अंबाला। पंकज इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड है। जीआरपी की गिरफ्त में चंडीगढ़ स्टेशन से पकड़े गए दूसरे साथी ज्योति प्रकाश ने यह जानकारी दी। उसने बताया कि पंकज अकसर बातें करता था कि उसने जब भी ट्रेन में सफर किया है तो कभी भी सामान्य कोच में चेकिंग नहीं हुई। इतना ही नहीं रेलवे टीटीई की वर्दी भी उसे काफी पसंद थी। इस कारण उसने वर्दी पहनकर उगाही के खेल को शुरू किया था। उसके कहने पर ही रेलवे का भर्ती पत्र और आईकार्ड भी छापा गया। ज्योति प्रकाश को वीरवार को रेलवे कोर्ट में पेश किया गया। आरोपी के कब्जे से बीते बुधवार शाम ही बद्दी स्थित ठिकाने से प्रिंटर, फोटोस्टेट मशीन, छपाई का सामान और टिकट रसीद बुक में नंबर दर्ज करने वाली मोहर बरामद कर ली गई थी।
लगातार बदलता रहा बयान
पंकज रोजाना अपने बयान बदलता रहा। उसने कभी अलीगढ़, सिकंदराबाद तो कभी किसी दूसरे क्षेत्र में बैठे सरगना का नाम लिया। वहीं उसने सहारनपुर और चंडीगढ़ स्टेशन पर कार्यरत कुछ लोगों के नाम भी बताए। लेकिन उसके साथी ज्योति प्रकाश ने इन सभी जानकारी को झूठ का पुलिंदा बताया, वहीं जीआरपी की जांच में भी सभी लोग बेकसूर पाए गए। जिन लोगों के पंकज ने नाम बताए उनमें से कोई प्राइवेट काम करता पाया गया तो कोई दिव्यांग है। हालांकि कुछ व्यक्तियों को आगामी जांच में शामिल होने के आदेश दिए गए हैं।
असली और नकली ईएफटी की पहचान
नकली टीटीई पंकज से बरामद नकली ईएफटी बुक में सिर्फ 3 अक्षर के नंबर ही दर्ज थे जबकि असली ईएफटी बुक में 6 और 8 नंबर के अक्षर दर्ज होते हैं, वहीं जिस मंडल व अधिकारी द्वारा ईएफटी बुक जारी की जाती है, उसकी मुहर भी रसीद में लगी होती है। असली रसीद में किराया, अतिरिक्त किराया और सामान शुल्क की जगह बनाई गई है, लेकिन पंकज द्वारा छापी गई रसीद में सिर्फ अतिरिक्त किराया और सामान पड़ा हुआ है ही छपा हुआ था।
नकली टीटीई पंकज के साथी ज्योति प्रकाश को वीरवार को कोर्ट में पेश किया था, उसे जेल भेज दिया गया है। पंकज को शुक्रवार कोर्ट में दोबारा पेश किया जाएगा ताकि उसकी लिखाई का मिलान नकली टिकट रसीद बुक से किया जा सके। -विलायती राम, प्रभारी जीआरपी थाना।