फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Vinod Upadhyay: कब्जे छुड़वा जमाए गए जमीन मालिकों की हत्या की फिराक में था विनोद, कत्ल करा दहशत फैलाना था मकसद

Sun, 07 Jan 2024 08:40 AM IST
शाहरुख खान रोहित सिंह, अमर उजाला, गोरखपुर

सार

Vinod Upadhyay Encounter: माफिया विनोद कब्जे छुड़वा जमाए गए जमीन मालिकों की हत्या की फिराक में था। उसका हत्या करवाकर दहशत फैलाने का मकसद था। ताकि आगे कोई जमीन के लिए सामने न आए। मई-जून और अक्तूबर में पुलिस ने विनोद के कब्जे से करोड़ों की जमीनें खाली कराई थी।
 
विज्ञापन
Vinod Upadhyay Encounter - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पुलिस ने गोरखपुर में मई से अभियान शुरू करवा कर माफिया विनोद उपाध्याय के कब्जे से जमीनों को खाली करवाया था। इन जमीनों की उनके असल भू-स्वामियों के नाम से रजिस्ट्री कराने के साथ कब्जा भी दिला दिया गया था। 
विज्ञापन


सूत्रों के मुताबिक, माफिया विनोद ने पुलिस की इस कार्रवाई के जवाब में इन असल कब्जेदारों की हत्या करने की साजिश रची थी। मंशा भू-स्वामियों की हत्या कर दहशत फैलाना था, ताकि इसके बाद कोई अपनी जमीन के लिए आगे न आए। एसटीएफ के सूत्र बताते हैं कि इसी सूचना के बाद टीम ने विनोद की गिरफ्तारी की योजना बनानी शुरू कर दी थी। 

पांच महीने तक गिरफ्तारी की फिराक में लगी एसटीएफ टीम को पांच जनवरी को सफलता मिल गई। मुठभेड़ में विनोद मारा गया। विनोद ने अपने रसूख और अपराध के दम पर शहर में गरीब, सरकारी और सरकारी सेवाओं में कार्यरत लोगों की काफी जमीनों पर अवैध कब्जा कर लिया था। डर की वजह से सामने आकर कोई विरोध नहीं कर पाता था। 
विज्ञापन


एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने यहां आने के बाद माफिया पर नकेल कसने की योजना बनाई। शासन की मंशा के अनुसार, गरीबों और जरूरतमंदों की जमीनों पर से अवैध कब्जे हटाने शुरू किए और विनोद की तलाश शुरू कर दी। इस बीच विनोद ने गोरखपुर छोड़ दिया।

सूत्र बताते हैं कि राजस्थान और छत्तीसगढ़ में विनोद ने अपने ठिकाने बना लिए थे। एसटीएफ के सूत्र ने बताया कि विनोद पुलिस की इस कार्रवाई से बेहद परेशान हो गया था। उसे लगता था कि जेल चला जाता तो अपने अपराध और वर्चस्व के दम पर कब्जा की गई करोड़ों रुपये की जमीनें धीमे-धीमे कब्जामुक्त हो जातीं। ऐसे में उसने मई से लेकर अक्तूबर तक खाली कराई गई जमीनों के स्वामियों की हत्या की साजिश रच ली थी।

इसकी सूचना एसटीएफ को लग गई थी। इसी के बाद एसटीएफ की टीम ने विनोद की हर हाल में गिरफ्तारी की योजना तैयार की। उसके ही राजदार को विश्वास में लेकर विनोद की गिरफ्तारी की योजना पर काम किया। बृहस्पतिवार रात मुठभेड़ में विनोद की मौत हो गई। एसटीएफ ने सुल्तानपुर के देहात कोतवाली में दर्ज कराए केस में भी ऐसा ही जिक्र किया है।
माफिया की शहर की सेटिंग को एसटीएफ ने भेदा

 

सूत्रों ने बताया कि माफिया विनोद उपाध्याय की शहर में तगड़ी सेटिंग थी। करीब तीन वर्ष पहले कोतवाली थाने में एक जमीन पर कब्जे को लेकर कुछ विवाद हो गया था। इसमें विनोद उपाध्याय पर भी केस दर्ज हो गया था। सूत्र बताते हैं कि शहर की इसी सेटिंग ने मामले में बिचौलिए का काम किया था। सेटिंग की धमक ऐसी थी कि केस दर्ज होने के बाद भी सब सेट हो गया था।
 

व्यापारी और मुस्लिम कारोबारी के साथ इसकी सेटिंग ठीक-ठाक थी। सूत्र बताते हैं कि इसी सेटिंग के दम पर पिछले दिनों लंबे फरारी के दौरान भी वह शहर में घूमता था। सूत्र बताते हैं कि यही कारण है कि घोष कंपनी और अन्य जगह देखे जाने के बाद भी उसकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी।

श्रीप्रकाश के बाद अब विनोद के खास भी बन जाएंगे करोड़पति
पुलिस को पता लगा है कि जैसे श्रीप्रकाश के एनकाउंटर के बाद शहर के कुछ पुराने सहयोगी करोड़पति बन गए थे, ऐसे ही विनोद की मौत के बाद अब उसके सहयोगी और साझेदार भी करोड़पति बन जाएंगे। पुलिस और एजेंसी अगर उसके इस नेटवर्क को तलाश कर तोड़ देगी तो भविष्य में कोई खास नहीं बन पाएगा।

सूत्र बताते हैं कि नौसड़, भेड़ियागढ़, खोराबार (पेट्रोल पंप के पास), बंधे के पास, घासीकटरा और हिंदी बाजार में करोड़ों रुपये की जमीनें विनोद के तीन मुख्य साझेदारों के नाम पर हैं। इनसे भी अगर वसूली हो जाए तो कई लाचारों को उनकी खोई जमीन मिल सकती है।
 
विज्ञापन

राजस्थान, नेपाल और छत्तीसगढ़ था खास ठिकाना
सूत्र बताते हैं कि विनोद उपाध्याय का छत्तीसगढ़ और राजस्थान में कई ठिकाने थे। राजस्थान के उदयपुर में तो विनोद ने बाकायदा पहाड़ों के बीच फॉर्म हाउस तक बनवाया था। उत्तर प्रदेश में दबाव पड़ते ही राजस्थान और छत्तीसगढ़ की तरफ निकल जाता था क्योंकि वहां की सरकार में उसकी पूरी सेटिंग थी। लेकिन, सरकार बदलते ही सेटिंग का सिस्टम बिगड़ गया। सूत्र बताते हैं कि अभी कुछ दिन पहले ही छत्तीसगढ़ से यूपी में प्रवेश भी किया था, लेकिन इस बार एसटीएफ के हत्थे चढ़ गया।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें