अंबाला। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म माता देवकी और वासुदेव की आठवीं संतान के रूप में भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में मध्य रात्रि 12 बजे हुआ था। इस बार भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी सोमवार को मध्य रात्रि दो बजे तक रहेगी।
अबकी बार जन्माष्टमी का व्रत सोमवार को रखा जाएगा। पंडित प्रवेश उनियाल ने बताया कि जन्माष्टमी के दिन पूरे दिन व्रत रखा जाएगा। बताया कि कृष्ण के जन्म से पहले ही उनकी मृत्यु का षड्यंत्र रचा जाना और कारावास जैसे नकारात्मक परिवेश में जन्म होना किसी त्रासदी से कम नही था। परंतु विपरीत वातावरण के बाद भी नंदलाला, वासुदेव के पुत्र ने जीवन की सभी विधाओं को बहुत ही उत्साह से जीवंत किया है।
श्री कृष्ण की संपूर्ण जीवन कथा कई रूपों में दिखाई पड़ती है। कृष्ण का जीवन दो छोरों में बंधा है। एक ओर बांसुरी है, जिसमें सृजन का संगीत है, आनंद है, अमृत है और रास है। तो दूसरी ओर शंख है, जिसमें युद्ध की वेदना है, गरल है तथा निरसता है। ये विरोधाभास ये समझाते हैं कि सुख है तो दुख भी है। यशोदा नंदन की कथा किसी द्वापर की कथा नहीं है, किसी ईश्वर का आख्यान नहीं है और ना ही किसी अवतार की लीला। वो तो यमुना के मैदान में बसने वाली भावात्मक संवेदना की पहचान है। यशोदा का नटखट लाल है तो कहीं द्रोपदी का रक्षक, गोपियों का मनमोहन तो कहीं सुदामा का मित्र। हर रिश्ते में रंगे कृष्ण का जीवन नवरस में समाया हुआ है।
गीता शर्मा।
गीता शर्मा।
गीता शर्मा।
गीता शर्मा।
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