करीब दो साल से कोरोना की मार झेल रहे जिला के करीब 200 से अधिक प्ले वे संचालक घोर आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। प्ले वे संचालकों द्वारा राज्य सरकार और जिला प्रशासन को लिखित में मांग पत्र सौंपे जा चुके हैं, लेकिन अभी तक इनके लिए कोई सुखद समाचार नहीं है। हालांकि प्ले वे संचालकों का कहना है कि देश-दुनिया कोरोना से लड़ते हुए कामकाज को पटरी पर लाया जा रहा है। जब कुछ दिशा निर्देशों के साथ अधिकांश जगहों पर आवागमन शुरूहो चुका है तो, प्ले वे पर अब तक ताला क्यों ? यहां बता दें कि जिला में करीब 200 से ज्यादा प्ले वे हैं, जहां ढाई वर्ष से पांच वर्ष आयु वर्ग के हजारों बच्चों के लिये संचालकों द्वारा व्यवस्था है।
अगर फेडरेशन ऑफ प्राइवेट स्कूल वेलफेयर एसोसिएशन हरियाणा की मानें तो सामान्य छोटे प्ले वे को खोलने के लिये कम से 40 से 50 लाख और एक करोड़ तक का खर्च आता है। एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष अध्यक्ष कुलभूषण शर्मा के मुताबिक पिछले दो साल में ना केवल प्ले वे संचालकों की हालत पतली हो चुकी है, बल्कि यहां सेवाएं देने वाले हजारों लोग खाली बैठे हैं।
उन्होंने बताया कि एक प्ले में कम से कम 8 से 10 लोगों का स्टाफ होता है, जिस पर मासिक खर्च कम से कम 40 से 50 हजार रुपये आता है। सरकार को इस विषय पर ध्यान देना चाहिए कि ना केवल अंबाला, बल्कि पूरे हरियाणा में हजारों की संख्या में दो साल पहले तक चल रहे प्ले और इनके संचालकों के साथ यहां हजारों की संख्या में काम करने वालों का गुजर बसर कैसे हो रहा होगा।