फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

खारकीव के बंकरों में 6 दिन तक भूखे-प्यासे रहने के बाद भारत पहुंचे आरजू व अंकित गिल.

विज्ञापन
खारकीव से दिल्ली पहुंचे आरजू गिल व अंकित गिल अपने माता -पिता के साथ। - फोटो : Ambala
विज्ञापन
नारायणगढ़। यूक्रेन के खारकीव से सोमवार को हुसैनी निवासी आरजू गिल और उसका भाई अंकित गिल दोपहर दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंचे। आरजू 2018 में व उसका भाई अंकित गिल 2021 में मेडिकल की शिक्षा के लिए यूक्रेन गए थे, लेकिन युद्ध के दौरान धमाकों के बीच दोनों भाई छह दिनों तक खारकीव के बंकरों में भूखे प्यासे रहे। फिर कई किलोमीटर पैदल और बस का सफर कर वे यूक्रेन की सीमा पर पहुंचे, जहां से विशेष विमान के द्वारा उन्हें सोमवार को दिल्ली लाया गया। एयरपोर्ट पर पहले से उन्हें लेने पहुंचे माता-पिता की आंखों में बेटों को देखकर आंसू आ गए।
विज्ञापन

परिजन लाजपत ने बताया कि यूक्रेन में रूस की ओर से हमले के बाद आरजू गिल और उसका भाई अंकित गिल 24 फरवरी से दो मार्च तक बंकरों में भूखे प्यासे रहे थे। यूक्रेन के सैनिकों व पुलिस ने भी उनके साथ बुरा बर्ताव किया और उनके मोबाइल भी बंद करा दिए थे। रेलवे स्टेशन पर यूक्रेन पुलिस ने उन्हें ट्रेन में भी नहीं चढ़ने दिया। छात्रों के परिजनों के अनुसार बाद में भारतीय दूतावास से आए एक टेलीफोन के बाद आरजू और अंकित अपने अन्य साथियों के साथ वहां से 11-12 किलोमीटर पैदल चलकर तिसुचियन गांव में पहुंचे, जहां के एक स्कूल के हॉस्टल में उन्हें पनाह दी गई। अन्य साथियों के साथ चार मार्च को वे बस द्वारा लवीव पहुंचे। वहां से बस में टर्नीफिल होते हुए रोमानिया बार्डर पर पहुंच गए थे, जहां से उनकी वापसी संभव हो सकी। विदित हो कि आरजू और अंकित के पिता रणबीर सिंह सेवानिवृत्त सैनिक हैं। इससे पहले यूक्रेन में मेडिकल शिक्षा प्राप्त करने गए छात्र जशनमान, हर्षवर्धन, अभिषेक वर्मा, अभिनव बंसल, हर्ष सैनी, निधि सैनी, नमन बंसल, अभय बंसल तथा मनप्रीत कौर सकुशल युद्ध क्षेत्र से निकलकर अपने घर नारायणगढ़ पहुंच चुके हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें