गांधी मैदान में लगभग 20 लाख रुपये की लागत से तैयार किया गया साइकिलिंग ट्रैक नपा अधिकारियों की लापरवाही से पानी में धंस गया है, वहीं मैदान में लंबी झाड़ियां और घास उग आई हैं। पूरा मैदान गंदे पानी के तालाब का रूप धारण कर चुका है, वहीं एक सिरे पर पड़ी बैंक स्क्वेयर की मिट्टी भी साइकिलिंग ट्रैक के लिए ग्रहण बन कर रह गई है। 30 लाख रुपये की लागत से बनने वाला यह ट्रैक लगभग 6 महीने पहले बनकर तैयार हो चुका था। अब इसपर नए सिरे से काम करना पड़ेगा।
जानकारी के अनुसार नगर परिषद ने अगस्त 2019 में गांधी मैदान में 30 लाख रुपये से तैयार होने वाले सीमेंट के साइकिल ट्रैक का निर्माण शुरू किया था। सुंदरीकरण के लिए ट्रैक के साथ पौधरोपण भी किया। मैदान में घास लगाई गई ताकि मिट्टी को कवर किया जा सके और पानी के लिए अंडर ग्राउंड पाइप लाइन डाली गई। लेकिन अब पिछले 6 महीने से गांधी मैदान के साथ बन रहे बैंक स्क्वेयर के निर्माण कार्य की वजह से ट्रैक खराब हो रहा है। आधा ट्रैक धंस गया है, वहीं दलदल और मिट्टी की वजह से ट्रैक पानी में विलुप्त हो गया है। जलभराव के कारण लंबी घास और झाड़ियां मैदान के हालात बयां कर रहे हैं, यानी ट्रैक के लिए खर्च किए गए लगभग 20 लाख रुपए व्यर्थ साबित हो गए, क्योंकि बीते वर्ष ही ट्रैक का निर्माण पूरा हुआ था। पहले बैंक स्क्वेयर से खोदी गई मिट्टी को डंपर में भरकर मैदान में ट्रैक किनारे खाली जमीन पर फेंका गया और इससे मिट्टी के ढेर लग गए। जब मिट्टी को साइकिल ट्रैक से हटाकर मैदान के एक सिरे में डाला गया तो कुछ समय बाद ही निर्माण कार्य रुक गया।
साइकिलिंग शौकीन के लिए थी योजना
सड़कों पर बढ़ते ट्रैफिक दबाव के चलते साइकलिंग के शौकीन ठीक ढंग से साइकिलिंग नहीं कर पा रहे थे। इसलिए उनकी सुविधा को देखते हुए गांधी मैदान में नप ने साइकिलिंग ट्रैक को तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की थी। इसमें रात को भी साइकिलिंग की जा सके, इसके लिए भी सोलर लाइट का प्रबंध किया जा रहा था, वहीं पर्यावरण प्रेमियों के लिए भी ट्रैक के साथ बैंच लगाने व फूलदार पौधे लगाने की योजना थी ताकि साइकिलिंग करते समय अगर कोई थक जाए तो वह हरे-भरे माहौल में यहां बैठकर आराम कर सके।
दोबारा शुरू करवाएंगे निर्माण
बैंक स्क्वेयर निर्माण की वजह से गांधी मैदान में बन रहे साइकिलिंग ट्रैक का निर्माण रोक दिया है। जैसे ही बैंक स्क्वेयर का काम पूरा हो जाएगा, तुरंत ही साइकिलिंग ट्रैक के अधूरे प्रोजेक्ट को पूरा कर दिया जाएगा।
विकास धीमान, एक्सईएन नप।