अंबाला। 122 नियमित हुईं कालोनियों में एक हजार से अधिक लंबित रजिस्टरियों का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। धरना-प्रदर्शन और विरोध के दो माह बाद भी समस्या का समाधान नहीं होने से जहां लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है, वहीं सरकार को भी राजस्व की चपत लग रही है, लेकिन स्थायी हल नहीं निकल पा रहा है। मामले में बढ़ते विरोध के बाद अब जिला नगर योजनाकार ने निदेशालय से इस संबंध में दिशा-निर्देश मांगें हैं, ताकि उन नियमों के तहत रजिस्टरी की जा सके।
दरअसल रजिस्टरियों को लेकर डीटीपी और तहसीलदार की ओर से एक दूसरे के पाले में गेंद डाली जा रही है, जिसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। उक्त कालोनियों के संबंध में भी तहसीलदार की ओर से डीटीपी से एनओसी लाने की बात कही गई है, वहीं डीटीपी की ओर से दो माह बाद निदेशालय से गाइडलाइन मांगने का हवाला दिया जा रहा है।
नियमानुसार रजिस्टरी कराने के लिये जो एनओसी डीटीपी आफिस से लेनी होती है उसकी ऑनलाइन प्रक्रिया में 500 रुपये देने होते हैं, जबकि डीटीपी से एनओसी लेने के लिये यहां, फर्द, अक्श और गिरदावरी भी जमा करानी होती है। प्रापर्टी डीलर एसोसिएशन का कहना है कि इसके लिये 500 से 1000 रुपये पटवारी को देने पड़ते हैं। इतनी ही नहीं, डीटीपी आफिस से एनओसी लेने में एक माह और कई बार इससे भी ज्यादा वक्त बर्बाद होता है, जबकि रजिस्टरी के सौदे में तय समयावधि सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण विषय होता है। एसोसिएशन ने सवाल उठाया कि नियमित कालोनी में जमीन की रजिस्टरी के लिये एक जमीन की दो एनओसी लेने का हवाला देकर लोगों को तंग करना, सिस्टम की बड़ी खामी को दर्शाता है।
इस संबंध में जिला नगर योजनाकार सविता जिंदल से जानकारी ली गई तो उन्होंने कहा कि अभी कितनी रेगुलर कालोनियों में रजिस्टरी नहीं हो रही है, इसका उन्हें ठीक से अंदाजा नहीं है, लेकिन इस विषय में निदेशालय से राय मांगी गई है, ताकि जिन भी नियमों के अनुसार रजिस्टरी होनी है, उसके तहत ही कार्रवाई की जा सके। उन्होंने बताया कि जिला उपायुक्त की ओर से भी निदेशालय को इस संदर्भ में पत्र भेजा जा चुका है।
14 साल, 3 सरकारें और 122 कालोनियां हुई नियमित
-2004 में इनेलो सरकार में 45 कालोनियां हुई थी रेगुलर
-2014 में कांग्रेस सरकार ने की थी 63 कालोनियां नियमित
-2018 में भाजपा सरकार ने नियमित किया था 14 कालोनियों को
एक ही राज्य में अलग नियम कैसे
--------------------------------------------------
कारोबारियों के मुताबिक राज्य में अंबाला इकलौता जिला है जहां नियमित कालोनी में भी रजिस्टरी के लिये नगर परिषद या नगर निगम के अलावा जिला नगर योजनाकार से भी एनओसी लेना अनिवार्य है। प्रॉपर्टी डीलरों और नागरिकों का आरोप है कि एक राज्य में नियम अलग कैसे हो सकते हैं, जब कालोनी नियमित है तो इसके लिये डीटीपी से एनओसी लेने का क्या औचित्य है।