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पड़ताल: गोरखपुर के 7500 प्रवासी कामगारों तक पहुंची मदद, बहुतों को अब भी इंतजार

Sat, 16 May 2020 03:35 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

  • बाहर से लौटने वाले कामगारों को खाद्य सामग्री का पैकेट देने का है निर्देश, सबको नहीं मिल पा रहे
  • आदेश आने के बाद 10000 पैकेट का हुआ था टेंडर, अब फिर 2500 पैकेट मंगाए जा रहे
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gorakhpur news - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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दूसरे प्रांतों से 14 मई तक लौटे 7500 प्रवासी कामगारों तक ही खाद्य सामग्री के पैकेट पहुंच सके, जबकि बहुत से ऐसे भी कामगार हैं, जिन्हें अब तक कोई मदद नहीं मिल सकी है। जिला प्रशासन का कहना है कि खाद्य सामग्री के 10 हजार पैकेट का टेंडर हुआ था। 7500 पैकेट अब तक आए हैं। एक से दो दिन में 2500 पैकेट और पहुंच जाएंगे। तहसीलवार उनका भी वितरण करा दिया जाएगा।

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इसके अलावा 2500 पैकेट और मंगाए जा रहे हैं। आते ही उनका भी वितरण किया जाएगा। दूसरे प्रांतों से घर लौट रहे प्रवासी कामगारों की सहूलियत के लिए शासन ने खाद्य सामग्रियों के पैकेट देने का निर्देश दिया था। 13 अप्रैल को शासनादेश आने के बाद टेंडर प्रक्रिया में लगभग सप्ताह भर का समय लग गया। जिले में 22 अप्रैल के बाद इन पैकेटों का वितरण शुरू हो सका।
 
अमर उजाला की पड़ताल में यह बात भी सामने आई कि कई कामगारों, आम ग्रामीणों को तो सरकार की इस योजना की जानकारी भी नहीं है। नतीजा यह कि उन्हें अपना हक तो नहीं ही मिल रहा। नतीजा, व्यवस्था करने के बावजूद शासन-प्रशासन की भी किरकिरी हो रही है।
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नियम है कि क्वारंटीन पीरियड पूरा होने पर घर जाते वक्त ही खाद्य पैकेट दिया जाएं। वहीं 13 अप्रैल के पहले क्वारंटीन पीरियड पूरा कर चुके सैकड़ों लोगों में भी इसे लेकर आक्रोश है कि उन्हें खाद्य सामग्रियों के पैकेट क्यों नहीं दिए जा रहे। 

पहले बाहर से आने वाले सभी लोगों को क्वारंटीन सेंटर में क्वारंटीन किया जा रहा था। शासन के निर्देश पर एक मई से व्यवस्था बदल दी गई। ट्रेनों या बसों से आने वाले प्रवासी कामगारों का नाम, पता मोबाइल नंबर आदि जरूरी जानकारी दर्ज करने और थर्मल स्कैनिंग कर उन्हें होम क्वारंटीन कर दिया जा रहा है।

अपर मुख्य सचिव की तरफ से 13 अप्रैल को जारी शासनादेश में निर्देश दिए गए थे कि क्वारंटीन पीरियड पूरा होने के बाद जब कामगार क्वारंटीन सेंटर से अपने घर जाएं तो उन्हें 15 दिन के राशन मसलन आटा, चावल, आलू, भुना चना, दाल, तेल, मसाला और नमक जैसी सभी जरूरी खाद्य सामग्री का पैकेट दिया जाए।

बाद में एक मई से जब सभी को होम क्वारंटीन की व्यवस्था लागू हुई तो तहसील प्रशासन की मदद से अब सभी के घर ये पैकेट पहुंचाए जाने हैं।

केस 1 - बड़हलगंज
बड़हलगंज विकास खंड के ददरी गांव निवासी निवासी मोनू गौड़, प्रिंस चौधरी और बिंदेश गौड़ पटना साहिब से सैकड़ों किलोमीटर साइकिल चलाकर 25 अप्रैल को गांव पहुंचे। जांच के बाद गांव के स्कूल पर 14 दिन की क्वारंटीन अवधि को पूरा किया, मगर तहसील प्रशासन की ओर से खाद्य सामग्री का कोई पैकेट प्रदान नहीं किया गया।

