हरियाणा के जिला फतेहाबाद में भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर के वैज्ञानिक प्रो. एसके मल्होत्रा ने कहा कि देश में वर्ष 2032 तक 63500 मेगावाट परमाणु बिजली उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
वर्तमान में 4780 मेगावाट बिजली का उत्पादन न्यूक्लियर प्लांट से किया जा रहा है। वे शुक्रवार को एमएम कॉलेज में ‘ग्रामीण भारत के विकास में परमाणु का योगदान’ विषय पर आयोजित कार्यशाला में बोल रहे थे।
यह कार्यशाला भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर के बहादुरगढ़ स्थित शोध केंद्र द्वारा आयोजित की गई।
उन्हाेंने कहा कि देश को ऊर्जा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए एटॉमिक एनर्जी विभाग लगातार प्रयासरत है।
परंपरागत साधनों जैसे कोयला, डीजल, पानी, हवा आदि से बिजली का उत्पादन किया जा रहा है, लेकिन बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है।
मांग को पूरा करने के लिए अतिरिक्त स्त्रोतों से बिजली उत्पादन के प्रयास किए जा रहे हैं, जिनमें परमाणु ऊर्जा प्रमुख है।
उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया का ध्यान परमाणु ऊर्जा की तरफ गया है, इसलिए फ्रांस जैसे देश में कुल बिजली का 75 प्रतिशत बिजली का उत्पादन न्यूक्लियर प्लांटों से किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि हमारे देश में केवल 3 प्रतिशत बिजली न्यूक्लियर से पैदा की जा रही है। डॉ. मल्होत्रा ने कहा कि पूरी दुनिया में 440 परमाणु संयंत्र बिजली उत्पादन का कार्य कर रहे हैं।
हमारे देश में 20 परमाणु संयंत्रों से बिजली का उत्पादन हो रहा है। उन्होंने कहा कि हमारे देश में लगभग 700-800 यूनिट प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष बिजली का उत्पादन हो रहा है, जबकि विश्व में यह दर 3000 यूनिट प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष है।
इस सदी के मध्य तक 5000 यूनिट प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष बिजली उपलब्धता का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
इसके लिए देश में 7 नए न्यूक्लियर प्लांट लगाए जा रहे हैं जिनमें 2 राजस्थान, 2 गुजरात और 3 तमिलनाडू में शामिल हैं।
इसके अलावा गांव गोरखपुर में भी आगामी समय में परमाणु बिजली संयंत्र के निर्माण का कार्य शुरू हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि आज देश में 2 लाख मेगावाट बिजली पैदा हो रही है, जिसे 2050 तक बढ़ाकर 1350 लाख मेगावाट करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
डॉ. एसके जाम्बेकर ने कहा कि फसली बीजों में विकिरण से बीमारियों को खत्म किया जा सकता है और इस प्रकार उन्नत किस्म के बीज तैयार किए जा सकते हैं।
डॉ. अजय शर्मा ने कहा कि विकिरण से अनेक असाध्य बीमारियों का इलाज संभव हुआ है। रेडिएशन से कैंसर का इलाज किया जा रहा है।
परमाणु से तैयार बिजली सस्ती और सुरक्षित
प्रो. एसके मल्होत्रा ने कहा कि तारापुर परमाणु बिजली संयंत्र से एक रुपया प्रति यूनिट, रावतभाटा परमाणु बिजली संयंत्र में 3 रुपये प्रति यूनिट तथा नरौरा में 1.90 पैसे प्रति यूनिट बिजली का उत्पादन हो रहा है।
थर्मल प्लांट से जहां वायु प्रदूषण अधिक होता है और कोयले के अवशेष ज्यादा मात्रा में बचते हैं। वहीं परमाणु से तैयार बिजली सस्ती होने के साथ-साथ सुरक्षित भी है।