राजेश शांडिल्य
अंबाला। छावनी में 100 लोगों के ठहरने के लिए दो रैन बसेरों की व्यवस्था की गई है, जिसमें महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग ठहरने की व्यवस्था है, लेकिन यह सफेद हाथी साबित हो रहा है। यहां ताले लटके होने के कारण बेसहारों को सड़कों, रेहड़ियों और खुले में रात बिताने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि 14 जनवरी की रात को प्रचंड सर्दी में दर्जनों लोग इन रैन बसेरों के 200 मीटर की रेंज में सड़कों पर इधर-उधर रात गुजारते दिखे। हालांकि इस संबंध में जिम्मेदार अधिकारी का कहना है कि रैन बसेरे में ताले बंद नहीं थे, बल्कि पांच लोग शरण लिए हुए थे।
राज्य सरकार के निर्देश हैं कि प्रशासनिक स्तर पर वे अपने-अपने सब डिवीजन के शहरों व कस्बों में रैन बसेरों की उपलब्धता सुनिश्चित करें, जहां कम्बल, गद्दे तथा गरम पानी आदि की सुविधा भी हो। साथ ही सरकारी अधिकारी एवं कर्मचारी यहां ड्यूटी के दौरान मानवता की सेवा में योगदान दें, ताकि सर्द रातों में सड़कों तथा पुलों के नीचे रह रहे गरीब लोगों को सर्दी से बचाया जा सके। वहीं रैन बसेरों में ठहरने वाले गरीब लोगों के लिए सुबह चाय और खाने की व्यवस्था रेडक्रॉस और एनजीओ के माध्यम से कराने के निर्देश हैं। इसके बावजूद इसका लाभ जरूरतमंदों को नहीं मिल पा रहा है।
छावनी के रेलवे स्टेशन स्थित गेट नंबर के पास सबसे व्यस्त रोड पर शुक्रवार की देर रात दीवार के साथ फुटपाथ पर एक व्यक्ति कंबल ओढ़कर सोता हुआ दिखा।
- इसके बाद बस स्टैंड के बाहर ओवर ब्रिज के नीचे करीब 7 लोग जमीन पर ही कपड़ा बिछाकर कंबल ओढे़ सोते नजर आये
- अंबाला छावनी बस स्टैंड के पास बने रैन बसेरों में दोनों गेट अंदर की ओर से बंद मिले
- रैन बसेरे के दोनों गेट पर कोई भी व्यक्ति आसपास नजर नहीं आया
- दोनों गेटों के आसपास आवाज लगाए जाने पर भी भीतर से कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई
- इधर जिस बस स्टैंड से अनेक राज्यों में बस सेवाएं उपलब्ध हैं, वहां लोग फर्श, कुर्सियों पर सोते नजर आये
- बस अड्डे के टिकट काउंटर के भीतर भी कई लोग जमीन पर आसरा लिये हुए दिखे
यात्री बोला- रैन बसेरे के दोनों गेट पर लगे ताले
सोनीपत निवासी तरुण ने बताया कि वह अमृतसर घूमने के लिये गया था और बस से माध्यम से अमृतसर से अंबाला छावनी करीब रात दस बजे पहुंचा था। वह रैन बसेरे में आसरा लेने की उम्मीद से वहां गया। दोनों दरवाजों पर अंदर से ताला लटका मिला। तरुण के मुताबिक उसे रात को रैन बसेरे में तो आसरा नहीं मिला, मगर मजबूर होकर उसे सड़क किनारे बने बस शेल्टर के नीचे बैठने को विवश होना पड़ा।
नगर परिषद सचिव ने माना कि पांच लोग थे रैन बसेरे में
नगर परिषद के सचिव राजेश कुमार का कहना है कि रैन बसेरों के गेट पर ताला नहीं लगाया जाता। वहीं जब उनसे यह सवाल किया गया कि 14 जनवरी 2022 की रात को रैन बसेरे में कितने लोगों ने शरण ली तो उन्होंने बताया पांच लोगों ने। अब सवाल यह उठता है कि जहां 100 जरूरतमंदों के ठहरने का प्रबंध किया गया है, वहां पांच लोग ही क्यों ठहरे? जबकि बड़ी संख्या में आसपास लोग खुले आसमान के नीचे ठिठुरते नजर आए।