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गोरखपुर विश्वविद्यालय : डिमांड वाले पाठ्यक्रमों में सृजित होंगे शिक्षकों के स्थायी पद

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- कम मांग वाले कोर्स से स्वीकृत पदों की कटौती कर समायोजन भी संभव
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गोरखपुर। लगभग 76 वर्ष पुराने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में बड़े सुधार की योजना बन रही है। अधिक मांग वाले पाठ्यक्रमों में शिक्षकों के सृजित किए जा सकते हैं। इसके लिए कम मांग वाले कोर्स से सीटों की कटौती कर समायोजन भी संभव है। हालांकि, इस पर अंतिम निर्णय शासन लेगा।

बदलते दौर के साथ पाठ्यक्रमों के प्रति विद्यार्थियों की रुचि भी बदली हैं। देश की आजादी के बाद उत्तर प्रदेश में स्थापित इस पहले विश्वविद्यालय में कई ऐसे विषय हैं, जिनकी डिमांड बहुत अधिक है। कई ऐसे भी विषय हैं, जिनमें जैसे-तैसे प्रवेश पूर्ण हो पाता है। अधिक मांग वाले विशेष रूप से प्रयोगात्मक विषयों के शिक्षकों के ऊपर बहुत अधिक लोड है, जबकि गैर प्रायोगिक कम मांग वाले विषयों में लोड कम होने की चर्चाएं अक्सर सामने आती रहती हैं।
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इसे देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी विभागों से वर्क लोड मांगा है। इसके जरिये विश्वविद्यालय प्रशासन यह आकलन करना चाहता है कि हर विभाग में प्रति शिक्षक पर कितना लोड है। यूजीसी के मानक के अनुसार, सप्ताह में असिस्टेंट प्रोफेसर का वर्क लोड 18 और एसोसिएट प्रोफेसर व प्रोफेसर का 16-16 घंटे होना चाहिए। वर्क लोड में सिर्फ अध्यापन और प्रैक्टिकल कराने को ही शामिल किया जाता है। प्रायोगिक वाले कई विभागों में शिक्षकों का साप्ताहिक वर्क लोड 24 से 30 घंटे तक है।


किस शिक्षक के जिम्मे कितना वर्क लोड
विश्वविद्यालय प्रशासन ने विभागों से सभी शिक्षकों का अलग-अलग ब्योरा मांगा है। कई बार यह शिकायतें आती रहती हैं कि किसी शिक्षक को बहुत अधिक तो किसी को बहुत कम काम दिया जाता है। विभागवार रिपोर्ट से इन आरोपों की हकीकत भी पता चल सकेगी।

कम छात्र वाले पाठ्यक्रमों में सुधार की भी है योजना
विश्वविद्यालय में लगभग 10 ऐसे नियमित पाठ्यक्रम हैं, जिनके प्रति समय के साथ छात्रों की रुचि कम हुई है। उन विषयों को तकनीक या अन्य उपायों से रोचक बनाने के उपाय भी किए जाएंगे। डीडीयू प्रशासन को उम्मीद है कि सुधार से उन विषयों के प्रति रुचि बढ़ सकती है।
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बोलीं कुलपति-
इस संबंध में कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने बताया कि सभी विभागों से शिक्षकों का वर्क लोड मांगा गया है। रिपोर्ट मिलने के बाद उसकी विभागवार समीक्षा की जाएगी। शिक्षकों के कम वर्क लोड वाले विषयों में सुधार के उपाय किए जाने की योजना है। जरूरत महसूस हुई तो अधिक डिमांड वाले विषयों में स्वीकृत पद बढ़ाए जाने के लिए शासन को पत्र लिखा जाएगा।
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