गांव बड़ी बस्सी में औषधीय पौधों की खेती की जा रही है। ऐसा करने पर न केवल बढ़िया आमदन हो रही है बल्कि आसपास क्षेत्र व अन्य जिलों के किसान भी इस फार्म को देखने आ रहे हैं। बागवानी विभाग भी इस खेती को किसानों के लिए मुनाफे की खेती मानते हुए उन्हें प्रोत्साहित कर रहा है।
किसान एवं विशेषज्ञ डॉ. वीपी सिंह ने बताया कि उनकी देखरेख में लगभग 120 एकड़ भूमि पर विभिन्न प्रकार के औषधीय पौधों की खेती की जा रही है। इसमें 20 एकड़ में खस, 15 एकड़ में लैमन ग्रास, 5 एकड़ में सिट्रोनेला तथा 2 एकड़ में पामारोजा, 1 एकड़ में स्टीविया, 1 एकड़ में सफेद मूसली, 15 एकड़ में तुलसी, 15 एकड़ में अश्वगंधा, 2 एकड़ में सतावरी, 15 एकड़ में हल्दी, 3 एकड़ में मसरी, 3 एकड़ में अलसी, 5 एकड़ में मेंथा और अमरूद, मकोय, पित पापड़ा, अकरकरा, कैमोमाइल आदि की खेती हो रही है।
उन्होंने बताया कि बहुत से किसान उनके साथ जुड़ रहे हैं और इस खेती के तौर-तरीके भी सीख रहे हैं। इसके लिए फार्मर प्रोड्यूसर आर्गेनाइजेशन (एफपीओ) का भी सहयोग मिल रहा है और इस आर्गेनाइजेशन में भी कई किसान सदस्य हैं, जो इस खेती को अपनाना चाहते हैं। उनके अनुसार इस खेती से अच्छी आमदनी भी हो रही है।
डॉ. सिंह ने बताया कि गेहूं और धान की फसल के बीच के लगभग 3 माह में तुलसी की फसल तैयार की जाती है, जिससे 40 से 50 हजार रुपये प्रति एकड़ की आमदनी किसान को हो जाती है। इसके अलावा बागवानी विभाग द्वारा भी इस खेती को प्रोत्साहित करने के लिए एमआईडीएच स्कीम के तहत विभिन्न मदों में अनुदान भी दिया जा रहा है। उधर, इस फार्म पर औषधीय पौधों से तैयार उपज के लिए एक प्रोसेसिंग यूनिट भी करीब 6 करोड़ रुपये की राशि से तैयार किया जा रहा है। डा. सिंह के अनुसार इस औषधीय खेती से आसपास के करीब सौ लोगों को रोजगार भी मिल रहा है। यहां पर अश्वगंधा, तुलसी, हल्दी आदि औषधीय पौधों का अर्क और पाउडर तैयार होगा। इससे भी आमदन बढ़ेगी। उनके अनुसार आजकल ज्यादातर किसान धान, गेहूं, गन्ना की खेती को तवज्जो देते हैं लेकिन आर्गेनिक तरीकों से औषधीय पौधों की खेती कर किसान अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।