उत्तर प्रदेश के महराजगंज, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी और पीलीभीत जिले से नेपाल की 570 किलोमीटर सीमा लगी है। दोनों देश में आने जाने के लिए सोनौली, खूंनवा, रुपईडीहा के अलावा 300 से अधिक पगडंडियां हैं। इन रास्तों से देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त लोगों के घुसपैठ करने व तस्करी की संभावना बनी रहती हैं।
ये जानकारियां देंगे
- गांव में किसी भी बाहरी व्यक्ति के आने की।
- गांव में किसी के द्वारा कोई आपराधिक कृत्य करने की।
- मादक पदार्थों के आवाजाही की।
- देश विरोधी गतिविधियों में किसी के भी संलिप्तता की।
भारत-नेपाल बार्डर पर नजर रखने के लिए ग्राम सुरक्षा समितियां भी गठित की गईं हैं। इसके तहत महराजगंज में 219, सिद्धार्थनगर में 443, बलरामपुर में 24, श्रावस्ती में 115, बहराइच में 85, खीरी में 77, पीलीभीत में 17 समितियां गठित हो चुकी हैं।
पगडंडियों पर बढ़ाई गई गश्त
पगडंडी के रास्ते भारत में आने और यहां से जाने वालों पर एसएसबी, खुफिया एजेंसियों के अलावा स्थानीय पुलिस भी नजर रख रही है। एडीजी के निर्देश पर नेपाल सीमा से सटे थानों की पुलिस अपने क्षेत्र में एसएसबी के साथ पेट्रोलिंग कर रही है, जिसकी रोजाना रिपोर्ट बनती है।
एडीजी अखिल कुमार ने कहा कि सीमावर्ती जिलों के एसपी को निर्देश दिया गया है कि युवाओं की टोली बनाई जाए। इसके तहत काम भी शुरू कर दिया गया है। गांवों वालों से पुलिस लगातार संपर्क में रहकर घुसपैठ, अपराध रोकने पर प्रभावी कार्रवाई करेगी।