भिवानी। चारा, न छाया और 1300 नंदी 42 डिग्री तापमान में खुले में खड़े हैं। यह हाल है शहर की एकमात्र नंदीशाला का। चारे और छाया के अभाव में औसतन हर रोज 12 से 15 नंदी दम तोड़ रहे हैं। पिछले 10 दिन में 150 से अधिक नंदी दम तोड़ चुके हैं और काफी की हालत खराब बनी हुई है। नंदीशाला में हर रोज 60 क्विंटल तक सूखे चारे और छह ट्राली हरे चारे की जरूरत है, जबकि महज दो ट्राली ही मिल रहा है, जिससे बमुश्किल 20 से 25 फीसदी का ही पेट भरता है।
शहरवासियों को बेसहारा पशुओं की समस्या से निजात दिलाने के लिए नंदीशाला का निर्माण किया गया था। नियमानुसार यहां 600 पशुओं की रहने की व्यवस्था है, मगर नगर परिषद प्रशासन ने यहां 1300 अधिक बेसहारा पशुओं को रोक दिया। नतीजतन हालात बद से बदतर बन गए हैं। यहां इन पशुओं के लिए पर्याप्त चारा है न छाया। अन्य व्यवस्थाएं भी बदहाल है।
यह है स्थित
-नंदीशाला में सिर्फ 600 लावारिस पशुओं के लिए ही पशु चारा डालने के लिए खोर बनाई हैं, जबकि यहां 1300 लावारिस पशु हैं।
- यहां सिर्फ 400 लावारिस पशुओं के लिए ही टीन शेड है।
- यहां लावारिस पशुओं के पीने के पानी के लिए छह खोल है, जबकि नौ चाहिए।
- यहां हर रोज छह ट्राली हरे चारे और 60 क्विंटल सूखे चारे की जरूरत है, जबकि मिल रहा है महज एक तिहाई।
दानियों से आस, बढ़ाए हाथ -
नंदियों को शास्त्रों में देव तुल्य माना गया है। जिला प्रशासन या नगर परिषद के पास फिलहाल इन बेसहारा पशुओं के लिए बजट का कोई प्रावधान नहीं है। ऐसे में अब शहर के दानियों से ही आस है कि वे गोवंश को बचाने के लिए आगे आएं और नंदीशाला में व्यवस्था बनाएं। जिला प्रशासन भी दानियों से ही उम्मीद लगाए बैठा है। पशुओं के पीने के पानी के लिए छह खोल हैं, जबकि तीन और चाहिए। इनके निर्माण पर करीब 60 हजार रुपये खर्च आएगा। अगर छाया कि बात करें तो यहां करीब 350 फीट लंबा और करीब 40 फीट चौड़ा शेड चाहिए, जिस पर करीब 45 लाख रुपये तक खर्च आएगा। यहां 300 फीट की खोर की जरूरत है, ताकि सभी नंदी आसानी से चारा खा सकें। इसके अलावा हर रोज पांच से छह ट्राली हरा चारा और करीब 50 से 60 क्विंटल सूखा चारा चाहिए।
समाजसेवी ने करवाया बोरवैल सिस्टम तो मिला पानी -
अब तक यहां चारा, छाया के साथ पानी की भी बड़ी समस्या थी। करीब 10 दिन पूर्व ही एक दानी ने यहां बोरवैल सिस्टम करवाया है। जिसके बाद यहां कम से कम पानी की समस्या का तो समाधान हो गया।
चार कारिंदे संभाले रहे 1300 पशु -
नंदीशाला में व्यवस्थाएं किस कद्र बदहाल है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 1300 लावारिस पशुओं का जिम्मा महज चार कर्मचारियों के कंधे पर है। जबकि यहां कम से कम 12 कर्मचारी चाहिए। क्योंकि पशु चारे को काटना, सूखे चारे को पशुओं की खोर तक पहुंचाना सहित अन्य व्यवस्थाओं के लिए कम से कम 12 कर्मचारियों की आवश्यकता है।