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आफत की बाढ़: गोर्रा को छोड़कर सभी नदियों का घटने लगा जलस्तर, बाढ़ से दर्जनों गांव प्रभावित

Sun, 22 Aug 2021 03:19 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।

सार

खतरे के निशान से राप्ती 84 और गोर्रा 40 सेमी ऊपर बह रही, रोहिन और घाघरा नदी खतरे के निशान से आईं नीचे।
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राप्ती नदी। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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गोरखपुर जिले में बहने वाली नदियों का जलस्तर अब घटने लगा है। हालांकि गोर्रा नदी में पानी अभी भी बढ़ रहा है। शनिवार को गोर्रा को छोड़ जनपद में बहने वाली सभी प्रमुख नदियों का जलस्तर नीचे की तरफ आने लगा है। राप्ती नदी का जलस्तर नीचे आने पर भी वह खतरे के निशान से 84 सेमी ऊपर बह रही हैं। ऐसे में तटवर्ती इलाकों में खतरा अभी भी बना है। सिंचाई विभाग सतत निगरानी में लगा है।

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देर रात मैदानी इलाकों में भारी बारिश के बाद भी जनपद में बहने वाली प्रमुख नदियां गोर्रा को छोड़कर नीचे की तरफ आनी शुरू हो गई हैं। राप्ती नदी का जलस्तर लगातार बढ़ता रहा था लेकिन शाम को वह नीचे की तरफ आनी शुरू हो गई। फिर भी वह खतरे के निशान से 84 सेंटीमीटर ऊपर बह रही हैं।

उसके तटवर्ती इलाकों में कई तटबंधों पर पानी का दबाव है। सिंचाई विभाग की तरफ से कटान निरोधक उपाय किए जा रहे हैं। एक दिन में खतरे का निशान पार करने वाली रोहिन नदी शनिवार को खतरे के निशान से 34 सेमी नीचे आ गई है। इसकी बाढ़ से दर्जनों गांव प्रभावित हो गए थे।
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दूसरी तरफ घाघरा नदी जो कल तक खतरे के निशान से ऊपर बह रही थीं आज वह खतरे के निशान से सात सेमी नीचे आ गई हैं। राप्ती और घाघरा नदी का जलस्तर बढ़ने से सर्वाधिक गांव प्रभावित हुए थे। सबसे अधिक गांव गोला तहसील के इन्हीं दो नदियों के कारण प्रभावित थे। वहीं दूसरी तरफ गोर्रा नदी का जलस्तर अब भी बढ़ रहा है। यह खतरे के निशान से 40 सेमी ऊपर पहुंच गई है।

अधिशासी अभियता बाढ़ खंड 2 रूपेश कुमार खरे ने कहा कि नदियों का जलस्तर नीचे ऊपर हो रहा है। अभी कहीं कोई खतरे की बात नहीं है। सभी तटबंध सुरक्षित हैं। कुछ स्थानों पर पानी का दबाव है वहां कटान निरोधक उपाय किए जा रहे हैं।

 

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बाढ़ की चपेट में 111 गांवों की 58 हजार आबादी

राप्ती, आमी, घाघरा आदि नदियों के जलस्तर में हुई वृद्धि के कारण अब तक जिले के 111 बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं। इन गांवों में बसी लगभग 58 हजार की आबादी व पांच हजार हेक्टेयर फसल भी प्रभावित हुई है। प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद के लिए 116 नावें लगाई हैं। इसके अलावा सभी 86 बाढ़ चौकियों को सक्रिय कर प्रभावित गांवों में राशन, पशुओं के लिए चारा आदि भेजने का प्रबंध किया जा रहा है।

नेपाल में हो रही बारिश के चलते पूर्वांचल की सभी नदियां एक सप्ताह से ऊफान पर हैं। हलांकि अब जलस्तर में कमी आना शुरू हुआ है लेकिन पहले बढ़े जलस्तर के चलते प्रभावित गांवों की संख्या में लगातार वृद्घि हो रही है। शनिवार को जिले के 111 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए।

प्रशासन की तरफ से दी गई जानकारी के अनुसार सदर तहसील के 24, सहजनवा के 13, कैंपियरगंज के आठ, चौरीचौरा के दो, गोला के 25, बांसगांव के चार, चौरीचौरा के पांच व खजनी के दो गांव बाढ़ प्रभावित हैं। प्रभावित लोगों के आवागमन और उन तक अनाज समेत अन्य सामान पहुंचाने के लिए प्रशासन ने 116 नावें लगाई हैं।

इसमें सदर तहसील में 59, सहजनवा में 13, कैंपियरगंज में आठ, गोला में 25, बांसगांव में चार, चौरीचौरा में पांच व खजनी में दो नावें लगाई गई हैं। बाढ़ प्रभावित इलाके के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी स्नैक वेनम उपलब्ध कराया गया है। इसके अलावा बाढ़ प्रभावित इलाके में एनडीआरएफ की दो व एसडीआरएफ की एक यूनिट भी तैनात की गई है।
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