पंजाब के लुधियाना कोर्ट में हुए बम धमाके के बाद अंबाला जिला बार एसोसिएशन की ओर से भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बैठक की गई। बैठक में बार एसोसिएशन के प्रधान दिलबाग सिंह ने बताया कि अंबाला कोर्ट परिसर में प्रवेश करने के लिए तीन रास्ते हैं। सुरक्षा की दृष्टि से उन तीनों रास्तों पर मेटल डिटेक्टर से प्रवेश के बाद पुलिस के जवान पूछताछ कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कोर्ट परिसर में सबसे पहले सुरक्षा दायरे को मजबूती देने के लिए ठोस निर्णय लिए जाएंगे। प्रधान ने सभी सदस्यों को आश्वासन देते हुए कहा कि कोर्ट परिसर की सुरक्षा को मद्देनजर रखते हुए जिला प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात हो चुकी है। प्रशासनिक अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि कोर्ट परिसर की सुरक्षा को लेकर प्रशासन भी पूरी तरह से गंभीर है। इसी मामले में जल्द ही गृहमंत्री अनिल विज से मिलकर सुरक्षा बढ़ाने को लेकर चर्चा की जाएगी।
अंबाला कोर्ट परिसर में भी हो चुकी हैं कई वारदातें
अंबाला कोर्ट परिसर में भी कई वारदातें हो चुकी हैं। गैंगस्टर राकेश बॉबी की 2010 में सीजेएम कोर्ट परिसर के बाहर गोलियों से भून दिया था। आरोपी वकील की ड्रेस पहनकर वकीलों के बीच में शामिल हो गए थे। इसी प्रकार 2013 में अंबाला के कोर्ट परिसर में सूरज प्रताप हत्याकांड में दोषी करार जगप्रीत सिंह फरार हो गया था। उस समय अदालत ने आरोपी को दोषी करार दे दिया था। 2016 में अंडर ट्रायल चल रहे बंदियों के दो गुटों में किसी बात को लेकर झगड़ा हो गया था। दोनों गुटों में जमकर मारपीट हुई। इस दौरान बीच बचाव कर रहे पुलिसकर्मियों को भी गंभीर चोटें आई थी। इसके अलावा भी अन्य कई वारदातें हो चुकी हैं।
कोर्ट परिसर की सुरक्षा को लेकर पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। जिसमें करीब छह मेटल डिटेक्टर, सीसीटीवी व पुलिस सुरक्षा बल तैनात किया गया है। कोर्ट परिसर के मुख्य गेट पर सुरक्षा और ज्यादा बढ़ाई गई है। कोर्ट परिसर में आने जाने वालों की पुलिस जवान गहनता से जांच करके ही कोर्ट में अंदर जाने दे रहे हैं। बिना पूछताछ किसी को भी कोर्ट परिसर में जाने की इजाजत नहीं दी जा रही है।
- गुरदयाल सिंह, सिक्योरिटी सहायक इंचार्ज कोर्ट परिसर अंबाला।