यूक्रेन में अभी काफी संख्या में भारतीय विद्यार्थी फंसे हुए हैं और वहां युद्ध के दाैरान भारत लौटने के लिए बेचैन हैं मगर लेकिन सबसे बड़ी समस्या टेंपरेरी वीजा पर दाखिला लेने गए विद्यार्थियों को हो रही है। दरअसल, टेंपरेरी वीजा लेकर दो या तीन माह पहले यूक्रेन गए अनेक विद्यार्थी ऐसे भी हैं, जिनके पास अभी टेंपरेरी रेजिडेंट परमिट (टीआरपी) नहीं है और वे दाखिला ले चुके हैं।
अगर वे इस कार्ड को हासिल किए बगैर वापस भारत लौटते हैं तो उनके दाखिले का जो रजिस्ट्रेशन संबंधित शिक्षण संस्थान में हो चुका है, वे उससे बाहर हो जाएंगे और हालात सुधरने पर अगर वे संबंधित शिक्षण संस्थान में एजूकेशन हासिल करने के लिए दुबारा जुड़ना चाहेंगे तो दाखिला प्रक्रिया नए सिरे से होगी।
यूक्रेन में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के परिजनों का कहना है कि अब टेंपरेरी रेजिडेंट कार्ड के लिए उन्हें 950 डॉलर देने को कहा गया है। साथ ही यह भी बताया जा रहा है कि राशि का भुगतान कर कार्ड लिए बगैर विद्यार्थी भारत लौटते हैं तो संबंधित शिक्षण संस्थान में रजिस्ट्रेशन रद्द जाएगा और दाखिला फीस दुबारा से देनी होगी। यही कारण है कि सपनों पर ग्रहण लगते देख विद्यार्थियों के साथ ही उनके परिजनों की भी चिंता बढ़ गई है।
तीन माह पहले 31 तो एक दिन पहले 60 हजार की टिकट
यूक्रेन से भारत लौटे छात्र जशनदीप के मुताबिक वहां अभी कई शिक्षण संस्थानों में कक्षाएं चल रही हैं। उसने बताया कि वह 27 नवंबर 2021 यूक्रेन जिस फ्लाइट से गया था, तब यानी तीन माह पहले उनकी एयर टिकट पर खर्च महज 31 हजार रुपये हुआ था, लेकिन एक दिन पहले जब वह यूक्रेन से भारत आया है तो उसे एयर इंडिया को टिकट के लिये 60 हजार रुपये यानी दुगने पैसे का भुगतान करना पड़ा।
एक छात्र लौटा, 12 से अधिक अभी यूक्रेन में फंसे
यूक्रेन पर रूस द्वारा किए गए हमले से नारायणगढ़ के उन परिवारों में भारी चिंता व्याप्त है, जिनके पुत्र यूक्रेन में मेडिकल की शिक्षा प्राप्त करने के लिए गए थे। इनमें से बुधवार को नारायणगढ़ का भी एक छात्र वापस लौटा है, जबकि अन्य के परिजनों को बच्चों की सुरक्षा की चिंता सता रही है।
बुधवार को यूक्रेन से एक जहाज जो दिल्ली आया था उसमें करीब 125 छात्र आए थे, जिनमें से एक जश्नदीप नामक छात्र नारायणगढ़ का भी था। जश्नदीप के पिता ने बताया कि उनका बेटा नवंबर 2021 में यूक्रेन के लवीव शहर में मेडिकल की शिक्षा प्राप्त करने के लिए गया था, परंतु परमात्मा का शुक्र है कि वह युद्ध से पहले ही सकुशल घर पहुंच गया।
उसके पिता बलदीप मान का कहना है कि तीन माह पहले ही उसने अपने बेटे को 11 लाख रुपये खर्च करके भेजा था, जब हालात बिगड़े और बेटे से बात हुई तो वह घबराया हुआ था। ऐसे में उन्होंने तत्काल अपने भतीजे रजतमान को आस्ट्रेलिया फोन किया और उसकी वापसी की टिकट बुक कराई।
दूसरी ओर, नारायणगढ़ वासी विजय बंसल का कहना है कि उनका पुत्र नमन वर्ष 2016 में यूक्रेन के खारकीव शहर में मेडिकल की शिक्षा प्राप्त करने गया था, जिसका कोर्स भी पूरा होने वाला था। उसे मई 2022 में वापस आना था, लेकिन अब युद्ध शुरू होने के उपरांत उन्हें बेटे की सुरक्षा की चिंता सता रही है।
उन्होंने बताया कि गुरुवार की सुबह रूस द्वारा यूक्रेन पर किए गए हमले की खबर टीवी पर देखने के उपरांत पुत्र नमन से अनेकों बार फोन पर बात की। नमन ने उन्हें बताया कि फिलहाल वह सुरक्षित है, परंतु बाजार में अफरा-तफरी का माहौल बना हुआ है तथा एटीएम पर भी लंबी-लंबी लाइनें लगी हुई हैं। नारायणगढ़ के प्रवीन वर्मा ने बताया कि उनका पुत्र अभिषेक वर्मा यूक्रेन के ओडेसा में मेडिकल की शिक्षा प्राप्त करने के लिए वर्ष 2017 में गया था। युद्ध की जानकारी आने पर गुरुवार को उसे फोन पर अनेकों बार बात की।
वकील लाजपत सिंह ने बताया कि उनके पुत्र हर्ष जो कि यूक्रेन के ओडेसा में ही मेडिकल की शिक्षा प्राप्त कर रहा है, उससे गुरुवार को कई बार बात हो चुकी है। टेलीफोन पर हर्ष ने बताया कि उनका शहर वैसे तो पूरी तरह सुरक्षित है परंतु सुबह से ही धमाकों की आवाजें सुनने को मिल रही हैं। बाजारों में सामान लेने के लिए लोगों की कतार लगी है।
लाजपत ने बताया कि भारत सरकार ने जो गाइडलाइन जारी की है, उसे यदि कुछ समय पूर्व जारी कर देती तो उनके बच्चे सकुशल अपने देश वापस आ चुके होते। उन्होंने बताया कि उन्हें अपने बच्चों की सुरक्षा की चिंता सता जा रही है।