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अच्छे नेताओं का निर्माण करना हमारी जिम्मेदारी

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अंबाला। प्रदेश के गृह एवं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने कहा कि अच्छे नेताओं का निर्माण करना हमारी जिम्मेदारी है। विज गुरुवार को छावनी स्थित बीपीसी जैन पब्लिक स्कूल में संत बाबा पूर्ण चंद महाराज जी की 46वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि लोगों को संबोधित कर रहे थे। विज ने कहा कि हर मां कहती है कि मेरा बेटा इंजीनियर, डॉक्टर, आईएएस, आईपीएस बने और उनका यह सपना होता है। अब माताओं को अपने सपने को और आगे बढ़ाना पड़ेगा कि ‘मेरा बेटा अच्छा लीडर बने।
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विज ने कहा कि जब तक हम अच्छे नेताओं का निर्माण नहीं करेंगे तब तक देश की शासन पद्धति को कुशलता से चलाना नामुमकिन है। गृहमंत्री ने कहा कि इसलिए आज से एक सपना और लेना शुरू कर दो कि मैं अपने बेटे या बेटी को अच्छा नेता बनाऊंगा, ताकि वह सेवा करके इस काम को और आगे ले जा सके। इससे पहले विज के स्कूल परिसर में पहुंचने पर स्कूल के प्रधान अनिल जैन व जैन सभा के सदस्य एनके जैन, चेयरमैन प्रधान अनिल जैन, महामंत्री सुशील जैन, प्रेम जैन, जसवंत जैन, व अन्य ने उनका स्वागत किया। इस अवसर पर उप प्रवाचक सुभाष मुनि जी महाराज और प्रवचन दिवा दिवाकर सुधीर मुनि महाराज मौजूद रहे। कार्यक्रम में पारूल और शोभना ने मंच का संचालन किया। स्कूल के विद्यार्थियों ने भजन, नृत्य, योग और लघु नाटिका प्रस्तुत की। जैन सभा के सदस्यों नव युवती मंडल की महिलाओं द्वारा भजन प्रस्तुत किया गया। बच्चों द्वारा गाए गए भजन राधा रमन हरी बोल ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। बच्चों ने लघु नाटिका में माता त्रिशला के 14 सपनों के बारे में वार्तालाप किया।
राष्ट्र का निर्माण संस्कृति से होता है
गृहमंत्री अनिल विज ने कहा कि आज नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में नई शिक्षा पॉलिसी बनाई गई जिसमें सारे विद्वानों को शामिल गया गया ताकि हम अच्छे नागरिक तैयार कर सकें। किसी राष्ट्र का निर्माण वहां के नागरिकों की संस्कृति से होता है मिट्टी और सीमेंट की इमारतों से नहीं। वहां के नागरिकों का किरदार क्या है, उस पर उस राष्ट्र को आंका जाता है।
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शिक्षा प्रणाली पर अंग्रेजों का प्रभाव
विज ने कहा कि हमारी शिक्षा प्रणाली पर काफी समय तक अंग्रेजों का प्रभाव रहा। वह हमें पढ़ाना व काबिल नहीं बनाना चाहते थे। उन्हें केवल काम करने के लिए कर्मचारियों की जरूरत थी इसलिए कर्मचारियों को जितने ज्ञान की जरूरत होती उतना ही ज्ञान दिया जाता था।
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