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मंदिरों में आज से गूंजेंगे माता के जयकारे

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अंबाला सिटी। नवरात्र पर्व को लेकर शहर भर के मंदिरों को रंग बिरंगी रोशनियों से सजाया गया है। वहीं मंदिरों के आसपास पूजा आदि में इस्तेमाल होने वाली विभिन्न प्रकार की सामग्री से दुकानें सजी हुई हैं। दुकानदारों की ओर से माता के विभिन्न प्रकार के सुंदर-सुंदर वस्त्र व शृंगार, चुन्नी नारियल आदि की खरीदारी करते हुए भक्त दिखाई दे रहे हैं।
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सिटी के मां दुखभंजनी मंदिर, मां अंबिका देवी माता मंदिर, सेक्टर दस के मां वैष्णो मंदिर, सेक्टर नौ के श्री महादेव शिव मंदिर एवं सत्संग भवन, सेक्टर सात स्थित श्री महादेव नीलकंठ मंदिर, बलदेव नगर टालियां वाला आदि मंदिरों में नवरात्र के पावन अवसर पर माता के स्वरूपों को सुंदर वस्त्रों से सजाया गया है। वहीं पंडित भगवती प्रसाद, पंडित कन्हैया लाल, पंडित दिनेश शास्त्री, पंडित तिलक राज शर्मा, पंडित वेदप्रकाश शास्त्री सहित अन्य पंडितों ने बताया कि हिंदू पंचांग के अनुसार नवरात्र चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होते हैं और नवमी तक चलते हैं। दशमी तिथि को पारण करने के बाद नवरात्र व्रत पूरा होता है।
उन्होंने बताया कि हर साल नवरात्र की तिथियां घटती-बढ़ती हैं। आमतौर पर नवरात्र की सामान्य अवधि नौ दिनों की होती है, लेकिन कभी-कभी तिथियां बढ़ने पर नवरात्र दस दिनों तक चलते हैं। इस बार नवरात्र में श्रद्धापूर्वक माता के व्रत रखने वाले भक्तों की हर प्रकार से उचित मनोकामनाएं संपूर्ण होगी।
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इस बार चैत्र नवरात्र नौ दिनों तक रहेंगे
इस साल चैत्र नवरात्र दो अप्रैल से शुरू होकर 11 अप्रैल तक रहेंगे। 11 अप्रैल को व्रत पारण कर नवरात्र पूर्ण होंगे। नवरात्र के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाएगी। शास्त्रों के अनुसार इन नौ दिनों के नवरात्र को शुभ माना जा रहा है। इस वर्ष माता रानी घोड़े पर सवार होकर आएंगी। सभी भक्तों की मनोकामनाएं संपूर्ण करेंगी। भक्तों को चाहिए कि विधिवत तरीके से माता की पूजा अर्चना आदि करें। फल की प्राप्ति अवश्य होगी।
- पंडित भगवती प्रसाद, सेक्टर सात, अंबाला सिटी।
मां की चौकी लगाकर कलश की स्थापना करें
इस बार नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना की जाएगी। जिसको घट स्थापना भी कहा जाता है। नवरात्र घट स्थापना का शुभ मुहूर्त दो अप्रैल शनिवार को सुबह छह बजकर दस मिनट से आठ बजकर 29 मिनट तक रहेगा। कलश स्थापना नवरात्र के पहले दिन मां दुर्गा की पूजा के साथ की जाती है। कलश की स्थापना मंदिर में बने उत्तर-पूर्व दिशा में मां की चौकी लगा कर कलश को स्थापित करें। कलश स्थापना से पूर्व उस स्थान को गंगाजल छिड़क कर पवित्र कर लें। फिर लकड़ी की चौकी पर लाल रंग से स्वास्तिक बनाकर कलश को स्थापित करें।
कलश में आम का पत्ता रखकर गंगाजल भर दें। साथ में एक सुपारी, कुछ सिक्के, दूर्वा, हल्दी की एक गांठ कलश में डालें। कलश के मुख पर एक नारियल लाल वस्त्र से लपेट कर रखें। चावल यानी अक्षत से अष्टदल बनाकर मां दुर्गा की प्रतिमा रखें। माता की प्रतिमा पर भी लाल व गुलाबी चुनरी ओढ़ाएं। कलश स्थापना के साथ अखंड दीपक का प्रकाश करें। कलश स्थापना के बाद मां शैलपुत्री की पूजा करें। हाथ में लाल फूल और चावल लेकर मां शैलपुत्री का ध्यान करके मंत्र का जाप करें और फूल व चावल मां के चरणों में अर्पित करें। मां शैलपुत्री के लिए जो भोग बनाएं, वह गाय के घी से बने होने चाहिए। गाय के घी चढ़ाने से बीमारी व अन्य प्रकार के दुख संकट आदि से छुटकारा मिलता है।
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- पंडित कन्हैया लाल, सेक्टर नौ, अंबाला सिटी।
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