केस 2- कौड़ीराम
इटकौली गांव के रिंकू कुमार ने बताया कि सात मई को ट्रक से कौड़ीराम पहुंचे। सर्वोदय किसान इंटरमीडिएट कॉलेज पर जांच के बाद घर पर ही रहने की सलाह दी गई। मगर कोई खाद्य सामग्री नहीं प्रदान की गई। ऐसे ही 14 मई को मुंबई से लौटे भीम के साथ भी हुआ। क्वारंटीन सेंटर पर खाद्य सामग्री खत्म होने की बात कही गई।

केस 3- चौरीचौरा
मुंबई से 10 मई को पहुंचे ग्राम पंचायत रामपुर रकबा निवासी राम सहारे यादव, बलिराम यादव, कोइल और मनोज ने बताया कि शासन के निर्देश पर घर पर ही क्वारंटीन हैं। मगर, खाद्य सामग्री अभी तक नहीं मिली है।

केस 4- गोला बाजार और खजनी
बड़ोदरा से आने वाले बेवरी गांव निवास संगम और भोलू ने बताया कि पांच दिन पहले ही घर पहुंचे हैं। जांच हुई कोई खाद्य सामग्री तहसील प्रशासन से नहीं मिली। जब वहां पता किया तो पता चला कि प्रवासी मजदूरी के सापेक्ष उनके पास किट ही मौजूद नहीं हैं। वहीं खजनी के तुर्कवलिया निवासी अरविंद और सूरज, बंदुआरी के राजकमल और अमित भी मुंबई से लौटे हैं। इन्हें भी होम क्वारंटीन कराया गया है। खाद्य सामग्री नहीं दी गई।

केस 5 - सहजनवां
ग्राम नेवास के रहने वाले रमेश कन्नौजिया और मनोज कुमार त्रिपाठी ने बताया कि 10 मई को मुंबई से लौटे हैं। प्राथमिक जांच के बाद उन्हें होम क्वारंटीन की सलाह दी गई। इस दौरान तहसील प्रशासन की ओर से खाद्य सामग्री का पैकेट दिया गया है।

केस 6- उरुवां
इमलीखुर्द निवासी टीपू सुल्तान और मोहम्मद हुसैन 30 अप्रैल को लुधियाना से घर पहुंचे। एक मदरसे में क्वारंटाइन कराने के बाद इन्हें दो दिन पहले जांच के बाद खाद्य सामग्री के किट के साथ घर भेज दिया गया है।

केस 7- जगदीशपुर
11 मई को राजस्थान से लौटे ऋषिकेश को प्राथमिक विद्यालय जगदीशपुर के क्वारंटीन सेंटर पर जांच के बाद होम क्वारंटीन की सलाह दी गई। तहसील प्रशासन की ओर से खाद्य सामग्री किट प्रदान की गई।

केस -8
चार दिन पहले लौटे कुसमौल निवासी राकेश, अजय, अमित और कोपवा निवासी प्रह्लाद, दिलीप, संजय और प्रमोद ने बताया कि जवाहर लाल नेहरू पीजी कॉलेज में बने क्वारंटीन सेंटर पर जांच हुई। होम क्वारंटीन की सलाह देने के साथ ही उन्हें खाद्य सामग्री प्रदान की गई है।

मुरादाबाद से आ रहे पैकेट, एक की कीमत 1258 रुपये

13 अप्रैल को शासन से निर्देश मिलने के बाद जिला प्रशासन ने 15 दिन के लिए जरूरी सभी खाद्य सामग्रियों वाले पैकेट का टेंडर निकाला था। मुरादाबाद की फर्म को काम मिला। 22 अप्रैल को मुरादाबाद से खाद्य सामग्री के एक हजार पैकेट लेकर पहला ट्रक गोरखपुर पहुंचा।

इसके बाद सभी तहसीलों में बराबर-बराबर पैकेट पहुंचाए गए। सभी तहसीलों के एसडीएम और तहसीलदार को जिम्मेदारी दी गई कि वे अपनी देखरेख में राजस्व कर्मियों की सहायता से क्वारंटीन सेंटर में क्वारंटीन पीरियड पूरा करने वालों को खाद्य पैकेट उपलब्ध कराएंगे।

