अंबाला सिटी। अनापत्ति प्रमाण पत्रों में उलझी अंबाला शहर नगर निगम क्षेत्र की जनता की दिक्कतें अभी खत्म होती नजर नहीं आ रही हैं। ऐसी कॉलोनियां या खसरा नंबर जिन्हें नगर निगम के एनडीसी पोर्टल पर अवैध बताया जा रहा है लेकिन रिकॉर्ड में वैध हैं अब ऐसे मामले नगर निगम के अधिकारी अपने स्तर पर डील नहीं करेंगे। उन्हें चंडीगढ़ ट्रांसफर कर दिया जाएगा। वहीं से रिकॉर्ड देखकर इन्हें दुरुस्त किया जाएगा। नगर निगम में एनडीसी के नाम पर हो रहे भ्रष्टाचार को रोकने के लिए यह कदम शहरी स्थानीय निकाय निदेशालय ने उठाया है।
बेशक अधिकारी इसे अच्छा और सार्थक कदम बता रहे हैं लेकिन इससे एनडीसी लेने आने वाले लोगों की दिक्कतें बढ़ना तय हैं। हालांकि आवेदक को 10 दिनों के भीतर एनडीसी देनी होती है लेकिन नई प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही एक से तीन महीने कम से कम अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी होने में लग रहे हैं। ऐसे में अब चंडीगढ़ से फाइल पास होने के बाद कितना समय लगेगा यह किसी को नहीं पता, वहीं यदि निगम के अधिकारी गलती से किसी अवैध कॉलोनी की फाइल पर वैध करते हैं और बाद में गलती का पता चल जाता है तो उसे सुधारने का एक अवसर अधिकारियों को यहीं पर दिया जाएगा। फाइल चंडीगढ़ नहीं भेजी जाएगी।
पहले ही दिन आठ फाइल पहुंची चंडीगढ़
नई प्रक्रिया 31 अगस्त से शुरू कर दी गई। पहले ही दिन ऐसी 8 फाइलें एनडीसी की आई जिनके क्षेत्र को नगर निगम के पोर्टल पर अवैध दिखाया जा रहा था लेकिन वास्तव में वह वैध कॉलोनियों का हिस्सा थी। ऐसे में इन सभी फाइलों को चंडीगढ़ स्थानांतरित कर दिया गया।
ऐसे जाएंगी चंडीगढ़
आवेदक के आवेदन करने के बाद स्तर-1 पर फाइल की जांच होगी। आवेदन जिस एरिया का किया जा रहा है वह वास्तव में उतना है या नहीं, संपत्ति कर भरा है या नहीं इत्यादि के बाद स्तर-2 की जांच होगी। स्तर दो की जांच में यदि सभी कुुछ सही पाया जाता है और आवेदक का क्षेत्र पोर्टल पर अवैध बताया जा रहा है लेकिन रिकॉर्ड में वह वैध है तो उसे चंडीगढ़ ट्रांसफर कर दिया जाएगा। इसकी जानकारी आवेदक के मोबाइल नंबर पर भेजी जाएगी। साथ ही यह भी बताया जाएगा कि कितने समय में यह आपत्ति दूर की जाएगी।
मैंने नगर निगम में वर्ष 2010 में विकास शुल्क जमा करवा दिया था, अब मुझे यही संपत्ति बेचनी है, जिसका अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने के लिए मैंने 24 अगस्त को ऑनलाइन आवेदन किया था। लेकिन मेरी फाइल पर आपत्ति जाहिर कर दी गई, जबकि उसके सारे कागजात नियमानुसार सही हैं और उसकी संपत्ति मान्य क्षेत्र में आती है। पूछने पर बताया जा रहा है कि उसकी फाइल चंडीगढ़ भेज दी गई है।
- मनीष जैन।
मेरा एक प्लाट गांव सिंघावाला में है जिसका नक्शा पास उसने वर्ष 2016 में पास करवाते समय नियमानुसार जो विकास शुल्क बनता था वो दे दिया था। अब मुझे वही प्लाट बेचना है जिसका अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने के लिए 18 अगस्त को आवेदन किया था, लेकिन निगम ने अवैध कालोनी का खसरा नंबर बताकर आपत्ति लगा दी। कह रहे हैं कि खसरा नंबर हमारी सूची से बाहर है।
- गुरविंद्र सिंह।
मेरी संपत्ति शालीमार कॉलोनी में है। जिसमेें से उसने दो प्लाट पहले अनापत्ति प्रमाण पत्र मिलने के बाद बेच दिए हैं। अब वीरवार को तीसरे प्लाट की रजिस्ट्री करवानी है, इसके लिए उसने अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने के लिए 20 अगस्त को आवेदन किया था। लेकिन उस पर नगर निगम ने अवैध कॉलोनी बताते हुए आपत्ति लगा दी है।
- गुरिंद्र सिंह।
स्तर एक से फाइल पास होने के बाद आवेदक के मोबाइल फोन पर संदेश जाएगा। इसके बाद स्तर दो में भी ऐसे ही होगा। रही बात चंडीगढ़ फाइल भेजे जाने की तो इसका भी संदेश सीधे आवेदक के पास ही जाएगा। सारा काम सही तरीके से हो ऐसा प्रयास है। इसीलिए नई व्यवस्था शुरू की गई है।
-अमन ढांडा, उप निगम आयुक्त