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विद्यार्थियों में होनी चाहिए विद्या, विनय और विवेक रुपी त्रिवेणी-रमेश मुनि

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जैन स्थानक में कार्यक्रम के दौरान मौजूद मुनी व विद्यार्थी। - फोटो : Ambala
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मुलाना। आदमी को संयमित जीवन जीने का प्रयास करना चाहिए। जीवन में संयम की साधना करें और भौतिक सुविधाओं के उपयोग में जितना संभव हो सके, कमी करने का प्रयास करें तो जीवन सुखदायी बन सकता है। उक्त प्रवचन जैन संत मुनि मायाराम परंपरा के उज्जवल नक्षत्र पूज्य गुरुदेव रमेश मुनि महाराज ने जैन स्थानक में कहे।
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उन्होंने मौके पर मौजूद नंदलाल गीता विद्या मंदिर तेपला के विद्यार्थियों को विशेष प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि पाठ का अध्ययन करना, उसका पुनरावर्तन करना, जिज्ञासा करना और लिखने के बाद तब व्याकरण का ज्ञान हो सकता है। इस प्रकार ज्ञान को कंठस्थ किया जा सकता है। विद्यार्थियों को सत्पुरुषार्थ करते हुए विद्यार्जन का प्रयास करना चाहिए। ज्ञान बढ़े किंतु उसका अहंकार नहीं आए। उन्होंने कहा कि विद्या, विनय से सुशोभित होती है। विद्या, विनय और विवेक रुपी त्रिवेणी विद्यार्थियों में समाहित हो तो विद्याध्ययन सार्थक हो सकता है। वहीं मधुर गायक मुकेश मुनि व तरुण तपस्वी मुदित मुनि महाराज ने भजनों से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध किया। धनौरा जैन स्थानक से अलोक मुनि व अमर मुनि ने पहुंच कर रमेश मुनि महाराज के दर्शन किए व उन्हें 19 दिसंबर को धनौरा जैन स्थानक में आलोक मुनि की 50 वीं जन्म जयंती समारोह के आयोजन पर आमंत्रित किया। इस मौके पर अशोक जैन, राममूर्ति जैन, प्रवक्ता श्रीपाल जैन, अशोक जैन तलहेडी, राहुल धनौरा, दिनेश गोयल, अभय जैन, विपिन जैन व अन्य श्रद्धालु मौजूद रहे ।
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