अंबाला। डॉक्टरों को मरीज का उपचार कर नया जीवनदान देते तो सुना होगा पर छावनी नागरिक अस्पताल के डॉक्टरों ने अनूठी मिसाल पेश की है। उन्होंने लावारिस मरीज का उपचार कर उसे अपने घर वालों से भी मिलवाया। सड़क हादसे में घायल होने के बाद मरीज अस्पताल में लाया गया था। मरीज को अपने परिजनों के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। अस्पताल स्टाफ ने रोटी बैंक के कर्मचारियों की मदद से उपचार के साथ-साथ उसकी करीब डेढ़ माह तक देखभाल की।
ठीक होने पर उसने अपनी पहचान पटना के मोकामा में रहने वाले संजीव के रूप में बताई। मरीज ने खुद घर जाने की इच्छा जताई तो रोटी बैंक के स्टाफ ने ट्रेन की टिकट बुक करवाई और डॉक्टरों ने आपसी सहयोग से उसे खर्च के लिए कुछ पैसे व वॉकर देकर विदा किया ताकि वह आसानी से घर पहुंच सके। नया जीवनदान मिलने पर मरीज संजीव ने बताया कि वह अस्पताल प्रबंधन का हमेशा आभारी रहेगा। उन्होंने न केवल उपचार किया बल्कि मुझे अपने घर वालों तक पहुंचाने के लिए हर संभव मदद की। वह काफी समय पहले खुद ही अपने परिवार से दूर आ गया था।
पैर की टूटी हड्डी का हुआ था ऑपरेशन
छावनी नागरिक अस्पताल के पीएमओ डॉ. राकेश सहल ने बताया कि 13 अप्रैल को नागरिक अस्पताल छावनी में डायल 108 एंबुलेंस 45 वर्षीय अज्ञात पुरुष को घायल अवस्था में लेकर आई थी। उसकी देखरेख करने वाला कोई नहीं था। उपचार के बाद इमरजेंसी की सीनियर नर्सिंग सिस्टर बाला शर्मा ने अपने खर्च से उसके खाने से लेकर कपड़े की व्यवस्था की। इसके बाद उसकी मदद के लिए हाथ आगे बढ़ने लगे और पैर की टूटी हड्डी का ऑपरेशन डॉ. सुनील ने किया। ऑपरेशन के बाद उसे पौष्टिक आहार के रूप में रोटी बैंक के परमजीत बत्रा ने व्यवस्था कराई। धीरे धीरे उसकी तबीयत में सुधार हुआ। मंगलवार को परमजीत बत्रा ने संजीव का ट्रेन नंबर 12318 में आरक्षण कराया और उसकी विदाई की गई।