वहीं जो होम क्वारंटीन हैं, कर्मचारी उनके घर जाकर उन्हें पैकेट देंगे और सभी से रिसीविंग भी लेंगे, ताकि कोई अनियमितता न हो सके। एडीएम फाइनेंस राजेश कुमार सिंह के मुताबिक प्रत्येक पैकेट की कीमत 1258 रुपये है।
 
प्रत्येक पैकेट में ये खाद्य सामग्री हैं-
10 किलो आटा
10 किलो चावल
5 किलो आलू
2 किलो भूना चना
2 किलो अरहर दाल
500 ग्राम नमक
250 ग्राम हल्दी पाउडर
250 ग्राम मिर्च
250 ग्राम धनिया
1 लीटर सरसों/ रिफाइंड तेल

एक परिवार के दो व्यक्ति तो मिलेगा एक ही पैकेट

जिला आपदा विभाग के संयोजक गौतम गुप्ता ने बताया कि यदि एक ही परिवार से दो लोग क्वारंटीन सेंटर या होम क्वारंटीन में हैं तो उन्हें एक ही यूनिट माना जाएगा और खाद्य सामग्री का एक ही पैकेट दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि रोजाना तहसीलों से वितरित हुए और बचे हुए पैकेट की रिपोर्ट आती है। खुद आपदा प्रभारी व एडीएम फाइनेंस नियमित इसकी समीक्षा करते हैं।
 
अब तक 25 हजार लोग आ चुके हैं
लॉकडाउन शुरू होने के बाद से अब तक करीब 25 हजार लोग दिल्ली, मुंबई, पंजाब, हरियाणा, गुजरात आदि प्रांतों से गोरखपुर लौट चुके हैं। 11 मई तक सिर्फ ट्रेनों से ही 5954 लोग आए इनमें सर्वाधिक 851 लोग निगमपल्ली, 766 लुधियाना, 707 जालंधर, 698 भिवंडी और 576 बड़ोदरा के शामिल रहे।

इसके अलावा अहमदाबाद, भावनगर, सूरत, साबरमती,  सरहिंद, नाडियाड, वसई आदि स्टेशनों से भी लोग आए। ट्रेन से आने वाले सभी लोग हाल के 10 दिन में गोरखपुर पहुंचे हैं।
 
सदर तहसील में 1189, सहजनवां में 900 पैकेट बंटे
सदर तहसीलदार डॉ. संजीव दीक्षित ने बताया कि तहसील को तीन शिफ्ट में 494, 350 और 400 यानी कुल 1244 पैकेट खाद्य सामग्री मिल चुकी है। गुरुवार बृहस्पतिवार तक 1189 पैकेट वितरित किए जा चुुके हैं। उन्होंने बताया कि कुछ और पैकेट की डिमांड की जा रही है।

वहीं सहजनवां के तहसीलदार लाल जी विश्वकर्मा ने बताया कि उनके तहसील क्षेत्र में करीब 1400 प्रवासी मजदूर आए जिनमें से अब तक 900 को ग्राम प्रधान की मौजूदगी में राजस्व टीम खाद्य सामग्री वितरित कर चुकी है।
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एडीएम फाइनेंस व प्रभारी अधिकारी राजेश कुमार सिंह ने बताया कि आपदा 13 अप्रैल को शासन का निर्देश मिलते ही टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई। 10 हजार खाद्य पैकेट के टेंडर निकाले गए थे। मुरादाबाद की फर्म को काम मिला था।

उसकी तरफ से अब तक 7500 पैकेट उपलब्ध कराए जा चुके हैं। तहसील प्रशासन के माध्यम से ये सभी पैकेट वितरित किए जा चुके हैं। 2500 पैकेट एक से दो दिन में आ जाएंगे। जबकि ,फर्म को इन 10 हजार के अलावा और 2500 पैकेट का आर्डर दे दिया गया है।

जल्द ही वे पैकेट भी आ जाएंगे। एसडीएम और तहसीलदार की निगरानी में तहसील के कर्मचारी क्वारंटीन सेंटर से क्वारंटीन पीरियड पूरा कर जाते समय और होम क्वारंटीन किए गए लोगों को घर पर पैकेट पहुंचा रही है। सभी की रिसीविंग भी है। जो बचे हैं, उन्हें भी जल्द ही पैकेट उपलब्ध कराए जाएंगे।
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