के स्वास्थ्य की जांच कर उन्हें दवा का परामर्श भी दिया। निरीक्षण के दौरान उजागर हुई खामियों को लेकर सीएमओ ने संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
सिविल सर्जन डॉ. शांडिल्य ने शुक्रवार रात साढ़े नौ बजे से रात साढ़े 11 बजे तक नागरिक अस्पताल के आपातकालीन विभाग और लेबर रूम की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान स्टाफ द्वारा बरती गई लापरवाही और अनियमिताओं को लेकर वे नाराज नजर आए। उन्होंने कर्मचारियों को फटकार लगाई और उन्हें निष्ठाभाव से ड्यूटी करने का पाठ भी पढ़ाया।
चिकित्सकों ने नहीं जांचें गंभीर मरीज
आपातकालीन विभाग में गंभीर मरीजों को दाखिल करने के लिए दो वार्ड बनाए गए है जिनमें शुक्रवार रात को 15 मरीज दाखिल मिले। इन मरीजों की न तो दिन में किसी चिकित्सक ने जांच की और न ही रात के समय ड्यूटी पर आए चिकित्सक ने उनका हाल-चाल जाना। ऐसे में सिविल सर्जन ने मरीजों की फाइल देखी और उन्हें स्वास्थ्य की जांच की। इस दौरान तीन मरीजों की हाल गंभीर मिलने पर उनकी ऑक्सीजन भी शुरू की।
नहीं बुला रहे विशेषज्ञ, न लगाई ड्यूटी सूची
आपातकालीन विभाग में रात के समय 22 मरीज पहुंचे थे, जिनमें से कई मरीजों की हालत गंभीर थी और उन्हें विशेषज्ञ की जरूरत थी। अगर ड्यूटी चिकित्सक की ओर से किसी भी विशेषज्ञ को कोई सूचना नहीं दी गई। वहीं एक जहरीला पदार्थ निगलने से गंभीर मरीज भी आया हुआ था, जिसके उपचार के लिए भी जनरल फिजिशियन को नहीं बुलाया गया। इसके अलावा ड्यूटी दे रहे स्टाफ की सूची भी अपडेट नहीं की हुई थी।
नो पार्किंग में खड़े वाहन
अस्पताल परिसर में आपातकालीन विभाग की रजिस्ट्रेशन विंडो व एंबुलेंस की पार्किंग में किसी के भी वाहन खड़े करने की अनुमति नहीं है। निरीक्षण में सामने आया कि नो पार्किंग जोन में वाहन खड़े हैं। इसके अलावा आपातकालीन विभाग और लेबर रूम में सफाई भी न के बराबर मिली।
अधिकारी बोले
आपातकालीन विभाग का शुक्रवार रात में निरीक्षण किया था। इस दौरान कई खामियां और स्टाफ की लापरवाही सामने आया है। इसको लेकर संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों को नोटिस जारी किया है, जिसका सात दिन में जबाव मांगा है। मगर जवाब संतुष्टिजनक नहीं मिलता है तो विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। अब प्रत्येक सीएचसी और पीएचसी पर भी रात के समय निरीक्षण पर व्यवस्थाएं जांच जाएगी।
- डॉ. रघुवीर शांडिल्य, सिविल सर्जन।