फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Vinod Upadhyay: एक आवाज पर जुट जाते थे सैकड़ों, अंतिम संस्कार में मुट्ठी भर लोग भी नहीं; सबसे करीबी झांके तक न

Sun, 07 Jan 2024 09:13 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर

सार

Vinod Upadhyay Gorakhpur: माफिया विनोद की एक आवाज पर सैकड़ों लोग जुट जाते थे। लेकिन अंतिम संस्कार में मुट्ठी भर लोग भी नहीं आए। परिजन रात 2.45 बजे माफिया विनोद का शव लेकर गोरखपुर आए। सुबह राजघाट पर अंतिम संस्कार किया गया। भाई विजय प्रकाश ने विनोद के बेटे को गोद में लेकर मुखाग्नि दिलाई। धंधे में साथ रहने वाले झांके तक नहीं।
विज्ञापन
Vinod Upadhyay - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

समय सबका हिसाब रखता है। एक वक्त वह था, जब माफिया विनोद उपाध्याय की एक आवाज पर सैकड़ों लोग जुट जाते थे। एक वक्त यह भी है कि जब उसकी मौत हुई तो अंतिम संस्कार में मुठ्ठी भर लोग भी नहीं जुटे। 
विज्ञापन


उसके कुछ खास लोगों में चर्चा रही कि जिन लोगों ने सबसे ज्यादा मौज मारी, वे झांके तक नहीं। महज 24-25 लोग ही राजघाट तक पहुंचे थे। भाई विजय प्रकाश ने विनोद के बेटे को गोद में लेकर मुखाग्नि दिलाई।

शुक्रवार को सुल्तानपुर में एसटीएफ की टीम से हुई मुठभेड़ में माफिया विनोद उपाध्याय को मार गिराया गया था। इसके बाद पत्नी तृप्ति उपाध्याय व भाई जयप्रकाश उपाध्याय वहां शव लेने पहुंचे। रात में वीडियोग्राफी के बीच शव का पोस्टमार्टम हुआ। घरवाले रात 2.45 बजे के करीब शव लेकर गोरखपुर के धर्मशाला स्थित आवास पर पहुंचे। 
विज्ञापन


इसे लेकर पुलिस पहले से सतर्क थी। पुलिस की मौजूदगी में शनिवार सुबह दाह संस्कार कराया गया। दाह संस्कार के दौरान तीन सिपाही घाट पर तो कुछ घर पर तैनात रहे। पुलिस आने जाने वालों पर बारीकी से नजर रखे थी।
Trending Videos

घर से लेकर राजघाट तक पुलिस का पहरा
विनोद उपाध्याय के घर से लेकर राजघाट तक पुलिस का पहरा रहा। खबर है कि घर पर बेटे-बेटी के साथ ही पत्नी के आने की वजह से ही अयोध्या की जगह गोरखपुर में माफिया का अंतिम संस्कार किया गया। वहीं, जेल में बंद भाई संजय उपाध्याय ने भी अंतिम संस्कार में आने की इच्छा जाहिर की थी, लेकिन उसे अनुमति नहीं मिली।

 

पुलिस को चकमा देकर हो गया था फरार
यूपी के टॉप 61 और जिले के टॉप-10 बदमाशों की सूची में शामिल माफिया विनोद उपाध्याय पर हाल के दिनों में गुलरिहा और फिर शाहपुर थाने में केस दर्ज किया गया था। अंडरग्राउंड क्राइम की जड़ें पुलिस ने तलाशीं तो जिले के सभी बड़े माफिया जेल में चले गए। माफिया अजीत शाही, राकेश यादव, सुधीर सिंह कोर्ट में हाजिर हो गए। 

 

पुलिस ने अपराध से अर्जित इनकी संपत्तियों को भी बुलडोजर से जमींदोज कर दिया, लेकिन माफिया विनोद पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया था। इसके बाद ही पुलिस की नजरें उसपर टेढ़ी हो गईं। वह पहले 25 फिर 50 हजार और बाद में एक लाख रुपये का इनामी हो गया। सूत्रों के मुताबिक, वह कोर्ट में हाजिर तो होना चाहता था, लेकिन पुलिस की घेराबंदी की वजह से आ नहीं पाया।

योगी सरकार ने भुलवा दिया दरबार और दरबारी
माफिया विनोद की जब तूती बोलती थी, तब वह दरबार लगाकर लोगों के विवाद में फैसले सुनाता था। न मानने वालों के साथ गुंडई भी की जाती थी। विनोद को करीब से जानने वाले लोगों ने नाम न छापने के शर्त पर बताया कि एक समय था, जब वह विनस कंपाउंड व बशारतपुर स्थित आवास पर दरबार लगाता था। वहां लोगों के जमीन विवाद व लेन-देन के विवाद का फैसला करता था। जब वह कहीं निकलता था तो कई गाड़ियां, युवाओं का हुजूम, छात्रसंघ से जुड़े नेता साथ चलते थे। 

 

उससे करीबी दिखाने में लोगों में होड़ मचती थी। उसका खेल तब बिगड़ा, जब प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनी। योगी सरकार ने माफिया की कमर तोड़नी शुरू की तो विनोद भी कार्रवाई की जद में आ गया। सख्ती बढ़ी तो अपनों ने किनारा करना शुरू कर दिया। दरबार-दरबारी सब बिखरते गए। उसकी मौत के बाद भी यही हाल है। कभी उसके खास रहे लोग भी अब उससे अपना नाम जोड़ने से बचते दिख रहे हैं। 

 
विज्ञापन

माफिया के अंतिम संस्कार में परिवार, चुनिंदा दोस्तों के अलावा कोई नजर नहीं आया। इस दौरान चार चार पहिया व कुछ बाइकों से लोग आए थे। पुलिस के मुताबिक, मौके पर महज 24 से 25 लोग ही थे। पुराने लोगों में विनोद के मोहल्ले के ऑटो स्टैंड के दो साथी ही दिखे। वहीं बसपा का स्टिकर लगाए वाहन से कोई चेयरमैन आया था।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें