इन जगहों पर उड़ने वाली धूल की वजह से लोगों को राह चलने में मुश्किल आ रही थी। उधर शहर में हवा की गुणवत्ता भी खराब होने लगी। इस संंबंंध में अमर उजाला ने बीते कई दिनों से लगातार खबरें प्रकाशित कीं। इसको संज्ञान में लेते हुए कार्यदायी संस्थाओं की ओर से धूल को नियंत्रित करने के उपाय किए गए।
बुधवार की दोपहर 12.16 बजे सिक्सलेन रोड पर देवरिया बाईपास के पास मिट्टी पर गिट्टी बिछाई गई। यहां वाहनों के गुजरने पर धूल न उड़े, इसलिए पानी का छिड़काव कराया गया था। इससे वाहनों के आने-जाने के दौरान बेहद ही कम धूल उड़ रही थी। यहां तैनात यातायात पुलिसकर्मियों ने बताया कि पहले तिराहे पर खड़ा होना मुश्किल था। लेकिन अब काफी राहत मिली है।
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इसके अलावा तारामंडल क्षेत्र में बन रहे फोरलेन के किनारे हरे रंग की टाट-पट्टी लगाई गई है। यहां कार्यदायी संस्था की ओर से पानी का छिड़काव भी कराया जा रहा है। पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने कहा कि कार्यदायी संस्थाओं को इस संबंध में चेतावनी दी गई है। यदि लापरवाही मिली तो कार्रवाई होगी।
बुधवार को शहर में वायु गुणवत्ता का सूचकांक (एक्यूआई) 163 पर रहा, जो कि मध्यम स्तर का रहा। जबकि इसके पूर्व मंगलवार को एक्यूआई 224, सोमवार को 203 और रविवार को 279 दर्ज किया गया था, जिसे खराब स्तर का माना जाता है।
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क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी अनिल कुमार शर्मा ने कहा कि गोरखपुर शहर में वायु प्रदूषण रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई के संबंध में सभी विभागों को पत्र भेजा गया है। शासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन कराया जाएगा।