मस्कुलर डिस्ट्रॉफी के मरीज दिल्ली कूच को तैयार, देंगे धरना
अंबाला। मस्कुलर डिस्ट्रॉफी का महंगा उपचार निशुल्क कराने के लिए इस बीमारी से पीड़ित बच्चों के परिजनों ने आरपार की लड़ाई का मन बना लिया है। पहले यह आंदोलन अलग-अलग राज्यों में चल रहा था, लेकिन अब ये लोग दिल्ली कूच करेंगे।
बच्चों की स्कूली परीक्षाओं के बाद यानी 15 मार्च के बाद वे जंतर-मंतर या रामलीला मैदान में प्रदर्शन करेंगे। पहले यह धरना साप्ताहिक रहेगा। यदि मांग पूरी नहीं हुई तो इसे अनिश्चितकाल तक कर सकते हैं। बता दें कि देशभर के करीब 1178 मरीजों के परिजन सोशल मीडिया के जरिए एकजुट हो गए हैं। इस आंदोलन के लिए ग्रुप में रूपरेखा लगभग तैयार हो चुकी है। 19 फरवरी 2023 को भी नई दिल्ली में सभी राज्यों के कोऑर्डिनेटर की फाइनल मीटिंग होगी। इसमें निर्णय लिया जाएगा कि आखिर आंदोलन कब और किस-किस राज्य की क्या भूमिका रहेगी।
बता दें कि इस बीमारी में बच्चा चार-पांच वर्ष तक स्वस्थ होता है। दस साल में चलना-फिरना बंद हो जाता है और व्हील चेयर पर आ जाता है। 15-20 साल की उम्र में बच्चे की मौत हो जाती है। परिजनों की मांग है कि करीब दो करोड़ की लागत से मिलने वाला उपचार उनके बच्चों को निशुल्क मिले। साथ ही अन्य सुविधाएं भी। हरियाणा में मानवाधिकार आयोग ने भी इस विषय को लेकर संज्ञान लिया है और जवाब मांगा है।
परिजन बोले- नहीं बढ़ने देंगे मौत का ग्राफ
बीमारी से ग्रस्त बच्चों के परिजनों ने कहा कि वह सालों से आवाज उठा रहे हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं और बच्चों की मौत का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। अब वह किसी बच्चे की महंगे उपचार के अभाव से मौत नहीं होने देंगे। चाहे उसके लिए उन्हें कोई भी कदम क्यूं न उठाना पड़े। बता दें कि बिहार, छत्तीसगढ़, दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू एंड कश्मीर, कर्नाटका, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उडिसा, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल राज्यों से परिजनों ने इस आंदोलन का एलान किया है।
हरियाणा में करीब 300 बच्चे ऐसे हैं जो इस बीमारी से ग्रस्त है। हाल ही में प्रदेशभर के मरीजों व परिजनों ने अंबाला के बाजारों से मार्च निकाला गया था और स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के नाम ज्ञापन दिया था। बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई। अब वह दिल्ली के जंतर मंतर या फिर रामलीला मैदान में 15 मार्च के बाद करीब एक सप्ताह के लिए धरने पर बैठेंगे। सुनवाई नहीं हुई तो यह अनिश्चितकालीन भी रहेगा। जल्द इसकी तिथि बता दी जाएगी।
दिनेश कुमार मेहंदीरत्ता, कोआर्डिनेटर हरियाणा
28 अगस्त 2022 को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया से मुलाकात की थी। अभी तक केवल आश्वासन ही मिल रहे जबकि बच्चों की तबीयत निरंतर बिगड़ती जा रही है। बच्चों की मौत का आंकड़ा भी बढ़ता जा रहा है। जो दिल्ली में आंदोलन की तैयारी चल रही है और उसमें देशभर में इस बीमारी से ग्रस्त मरीजों के परिजन पहुंचेंगे। 19 फरवरी को भी दिल्ली में एक विशाल मीटिंग रखी गई है। दिल्ली में इस बीमारी से ग्रस्त करीब 30 बच्चों के परिजन इस आंदोलन में साथ है।
रतनेश, कोआर्डिनेटर, नई दिल्ली
पंजाब में करीब 65 मरीज उनके साथ मिलकर आवाज उठा रहे हैं। दिल्ली में होने वाले विशाल आंदोलन के लिए वह बिल्कुल तैयार है। पंजाब से सभी मरीज व उनके परिजन संग पहुंचेंगे। यह बच्चों को जिंदा रखने की लड़ाई है और सरकार को इसके आगे झुकना ही होगा और निशुल्क उपचार देकर सैकड़ों बच्चों की जान बचानी होगी।
विवके कुमार, कोआर्डिनेटर, पंजाब
300 मरीज उनके साथ है और आज तक कोई समाधान नहीं हुआ। आवाज उठी तो हर बार लेकिन फिर दबा दिया गया। दिल्ली में जो आंदोलन होगा वो सभी की आवाज बनेगा। वह पूरी तरह से तैयार है। जल्द ही जगह फाइनल होने के बाद देशभर से मरीज व उनकी परिजन एकजुट होंगे। सोशल मीडिया पर बने ग्रुप के जरिये सभी राज्य एकजुट हैं।
संतोष कुमार, कोआर्डिनेटर, बिहार