शांति ने बताया कि 2019 में जय मां लक्ष्मी नाम से स्वयं सहायता समूह का गठन किया। इसमें 15 महिलाओं को जोड़ा। छोटी-छोटी बचत से उन्होंने सदस्यों को खेती संबंधित जरूरत के सामानों को मुहैया कराया। इसके बाद एक और स्वयं सहायता समूह बनाया। सभी महिलाओं को लेकर प्रधान से लेकर सचिव तक से मिलीं और अपने टोले का विकास करवाया।
शांति कृषि सेवा केंद्र की अध्यक्ष भी हैं। केंद्र से वह पाइप और पंपसेट किराए पर देती हैं। 100 मीटर पाइप को दस रुपये प्रति दिन के हिसाब से किराए पर देती हैं। इसके अलावा पंपसेट भी किराए पर मुहैया कराया जाता है। इससे भी आमदनी का स्रोत बढ़ा है।
शांति ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, नई दिल्ली के सौजन्य से हल्दी प्रोसेसिंग यूनिट लगाई। उनके पास एक एकड़ खेत है। जिसके आधे हिस्से में वह हल्दी की खेती करती हैं। अब वह हल्दी उगाने से लेकर उसकी पिसाई कर पैकेट बनाती हैं। ढाई सौ ग्राम, पांच सौ ग्राम और एक किलोग्राम के पैकेट बनातीं है। डब्बे में भी पैकेजिंग होती है।
बता दें कि सुरभि बीज प्रोड्यूसर कंपनी ने शांति से अनुबंध किया है। कंपनी एक कुंतल हल्दी के पैकेट को खरीद लेती है। बाकी पैकेट को शांति और उनसे जुड़ीं महिलाएं आसपास के गांवों में बेच देती हैं। घर का कामकाज करने के बाद प्रत्येक महिला को करीब तीन से चार हजार महीने की कमाई हो जा रही है।