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कृष्ण-सुदामा ने पेश की दोस्ती की मिसाल

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अंबाला। महेश नगर के नागरिक सदन परिसर में यजमान दीप चंद गुप्ता व आशा गुप्ता द्वारा आयोजित सात दिवसीय भागवत कथा का सोमवार को समापन हो गया। इस अवसर पर व्यासपीठ से वृंदावन धाम के परम श्रद्धेय अतुल कृष्ण शास्त्री ने कृष्ण सुदामा चरित्र प्रसंग सुनाया। अंतिम दिन श्रीमद्भागवत का रसपान पाने के लिए भक्त भारी संख्या में पहुंचे। कथावाचक महाराज ने श्रीमद्भागवत कथा का समापन करते हुए कई कथाओं का साधकों को श्रवण करवाया, जिसमें प्रभु कृष्ण के 16108 शादियों के प्रसंग के साथ, सुदामा प्रसंग और परीक्षित मोक्ष की कथाएं सुनाई।
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उन्होंने बताया कि सुदामा जी के पास कृष्ण नाम का धन था। वे संसार की दृष्टि में गरीब तो थे, लेकिन दरिद्र नहीं थे। अपने जीवन में किसी से कुछ मांगा नहीं। पत्नी सुशीला के बार-बार कहने पर सुदामा अपने मित्र कृष्ण से मिलने गए। भगवान के पास जाकर भी कुछ नहीं मांगा। भगवान अपने स्तर से सब कुछ दे देते हैं। सुदामा चरित्र के माध्यम से भक्तों के सामने दोस्ती की मिसाल पेश की गई और समाज में समानता का संदेश दिया। इसके उपरांत दत्तात्रेय जी के चौबीस गुरुओं के बारे में बताते हुए कहा कि हमारा मन, हमारा भाव निर्मल होना चाहिए। जिसके हृदय में हित की भावना होती है, उनके लिए जीवन मे कभी कोई कमी नही होती, उसके भंडार हमेशा भरे रहते हैं। अगर किसी को दान करो तो बताओ नही, गुप्त दान करो और दान करके भूल जाओ, तुम्हारे दान का ध्यान तो गोविंद रखता है और उसका चार गुना फल देता है।
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